Friday, March 5, 2021
Home विविध विषय कला-साहित्य लौट के अवॉर्ड वापसी गैंग साहित्य अकादमी में आया, क्या 'सहिष्णु' हो गए मोदी?

लौट के अवॉर्ड वापसी गैंग साहित्य अकादमी में आया, क्या ‘सहिष्णु’ हो गए मोदी?

आपको 2015 बिहार विधानसभा चुनाव याद होगा। तब उदय प्रकाश, मंगलेश डबराल और अशोक वाजपेयी जैसे लेखकों ने अवॉर्ड-वापसी में हिस्सा लिया था। सच्चिदानंद सिंह जैसों ने तो साहित्य अकादमी से संबंध ही नहीं रखने का ऐलान कर दिया था। लेकिन, इस साल वे जूरी में शामिल थे।

साहित्य अकादमी पुरस्कार का विवादों से पुराना नाता रहा है। न सिर्फ़ पुरस्कार, बल्कि पुरस्कार इसे लेने वाले भी विवाद खड़ा करने में अव्वल रहे हैं। इस वर्ष भी कुछ ऐसा ही हुआ। साहित्य अकादमी पुरस्कार का इंतजार देश भर के लोगों को था और जब इसकी घोषणा हुई तो फिर विवाद हुए। विवाद की शुरुआत तभी हो गई थी, जब मैथिली भाषा के संयोजक प्रेम मोहन मिश्र ने इस्तीफे का मेल भेजा। उन्हें इस पुरस्कार को देने की प्रक्रिया पर संदेह था और उन्होंने जूरी पर ही सवाल खड़े कर दिए। उनका आरोप था कि जूरी के गठन को लेकर एक रैकेट सक्रिय है।

मिश्रा का आरोप था कि पुरस्कार किसे दिया जाना है, इस वर्ष यह सब पूर्व-निर्धारित था। उनकी माँग है कि जूरी के चयन और पुरस्कार की प्रक्रिया गोपनीय रखी जानी चाहिए। वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार अनंत विजय ने ‘दैनिक जागरण’ में रविवार (दिसंबर 22, 2019) को एक लेख लिखा, जिसमें इस पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया है। अनंत विजय ने इस लेख में बताया है कि साहित्य अकादमी में हर भाषा के प्रतिनिधि ही अब तक जूरी के सदस्यों के नाम प्रस्तावित करते रहे हैं। इसमें इसका ध्यान रखा जाता है कि एक ही सदस्य दो साल तक जूरी में न रहे। इसका अर्थ है कि आरोप लगाने वाले मिश्रा ने भी जूरी के एक सदस्य का नाम प्रस्तावित किया होगा।

प्रेम मोहन मिश्र कहते हैं कि उन्होंने आपत्ति जताई थी। लेकिन, उन्होंने तब आपत्ति जताई थी जब पुरस्कार के लिए चयन की प्रक्रिया पूरी हो गई थी। अनंत विजय कहते हैं कि वामपंथियों के दबदबे वाले जमाने में जूरी के गठन व पुरस्कार दिए जाने में एक रैकेट ज़रूर सक्रिय रहता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से ऐसा देखने को नहीं मिला है। उस वक़्त लोगों को महीनों पहले पता चल जाता था कि पुरस्कार किसे मिलेगा? तो क्या अब वामपंथियों और विपक्ष के इस आरोप में दम है कि मोदी सरकार स्वायत्त संस्थाओं को नष्ट कर रही है और तानाशाही भरे रवैये से उन्हें प्रशासित कर रही है?

इस आरोप की हवा निकालने के लिए एक उदाहरण देखते हैं। अगर ऐसा होता तो क्या इस वर्ष तिरुअनंतपुरम से सांसद और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर को उनकी पुस्तक ‘एन एरा ऑफ डार्कनेस’ के लिए पुरस्कार मिलता? आप साहित्य अकादमी के पिछले 6 दशक का इतिहास उठाइए। आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी विपक्षी सांसद को अवॉर्ड मिला हो। अनंत विजय लिखते हैं कि आरएसएस से जुड़े लोगों या लेखकों को तो छोड़िए, भारतीयता की बात करने वालों तक के नामों पर भी इस पुरस्कार हेतु विचार नहीं किया जाता था। ऐसा हिन्दू कौन हुआ फिर? अपनी विचारधारा दूसरों पर कौन थोपता था, स्पष्ट दिख जाता है।

आपको 2015 बिहार विधानसभा चुनाव याद होगा। तब उदय प्रकाश, मंगलेश डबराल और अशोक वाजपेयी जैसे लेखकों ने अवॉर्ड-वापसी में हिस्सा लिया था। लेकिन, यही लेखक अकादमी अवॉर्ड्स मिलने की बात अपनी शान में गर्व से प्रस्तुत करते हैं। अनंत विजय लिखते हैं कि उनलोगों का एक ही लक्ष्य था- चुनाव से पहले भाजपा के ख़िलाफ़ माहौल बनाना। इस बार ऐसे सभी लेखक बेनकाब हो गए हैं। जैसे- सच्चिदानंद सिंह। उन्होंने तब विरोधस्वरूप सलाहकार समिति से इस्तीफा दे दिया था लेकिन इस वर्ष वो जूरी में शामिल रहे। सोचिए, इसी व्यक्ति ने तब ऐलान किया था कि वो साहित्य अकादमी से किसी प्रकार का सम्बन्ध नहीं रखेंगे।

जीएन देवी और सुकान्त चौधरी जैसे ऐसे और भी नाम हैं। एक और नाम है- नन्द भारद्वाज। इस आदमी ने पुरस्कार वापसी कर के रुपए भी लौटा दिए लेकिन बाद में जो चेक लौटाया था, उसे वापस भी ले लिया। ये सब गुपचुप तरीके से हुआ। अनंत विजय पूछते हैं कि जिन लेखकों को मोदी सरकार से डर लगता था, क्या उनका डर अब ख़त्म हो गया है? वो पूछते हैं कि क्या इन लेखकों के पास नैतिकता नहीं है या फिर उस नैतिकता को स्वार्थ और लोभ ने ढक लिया है?

‘अलवर गैंग रेप पर कॉन्ग्रेस ने पर्दा डालने की कोशिश की, चुप क्यों है इस मुद्दे पर अवॉर्ड वापसी गैंग’

अवॉर्ड-वापसी पार्ट- II: ‘बंद दुकानों’ को पुनर्जीवित करने का नया हथियार

अवॉर्ड वापसी गैंग है कि मानता नहीं: जनादेश पर उठाए सवाल, चुनाव आयोग को बताया पक्षपाती

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अमेज़न पर आउट ऑफ स्टॉक हुई राहुल रौशन की किताब- ‘संघी हू नेवर वेंट टू अ शाखा’

राहुल रौशन ने हिंदुत्व को एक विचारधारा के रूप में क्यों विश्लेषित किया है? यह विश्लेषण करते हुए 'संघी' बनने की अपनी पेचीदा यात्रा को उन्होंने साझा किया है- अपनी किताब 'संघी हू नेवर वेंट टू अ शाखा' में…"

मुंबई पुलिस अफसर के संपर्क में था ‘एंटीलिया’ के बाहर मिले विस्फोटक लदे कार का मालिक: फडणवीस का दावा

मनसुख हिरेन ने लापता कार के बारे में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। आज उसी हिरेन को मुंबई में एक नाले में मृत पाया गया। जिससे यह पूरा मामला और भी संदिग्ध नजर आ रहा है।

कल्याणकारी योजनाओं में आबादी के हिसाब से मुस्लिमों की हिस्सेदारी ज्यादा: CM योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश में आबादी के अनुपात में मुसलमानों की कल्याणकारी योजनाओं में अधिक हिस्सेदारी है। यह बात सीएम योगी आदित्यनाथ ने कही है।

‘शिवलिंग पर कंडोम’ से विवादों में आई सायानी घोष TMC कैंडिडेट, ममता बनर्जी ने आसनसोल से उतारा

बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए टीएमसी ने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। इसमें हिंदूफोबिक ट्वीट के कारण विवादों में रही सायानी घोष का भी नाम है।

‘हिंदू भगाओ, रोहिंग्या-बांग्लादेशी बसाओ पैटर्न का हिस्सा है मालवणी’: 5 साल पहले थे 108 हिंदू परिवार, आज बचे हैं 7

मुंबई बीजेपी के अध्यक्ष मंगल प्रभात लोढ़ा ने महाराष्ट्र विधानसभा में मालवणी में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार का मसला उठाया है।

तापसी की चिंता में डूबे बॉयफ्रेंड भी आए IT जाँच के दायरे में, असली वजह फेर सकती है ‘गैंग’ के सपनों पर पानी

तापसी पन्नू के बॉयफ्रेंड बो के अनुराग कश्यप सहित कई बॉलीवुड हस्तियों के खिलाफ चल रही आयकर विभाग की कार्रवाई से बहुत गहरा संबंध है। एक और मामले से बो का जुड़ाव पता चला है जो उसके परेशानी का वास्तविक कारण है।

प्रचलित ख़बरें

तिरंगे पर थूका, कहा- पेशाब पीओ; PM मोदी के लिए भी आपत्तिजनक बात: भारतीयों पर हमले के Video आए सामने

तिरंगे के अपमान और भारतीयों को प्रताड़ित करने की इस घटना का मास्टरमाइंड खालिस्तानी MP जगमीत सिंह का साढू जोधवीर धालीवाल है।

16 महीने तक मौलवी ‘रोशन’ ने चेलों के साथ किया गैंगरेप: बेटे की कुर्बानी और 3 करोड़ के सोने से महिला का टूटा भ्रम

मौलवी पर आरोप है कि 16 माह तक इसने और इसके चेले ने एक महिला के साथ दुष्कर्म किया। उससे 45 लाख रुपए लूटे और उसके 10 साल के बेटे को...

‘मैं 25 की हूँ पर कभी सेक्स नहीं किया’: योग शिक्षिका से रेप की आरोपित LGBT एक्टिविस्ट ने खुद को बताया था असमर्थ

LGBT एक्टिविस्ट दिव्या दुरेजा पर हाल ही में एक योग शिक्षिका ने बलात्कार का आरोप लगाया है। दिव्या ने एक टेड टॉक के पेनिट्रेटिव सेक्स में असमर्थ बताया था।

अंदर शाहिद-बाहर असलम, दिल्ली दंगों के आरोपित हिंदुओं को तिहाड़ में ही मारने की थी साजिश

हिंदू आरोपितों को मर्करी (पारा) देकर मारने की साजिश रची गई थी। दिल्ली पुलिस ने साजिश का पर्दाफाश करते हुए दो को गिरफ्तार किया है।

‘जाकर मर, मौत की वीडियो भेज दियो’ – 70 मिनट की रिकॉर्डिंग, आत्महत्या से ठीक पहले आरिफ ने आयशा को ऐसे किया था मजबूर

अहमदाबाद पुलिस ने आयशा और आरिफ के बीच हुई बातचीत की कॉल रिकॉर्ड्स को एक्सेस किया। नदी में कूदने से पहले आरिफ से...

‘शिवलिंग पर कंडोम’ से विवादों में आई सायानी घोष TMC कैंडिडेट, ममता बनर्जी ने आसनसोल से उतारा

बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए टीएमसी ने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। इसमें हिंदूफोबिक ट्वीट के कारण विवादों में रही सायानी घोष का भी नाम है।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,301FansLike
81,955FollowersFollow
393,000SubscribersSubscribe