Sunday, April 21, 2024
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1200 साल बाद 12 नवंबर को सबसे बड़े मुस्लिम देश में हिन्दुओं ने किया शिव का अभिषेक

इस अनुष्ठान के बाद म्रापेन नामक अग्नि प्रज्ज्वलित की गई और 11 पवित्र कुँओं का पानी लाकर पास के बोको मंदिर से प्रम्बानन देवालय तक छिड़काव हुआ। उसके बाद पूजा पाठ और...

अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ़ होने और दक्षिण में सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला भगवान अय्यप्पा के पक्ष में आने के बाद अब एक और प्राचीन मंदिर से हिन्दुओं के लिए शुभ समाचार आ रहा है। इंडोनेशिया के प्राचीन प्रम्बानन मंदिर में सैकड़ों हिन्दुओं ने 1163 वर्षों के बाद मंदिर में भगवान शिव का अभिषेक किया। यहाँ यह जान लेना ज़रूरी है कि इंडोनेशिया केवल मुस्लिम बहुल देश ही नहीं है, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी (22.5 करोड़) का घर है।

इस आयोजन को इंडोनेशिया के अलावा पड़ोसी चीन की शिन्हुआ न्यूज़ एजेंसी की खबरों में भी कवर किया गया है।

मूलतः शिवगृह कहा जाने वाला प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया के तीन प्रांतों स्लेमान, योग्यकर्ता, और मध्य जावा के क्लाटेन के बीच में स्थित है। यह पूजा विधि मंगलवार (12 नवंबर, 2019) को सम्पन्न हुई और हिन्दुओं ने इसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। “बकौल अभिषेक का आयोजन करने वाली समिति के सदस्य मदे अस्त्र तनया, उन्हें एक शिलालेख मिला था, जिसमें इस मंदिर के उद्घाटन की तारीख 12 नवंबर, 856 ईस्वी दर्ज थी। उसमें यह भी उल्लिखित था कि मंदिर की स्थापना के समय भी ऐसा ही अभिषेक और पूजा पाठ हुआ था। उसके बाद हिन्दुओं ने इस पूजा की तैयारी शुरू की। इस अनुष्ठान का आयोजन रकाई पिकतन द्यः सेलाडु द्वारा इस भव्य मंदिर की स्थापना का उत्सव मनाने के लिए हुआ है।

अंतारा न्यूज़ डॉट कॉम नामक वेबसाइट का कहना है कि यह अभिषेक मातरम नामक हिन्दू साम्राज्य के स्वर्ण काल का भी परिचायक है। उस समय के हिन्दू तावुर अगुंग नामक एक अनुष्ठान करते थे, जिसके बारे में वे मानते थे कि इससे मनुष्यों के साथ समस्त ब्रह्माण्ड को ही पवित्र किया जाता है। प्रम्बानन मंदिर का जीर्णोद्धार इंडोनेशिया की सरकार ने 1953 में कराया था।

शनिवार, 9 नवंबर (संयोगवश भारत में श्री रामजन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिन) को शुरू हुए इस अनुष्ठान का उल्लेख मातरम साम्राज्य के 25 शिलालेखों में मिलने की बात स्थानीय मीडिया में कही गई है। इसमें पहली पूजा मातुर पिउनिंग नामक थी, जिसमें आगे के कर्मकांडों के लिए पूर्वजों से अनुमति माँगी जाती है। यह भारत में मृत पितरों के स्मरण जैसा है। इसके बाद म्रापेन नामक अग्नि प्रज्ज्वलित की गई और 11 पवित्र कुँओं का पानी लाकर पास के बोको मंदिर से प्रम्बानन देवालय तक छिड़काव हुआ। उसके बाद पूजा पाठ और भारत की ही तरह मंदिरों की प्रदक्षिणा भी की गई।

पूजा के बाद शिलालेख के अनुसार मनुसुक सिमा नामक एक और प्रथा के अनुसार शिवगृह देवालय के पारम्परिक नृत्य का भी आयोजन हुआ जिसमें प्रम्बानन मंदिर के पुनर्निर्माण से जुड़ी गाथाओं का वर्णन होता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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