Wednesday, May 27, 2020
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दिव्य काशी की भव्यता बढ़ाने का एक अनूठा प्रयास विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर

1780 ई. के बाद काशी शहर इतने बड़े संरचनात्मक परिवर्तनों से गुज़र रहा है। उस दौर में इंदौर की मराठा रानी अहिल्याबाई होल्कर ने मंदिर और इसके आसपास के क्षेत्र का जीर्णोद्धार किया था। इसके बाद 1853 ई. में, सिख महाराजा रणजीत सिंह ने काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर को सोने से मढ़वाया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

सनातन धर्म और पौराणिक महत्त्व की नगरी काशी जल्द ही नए सौन्दर्य के कलेवर में नज़र आने वाली है। एक तरफ जहाँ पूरे शहर में निर्माण कार्य जारी है। वही उतनी ही तेजी से विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर पर भी काम हो रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट लगभग 50 फीट चौड़ी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से एक विश्वनाथ मंदिर को वाराणसी के प्रसिद्ध घाटों से जोड़ेगी।

मुख्य काशी विश्वनाथ मंदिर, जो पावन गंगा नदी के बाएँ किनारे पर स्थित है। पहले यह पूरा प्रांगण सकरी गलियों से घिरा हुआ था। ऐसा नहीं है कि काशी का ऐसा सँकरा स्वरुप प्राचीन काल से था। सर्वे और कुछ पुराने दस्तावेजों के आधार पर पता लगाने पर इसकी भव्यता और विशालता का पता चला। फिर वाराणसी के सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस परियोजना पर काम शुरू हुआ। जैसे-जैसे परिसर के बाहरी हिस्सों को ध्वस्त किया जाता रहा, काशी का पुराना स्वरुप स्पष्ट नज़र आता गया।

विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण मंदिरों, साधु-सन्यासियों, फक्कड़ों और मतवालों की नगरी काशी को उसकी भव्यता वापस लौटाने का यह एक सराहनीय प्रयास है और हर बार मोदी के आगमन पर काशी की जनता अपने सांसद के प्रति उत्साह, उनके कार्यों से संतुष्टि का प्रमाण है।

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ऊपर प्रधानमंत्री के ट्वीट में, इस परियोजना का विस्तृत विजुअल प्रदर्शित किया गया है। बिना काशी की पारम्परिकता से छेड़छाड़ किए हुए, मंदिर परिसर में सभी नागरिक और अत्याधुनिक सुविधाओं का खयाल रखते हुए तेजी से निर्माण कार्य जारी है।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना की खास बातें

  • लगभग 50 फीट के गलियारे में गंगा के किनारे स्थित मणिकर्णिका और ललिता घाट को काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर से सीधे जोड़ा जाएगा।
  • रिवरफ्रंट, गंगा नदी पर स्थित घाटों को अपग्रेड करेगा
  • कॉरिडोर में तीर्थयात्रियों के आराम करने के लिए प्रतीक्षालय होंगे
  • रास्ते में, तीर्थयात्रियों और यात्रियों को नवनिर्मित संग्रहालय और वाराणसी के प्राचीन इतिहास और संस्कृति से परिचय कराने के लिए चित्र वीथिका का निर्माण
  • हवन और यज्ञ जैसे धार्मिक कार्यों के लिए नई यज्ञशालाओं का निर्माण
  • काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में मंदिर के पुजारी, स्वयंसेवक और तीर्थयात्रियों के लिए आवास होंगे
  • अत्याधुनिक पूछताछ केंद्र पर्यटकों को शहर और इसके अन्य आकर्षण और सुविधाओं के स्थानों के बारे में जानकारी मुहैया कराएगा
  • काशी विश्वनाथ मंदिर से ठीक पहले, एक बड़े चौक का निर्माण, जहाँ इस गलियारे का समापन होगा
  • फूड स्ट्रीट जो पर्यटकों और तीर्थ यात्रियों को बनारसी और अवधी व्यंजनों का स्वाद चखाएँगी
  • प्रसाद के लिए एक नए विशाल भोगशाला का निर्माण
  • सभाओं, बैठकों और मंदिर के कार्यों के लिए, एक सभागार का निर्माण किया जाएगा जो इन आयोजनों की सुविधा प्रदान करेगा
  • एक भव्य मंच का भी निर्माण होगा जहाँ वृहद् स्तर पर काशी की सांस्कृतिक परम्परा से जुड़े भव्य आयोजन होंगे।  

1780 ई. के बाद काशी शहर इतने बड़े संरचनात्मक परिवर्तनों से गुज़र रहा है। उस दौर में इंदौर की मराठा रानी अहिल्याबाई होल्कर ने मंदिर और इसके आसपास के क्षेत्र का जीर्णोद्धार किया था। इसके बाद 1853 ई. में, सिख महाराजा रणजीत सिंह ने काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर को सोने से मढ़वाया था। और अब पीएम मोदी के नेतृत्व में, शहर का भव्यतम निर्माण कार्य काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के रूप में परिवर्तन की आधुनिक लहर से गुजर रहा है।

बता दें कि इस परियोजना की कुल लागत मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 600 करोड़ रुपए अनुमानित की गई है। 2014 के लोकसभा चुनाव में, भाजपा ने अपने घोषणापत्र में इस प्राचीन शहर के कायाकल्प का वादा किया था। तब से, पीएम मोदी ने शहर में 19 बार वहाँ चल रहे विकास और उत्थान के कार्यों का निरीक्षण कर चुके हैं।

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