Wednesday, May 19, 2021

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होली के रंग में जीवन का उल्लास: होलिका, होलाका, धुलेंडी, धुरड्डी, धुरखेल, धूलिवंदन… हर नाम में छिपा है कुछ बहुत खास

आध्यात्मिक रूप से होलिका दहन का मकसद पुराने कपड़ों या वस्तुओं को जलाना ही नहीं है, बल्कि पिछले एक साल की यादों को जलाना है ताकि...

नीलकंठेश्वर मंदिर का रास्ता हुआ साफ, दूर से दिखने लगा इतिहास: इरफान, महबूब, अहमद ने कर लिया था राजमहल पर कब्जा

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में उदयपुर का एक हजार साल पुराना नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर है, जो अब दूर से नजर आने लगा है।

स्वामी विवेकानंद: भारतीय संस्कृति का दुनिया में डंका बजाने वाले राष्ट्रपुरुष का हर दिन होना चाहिए मनन

स्वामी विवेकानंद ने वैज्ञानिक सोच और तर्क से हिंदू धर्म को जोड़ दुनिया को जो संदेश दिया उसकी प्रतिध्वनि का नाद आज भी ब्रह्मांड में गूँज रहा है।

परमार वंश के राजमहल पर काजी इरफान, महबूब और अहमद की निजी संपत्ति का बोर्ड…

परमार वंश के महाराजा उदयादित्य के राजमहल के एक बंद दरवाजे पर टँगा वह साइनबोर्ड नए इतिहास की घोषणा कर रहा है- ‘निजी संपत्ति, उदयपुर पैलेस, वार्ड नंबर-14, खसरा नंबर-822, काजी सैयद इरफान अली, काजी सैयद महबूब अली, काजी सैयद अहमद अली।’

बाँका में मिले नदी-घाटी सभ्यता के अवशेष: ईंटें किश्चियन तारीख से पहले के, ग्रीक लेखकों ने भी किया था वर्णन

बिहार के बाँका जिले के भदरिया गाँव के समीप चांदन नदी के बीच कुछ अति-प्राचीन घरों की शृंखला मिली है। घरों की दीवारें 20 से 30 फीट तक चौड़ी...

प्रेम के प्रतीक हैं अर्धनारीश्वर शिव! श्रावण मास में जानिए वेदों के रुद्र से लोक के भोलेनाथ तक की त्र्यम्बक यात्रा

समाज के त्यक्त, तिरस्कृत और भयोत्पादक तत्त्वों को स्नेहपूर्वक अंगीकार करने वाले हैं शिव। जिस साँप बिच्छू को देखकर समाज डर जाता है, उसे...

रामचंद्र गुहा का अंधत्व: गुजरात में धन+संस्कृति का कॉम्बिनेशन, बंगाल के पास ‘ममता’ और यही इनकी संस्कृति

बंगाल के पास ‘ममता दीदी’ हैं, यही इनकी संस्कृति। गुजरात के पास नरेंद्र दामोदरदास मोदी हैं, यह भी गुजरात की संस्कृति है। इस पहचान पर गुजरात...

वैज्ञानिक पद्धति से कालविधान कारक: भारतीय मनीषा की सर्वोच्‍च उपलब्धियों में विशेष है ज्योतिष शास्त्र

'कल्प' वेद प्रतिपादित कर्मों का प्रायोगिक रूप प्रस्तुत करने वाला शास्त्र है। ज्‍योतिष उन कर्मों के अनुकूल समय आदि बताने वाला शास्त्र है।

1200 साल बाद 12 नवंबर को सबसे बड़े मुस्लिम देश में हिन्दुओं ने किया शिव का अभिषेक

यह अभिषेक मातरम नामक हिन्दू साम्राज्य के स्वर्ण काल का भी परिचायक है। उस समय के हिन्दू तावुर अगुंग नामक एक अनुष्ठान करते थे, जिसके बारे में वे मानते थे कि इससे मनुष्यों के साथ समस्त ब्रह्माण्ड को ही पवित्र किया जाता है।

धनतेरस पर ‘लोहा लेने’ की तैयारी कीजिए, सोना तो आता ही रहेगा

अपनी दरिद्रता की स्थिति में भी याचक को निराश न करना पड़े, इसलिए घर में मौजूद एकमात्र खाने योग्य वस्तु का दान करते ब्राह्मणी को देख उनके मुख से देवी लक्ष्मी की स्तुति में एक स्त्रोत फूट पड़ा। उन्होंने माँ लक्ष्मी से उस परिवार की निर्धनता दूर करने के लिए जो प्रार्थना की, उसे 'कनकधारा स्त्रोत' के नाम से जाना जाता है।

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