जल संकट: PM मोदी ने भी माना कि सच हो गई मिशनरी विरोधी जैन मुनि की भविष्यवाणी

पीएम ने जैन मुनि बुद्धिसागर सूरी की कविता का जिक्र किया। जैन मुनि बुद्धिसागर महाराज ने आज से एक सदी पहले ही भविष्यवाणी की थी कि एक ऐसा समय आएगा, जब पीने का पानी किराने की दुकान पर मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सरकार की उपलब्धियों पर बात करते हुए नया ‘जल शक्ति मंत्रालय’ गठित किए जाने का जिक्र किया। जल संरक्षण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए पीएम ने अपने संबोधन में जल संकट की गंभीरता पर बात की। उन्होंने कहा कि इंतजार की घड़ी ख़त्म हो गई है और देश-समाज को इस बारे में सोचना पड़ेगा। उन्होंने शिक्षकों को सलाह दी कि छात्रों को बचपन से ही जल संरक्षण की शिक्षा दी जाए और पानी के हर एक बूँद से अधिक पैदावार हो।

इस दौरान पीएम ने जैन मुनि बुद्धिसागर सूरी की कविता का जिक्र किया। जैन मुनि बुद्धिसागर महाराज ने आज से एक सदी पहले ही भविष्यवाणी की थी कि एक ऐसा समय आएगा, जब पीने का पानी किराने की दुकान पर मिलेगा। आज ऐसा ही हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर बात करते हुए कहा:

“आजादी के 70 साल हो गए। हर किसी ने अपने-अपने तरीके से प्रयास किया है लेकिन आज हिन्दुस्तान में आधे घर ऐसे हैं जिनको पीने के पानी के लिए मशक्क्त करनी पड़ती है। 2-5 किमी पैदल जाना पड़ता है। आधा जीवन इसी में खप जाता है। हर घर को जल कैसे मिले? हम आने वाले दिनों में जल जीवन मिशन को लेकर आगे बढ़ेंगे। इस मद में साढ़े तीन लाख करोड़ से भी ज्यादा खर्च करने का संकल्प किया है।”

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प्रधानमंत्री ने जिन जैन मुनि का जिक्र किया, वह छठी कक्षा तक ही पढ़े थे लेकिन आगे चल कर संस्कृत और योग के बड़े विद्वान कहलाए। आचार्य बुद्धिसागर सूरी ने गुजरात के मनसा में महुड़ी जैन मंदिर की स्थापना की, जो कई सम्प्रदायों का पवित्र स्थान बना। वह क्रिश्चियनिटी के प्रखर आलोचक थे और गुजरात में मिशनरी ईसाईयों द्वारा चलाए जा रहे धर्मान्तरण के सख्त विरोधी। 125 पुस्तकें लिखने वाले बुद्धिसागर ने मूर्तिपूजा का समर्थन किया और वह तर्क-शास्त्रार्थ में किस को भी बौना साबित करने की क्षमता रखते थे।

देखें 3:15 के बाद: PM मोदी ने किया जैन मुनि की भविष्यवाणी का जिक्र

अगर उनके द्वारा स्थापित महुड़ी मंदिर की बात करें तो वहाँ जैन के तृतीया तीर्थकर पद्मप्रभ की मूर्ति विराजमान है। वहाँ प्रसाद के रूप में सुकड़ी चढ़ाया जाता रहा है लेकिन परंपरा रही है कि प्रसाद को मंदिर के प्रांगण से बाहर नहीं ले जाया जा सकता। मंदिर में घंटाकर्ण महावीर की भी एक प्रतिमा है, जो महान क्षत्रिय राजा हुए हैं। वह आतताइयों से कन्याओं की रक्षा किया करते थे।

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