Thursday, June 13, 2024
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खाली थिएटरों से ₹1000 करोड़ की कमाई के लिए ‘पठान’ को ऑस्कर, कालजयी डायलॉग ‘शिवा-शिवा’ के लिए ‘ब्रह्मास्त्र’ को भी अवॉर्ड: अंतिम समय में फैसला

दरअसल, 'पठान' को इसीलिए ऑस्कर मिला है क्योंकि इसने दिखा दिया है कि बिना दर्शकों के भी फिल्म को ब्लॉकबस्टर बनाया जा सकता है।

अब तक आपने ख़बरों में पढ़ ही लिया होगा कि SS राजामौली द्वारा निर्देशित तेलुगु फिल्म ‘RRR’ के गाने ‘नाटू नाटू’ को ऑस्कर अवॉर्ड मिला है। एकेडमी अवॉर्ड के मंच पर दिया गया संगीतकार एमएम कीरवानी की स्पीच भी वायरल हो रही है। केरल की एक कहानी ‘The Elephant Whisperers’ को भी सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री की श्रेणी में ऑस्कर मिला है। भारत के लिए ये गर्व का क्षण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बधाई दी है।

लेकिन, अब ताज़ा खबर ये आ रही है कि शाहरुख़ खान, जॉन अब्राहम और दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘पठान’ को भी ऑस्कर अवॉर्ड से नवाजा गया है। साथ ही रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और अमिताभ बच्चन की मूवी ‘ब्रह्मास्त्र’ को भी ऑस्कर अवॉर्ड मिला है। अंतिम समय में ये फैसला लिया गया। इसके लिए अलग से कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। उसमें इन दोनों फिल्मों की टीम को बुला कर सम्मानित किया गया।

अब ये भी जान लीजिए कि इन दोनों ही फिल्मों को किस श्रेणी में ऑस्कर मिला है। दरअसल, ‘पठान’ को इसीलिए ऑस्कर मिला है क्योंकि इसने दिखा दिया है कि बिना दर्शकों के भी फिल्म को ब्लॉकबस्टर बनाया जा सकता है। आपने बिलकुल ठीक समझा, दर्शक अगर मूवी को देखने के लिए सिनेमा थिएटर न जाएँ फिर भी कमाई हो जाएगी। बॉलीवुड ने इसे संभव कर के दिखाया है। तभी, ‘पठान’ ने 1000 करोड़ रुपए कमा लिए।

देश भर के सिनेमाघरों से खाली थिएटरों की तस्वीरें आईं, वीडियोज आए। दक्षिण भारतीय भाषाओं (तमिल, तेलुगु, मलयालम) में ‘पठान’ ने अच्छा कारोबार नहीं किया। PVR जैसे थिएटर चेन के शेयरों का ग्राफ गिर गया। लेकिन, ‘पठान’ फिर भी ब्लॉकबस्टर हो गई। यानी, ‘KGF 2’ और ‘RRR’ जैसी फिल्मों ने कई भाषाओं में तगड़ा प्रमोशन और बड़ी भीड़ जुटा कर बेकार की मगजमारी की। फिल्म बिना दर्शकों के हजार करोड़ कमा सकती है, फिर इतनी मेहनत क्यों?

अब बात करते हैं ‘ब्रह्मास्त्र’ की, लेकिन उससे पहले इन कालजयी डायलॉग्स पर नजर डालिए:

  • मैं आग से जलता नहीं, कुछ रिश्ता है मेरा आग से, आग मुझे जलाती नहीं
  • कौन हो तुम, क्या हो तुम?
  • गुरुजी, शिवा उठ क्यों नहीं रहा है? – वो सो रहा है क्योंकि उसकी शक्तियाँ जाग रही हैं।
  • ब्रह्मास्त्र वो गोल-गोल पिज्जा जैसा।
  • तुम्हें अपने पॉवर ऑन करने के लिए अपने-आप को ऑन करना पड़ेगा।
  • अस्त्र को ऑन करने के लिए खुद को ऑन करना पड़ता है।
  • तुम्हें ऑन होने के लिए एक बटन की ज़रूरत है।
  • मेरी पॉवर्स का एक बटन है, वो अभी ऑफ है, उसे ऑन सच्चा प्यार ही कर सकता है और वो बटन है ईशा।
  • रोशनी एक लाइट है, लाइट वो रोशनी है, जो सबके अंधेरों से बड़ी है।
  • तू हाथी नहीं, तू गेंडा है।
  • तुम ‘ब्रह्मांश’ के मेंबर बन जाओ। मैं तुम्हें डीजे से ड्रैगन बना दूँगा।
  • गुरु जी, शिवा को दौरे पड़ रहे हैं, उसको सब नजर आ रहा है।
  • क्या हुआ शिवा? हुआ क्या शिवा? शिवा.. शिवा.. शिवा…
  • कुछ भी नहीं है शिवा, बस तुम्हारे प्यार में जल गई।
  • शिवा, तुम ठीक हो शिवा? शिवा.. शिवा.. शिवा…
  • ईशा मेरा बटन है।
    शिवा.. शिवा.. शिवा…
  • शिवा.. शिवा.. शिवा…
  • शिवा.. शिवा.. शिवा…

आपने बिलकुल ठीक समझा। इन्हीं कालजयी डायलॉग्स के लिए ‘ब्रह्मास्त्र’ को अवॉर्ड मिला है। इस फिल्म ने दुनिया को बताया है कि रोशनी, प्रकाश और लाइट में क्या-क्या अंतर है। इसने सिखाया है कि प्रेमी-प्रेमिका जब रोमांस करते हैं तो ‘ब्रह्मास्त्र’ की शक्ति फीकी पड़ जाती है। ‘ब्रह्मास्त्र’ की कमाई को लेकर भी तरह-तरह के दावे किए गए थे, फिर भी बॉलीवुड डूब रहा है। ऐसे कारनामों के लिए तो एक नहीं, हजार ऑस्कर बनते हैं।

गुप्त सूत्रों से पता चला है कि ऑस्कर वालों ने तो इन दोनों फिल्मों की टीम को यहाँ तक ऑफर दिया था कि वो उनके घर आकर कार्यक्रम आयोजित कर के अवॉर्ड दे देंगे, लेकिन दोनों फिल्मों के निर्माताओं ने बड़प्पन दिखाते हुए खुद हॉलीवुड जाकर अवॉर्ड लेने का फैसला लिया। ऑस्कर ने कहा है कि दोनों फिल्मों को नवाज कर एकेडमी अवॉर्ड्स का भी सिर गर्व से ऊँचा हो गया है। हालाँकि, बताया जा रहा है कि एक सीक्रेट कार्यक्रम में इन्हें अवॉर्ड्स दिए गए।

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अनुपम कुमार सिंह
अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
भारत की सनातन परंपरा के पुनर्जागरण के अभियान में 'गिलहरी योगदान' दे रहा एक छोटा सा सिपाही, जिसे भारतीय इतिहास, संस्कृति, राजनीति और सिनेमा की समझ है। पढ़ाई कम्प्यूटर साइंस से हुई, लेकिन यात्रा मीडिया की चल रही है। अपने लेखों के जरिए समसामयिक विषयों के विश्लेषण के साथ-साथ वो चीजें आपके समक्ष लाने का प्रयास करता हूँ, जिन पर मुख्यधारा की मीडिया का एक बड़ा वर्ग पर्दा डालने की कोशिश में लगा रहता है।

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