एशिया के सबसे बड़े फ़िल्म फेस्टिवल में ‘पर्रिकर’ को देख भावुक हुए लोग: देखें Video

इस वीडियो में बताया गया है कि कैसे मनोहर पर्रिकर ने अपनी पत्नी से वादा किया था कि वो सार्वजनिक जीवन से विदा लेकर कभी न कभी निजी जीवन में वापस लौटेंगे और परिवार को पूरा समय देंगे। अफसोस ऐसा हो नहीं पाया, लेकिन अपने दोनों बेटों के लिए उन्होंने माँ और पिता, दोनों की ही भूमिका निभाई।

अखंड एक निश्चय
प्रतिभा का संचय
कुछ यूँ हो एक योद्धा का परिचय
संस्कृति की धरोहर
सादगी का सरोवर
अनंत एक गूँज
अपना भाई मनोहर

गोवा की राजधानी में आयोजित एक मौके पर जैसे ही ये पंक्तियाँ गूँजी, वहाँ उपस्थित एक-एक व्यक्ति भावुक हो उठा। राज्यपाल सत्यपाल मलिक, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और श्रीपद नाइक सहित कई वरिष्ठ जन इस मौके पर मौजूद थे। आइए, जानते हैं कि आज गोवा में क्यों याद किए गए मनोहर पर्रिकर? दरअसल, ये मौक़ा एशिया के सबसे बड़े फ़िल्म फेस्टिवल के आयोजन का था।

गोवा की राजधानी पणजी में 50वें ‘इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI)’ के दौरान गोवा के लोग पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को याद कर भावुक हो उठे। पर्रिकर के प्रयासों के कारण ही आईएफएफआई का आयोजन पणजी में हो पाया और ये फेस्टिवल गोवा की पहचान बन गया। इस वर्ष महानायक अमिताभ बच्चन और सुपरस्टार रजनीकांत जैसे वरिष्ठ अभिनेता इसका हिस्सा बने और उन्हें सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर पीआईबी ने पर्रिकर पर बनी फ़िल्म का एक वीडियो शेयर किया, जिसे देख कर न सिर्फ़ गोवा बल्कि पूरे भारत के लोगों के जेहन में मनोहर पर्रिकर की यादें ताज़ा हो गईं।

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इस वीडियो में बताया गया है कि मनोहर पर्रिकर ने अपनी पत्नी से वादा किया था कि वो सार्वजनिक जीवन से विदा लेकर कभी न कभी निजी जीवन में वापस लौटेंगे और परिवार को पूरा समय देंगे। अफसोस ऐसा हो नहीं पाया, लेकिन अपने दोनों बेटों के लिए उन्होंने माँ और पिता, दोनों की ही भूमिका निभाई। उनकी पत्नी का निधन सन 2000 में ही हो गया था।

भारत के पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर पर बनी इस फ़िल्म को बॉलीवुड के फ़िल्म निर्माता करण जौहर ने पेश किया। इस फ़िल्म की शुरुआत में पर्रिकर की आवाज़ गूँजती है, जिसमें वह पद एवं गोपनीय की शपथ लेते दिखते हैं। इस फ़िल्म में बताया गया कि पर्रिकर ने कैसे इंजीनियरिंग का करियर छोड़ कर सार्वजनिक जीवन में क़दम रखा और सारी जिम्मेदारियाँ निभाई। इस फ़िल्म में बताया गया है:

“पर्रिकर जी के सार्वजनिक जीवन से औपचारिकताएँ शून्य हो गईं और उनके निजी जीवन की जिम्मेदारियाँ भी उनका हिस्सा बन गईं। अपने दोनों बेटों को माता और पिता का प्यार देते, वो गोवा के लिए भी एक पिता की छवि बन चुके थे। उनका जीवन सिर्फ़ अपने प्रदेश और वहाँ के लोगों से ही प्रभावित होता था। वो अक्सर मुलाकातियों से घिरे रहते थे और शायद ही उन्हें कोई ख़बर अख़बारों से पता चलती थीं। अपनी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने के लिए उन्होंने स्वयं को ही माध्यम चुना। इन योजनाओं में वैज्ञानिक सोच और सोशल इंजीनियरिंग का एक मिश्रण था। इनमें युवाओं के लिए स्टार्ट-अप योजनाएँ थीं तो बुजुर्गों के लिए पेंशन योजनाएँ। उनका व्यवहार विनम्र था और व्यक्तित्व सुलझा हुआ था।”

ऊपर संलग्न किए गए वीडियो में आप उस फ़िल्म को देख सकते हैं। इसमें मनोहर पर्रिकर के जीवन के कई महत्वपूर्ण पलों की झलकियाँ भी दिखाई गई हैं, जिन्हें देख कर आप भी पुराने दिनों में खो जाएँगे।

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