Wednesday, September 29, 2021
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रंजनगाँव का गणपति मंदिर: गणेश जी ने अपने पिता को दिया था युद्ध में विजय का आशीर्वाद, अष्टविनायकों में से एक

भगवान शिव और त्रिपुरासुर में युद्ध हुआ। त्रिपुरासुर को भगवान श्री गणेश का आशीर्वाद प्राप्त था। तब महादेव ने श्री गणेश की अराधना की। अपने ही बेटे से विजयश्री का आशीर्वाद लेने के बाद ही राक्षस त्रिपुरासुर को...

महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है, जहाँ भगवान श्री गणेश की उपासना किसी त्यौहार से कम नहीं है। राज्य का संभवतः ही कोई ऐसा इलाका हो, जहाँ भगवान गणेश का कोई दिव्य मंदिर न हो। ऐसा ही एक मंदिर पुणे के निकट रंजनगाँव में स्थित है। हिन्दू धर्म ग्रंथों के मुताबिक इस स्थान पर भगवान गणपति ने अपनी पिता की उपासना से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिया था। इसके बाद भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर पर विजय प्राप्त की थी और यहाँ भगवान श्री गणेश के मंदिर को स्थापित किया था।

पौराणिक इतिहास

रंजनगाँव का वर्णन पुराणों और कई अन्य धर्म ग्रंथों में मिलता है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में गृत्समद नाम के एक महान ऋषि थे, जो बहुत बड़े गणेश भक्त थे। उनका त्रिपुरासुर नाम का एक पुत्र हुआ, जो अत्यंत महत्वाकांक्षी होने के साथ क्रूर भी था। ऋषि गृत्समद ने उसे भगवान गणेश की उपासना करने के लिए कहा। भगवान गणेश ने त्रिपुरासुर को स्वर्ण, चाँदी और लोहे के तीन नगर आशीर्वाद स्वरूप दिए। भगवान गणेश से आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद त्रिपुरासुर ने अत्याचार मचा दिया और स्वर्ग, नरक एवं पाताल को भी जीत लिया।

त्रिपुरासुर के अत्याचार से तंग आकर यहाँ निवास करने वाले लोग भगवान शिव के पास गए और उनसे रक्षा करने की प्रार्थना की। भगवान शिव ने त्रिपुरासुर से युद्ध किया लेकिन भगवान शिव को युद्ध में उस राक्षस को नियंत्रित करने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा। इसी दौरान उन्हें यह स्मरण हुआ कि त्रिपुरासुर को भगवान श्री गणेश का आशीर्वाद प्राप्त है, तब उन्होंने भी भगवान श्री गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनकी अराधना की।

भगवान शिव की उपासना से प्रसन्न होकर भगवान श्री गणेश ने उन्हें इसी स्थान पर दर्शन दिए और विजयश्री का आशीर्वाद दिया। भगवान गणेश के आशीर्वाद से महादेव ने एक ही बाण से त्रिपुरासुर के तीनों नगरों को नष्ट कर दिया और उस पर विजय प्राप्त की।

विशेष संरचना

पुणे से 51 किमी दूर स्थित यह मंदिर भगवान गणेश को समर्पित ‘अष्टविनायकों’ में चौथा मंदिर है। वर्तमान दृश्य मंदिर का निर्माण 9वीं-10वीं शताब्दी के दौरान हुआ था। मंदिर पूर्वाभिमुख है और इसके मुख्य द्वार पर दोनों ओर विशाल द्वारपाल बनाए गए हैं।

मंदिर की संरचना कुछ ऐसी है कि सूर्य के दक्षिणायन और उत्तरायण होने पर सूर्य की किरणें सीधे ही भगवान गणेश की स्वयंभू प्रतिमा पर पड़ती हैं। मंदिर के गर्भगृह में भगवान गणेश, ‘महागणपति’ के रूप में विराजमान है। उनकी इस अद्भुत प्रतिमा का ललाट काफी चौड़ा है और सूँड़ दक्षिण दिशा की ओर मुड़ी हुई है। उनके दोनों ओर ऋद्धि और सिद्धि विराजमान हैं।

मंदिर के वर्तमान गर्भगृह का निर्माण सन् 1790 में माधवराव पेशवा और मंदिर के मुख्य हॉल का निर्माण इंदौर के सरदार किबे ने कराया था। गणेश चतुर्थी यहाँ का विशेष त्यौहार है। इसके अलावा रविवार और बुधवार को भी यहाँ भक्तों की अच्छी-खासी भीड़ देखी जाती है।

कैसे पहुँचें?

मंदिर का निकटतम हवाईअड्डा पुणे में स्थित है, जो यहाँ से मात्र 46 किलोमीटर (किमी) की दूरी पर है। साथ ही मुंबई के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से मंदिर की दूरी लगभग 195 किमी है। रंजनगाँव का निकटतम रेलवे स्टेशन भी पुणे ही है, जो यहाँ से लगभग 50 किमी दूर है। इसके अलावा शिरुर स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग 20 किमी ही है।

इसके अलावा सड़क मार्ग से भी मंदिर तक पहुँचा जा सकता है। रंजनगाँव पुणे-अहमदनगर हाइवे पर ही स्थित है। पुणे और शिवाजी नगर से रंजनगाँव पहुँचने के लिए महाराष्ट्र राज्य परिवहन निगम के अलावा कई अन्य यातायात के साधन उपलब्ध रहते हैं।

 

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ओम द्विवेदी
Writer. Part time poet and photographer.

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