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‘देश जिस ओर बढ़ रहा, उससे मैं खुश नहीं’: शिवसेना की उर्मिला मातोंडकर ने कहा – मुझे ‘खट्टे अंगूर’ की तरह देखा गया

"मेरे लिए राजनीति में सामाजिक सरोकार शामिल है। जब मैं स्कूल में थी, तो मेरे जन्मदिन पर मेरे माता-पिता सामाजिक संस्थाओं को दान देते थे।"

बॉलीवुड से राजनीति में आईं उर्मिला मातोंडकर इन दिनों अपने इंटरव्यू को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उर्मिला ने देश वर्तमान में किस ओर जा रहा है और वह इससे क्यों खुश नहीं है – इस पर चर्चा की। कॉन्ग्रेस से शिवसेना में शामिल हुईं उर्मिला मातोंडकर (Urmila Matondkar) ने खुलासा किया कि उनके पास वर्ष 1999 से राजनीति में शामिल होने के ऑफर आ रहे थे।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ से बातचीत में उर्मिला मातोंडकर ने राजनीति में आने को लेकर कहा, “शादी की तरह राजनीति ने भी मुझे आजाद ख्यालों वाला बनाया है। मेरे पास 1999 से राजनीति में आने के प्रस्ताव आ रहे थे। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं राजनीति के क्षेत्र में उतरूँगी। आखिरकार, मैंने राजनीति का रास्ता सामाजिक कारणों से अपनाया। हमारा देश जहाँ है या जिस ओर बढ़ रहा है, वह वो देश नहीं है जिससे मैं खुश हूँ। आपको उन चीजों के लिए बोलने की जरूरत है, जिनके लिए आप खड़े हैं।”

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें जनता से जुड़ना अच्छा लग रहा है। इस पर अभिनेत्री ने कहा, “मेरे लिए राजनीति में सामाजिक सरोकार शामिल है। जब मैं स्कूल में थी, तो मेरे जन्मदिन पर मेरे माता-पिता सामाजिक संस्थाओं को दान देते थे। इन दिनों मुझे वृद्धाश्रमों में और अनाथों के साथ समय बिताना अच्छा लगता है। जब मैंने महाराष्ट्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया, तो लोगों ने कहा कि मैं वहाँ इसलिए गई थी, क्योंकि मुझे उस विधानसभा सीट का टिकट चाहिए था। मुझे वहाँ गए बिना भी वह मिल गया होता। मैं भले ही वर्ष 2019 में हार गई थी, लेकिन मैंने लोगों को और उनकी समस्याओं को करीब से जानने का प्रयास किया। वह पल मुझे सुकून देने वाले थे।”

इसके अलावा, उर्मिला मातोंडकर ने नेपोटिज्म को लेकर भी बड़ा बयान दिया है, जिसकी काफी चर्चा हो रही है। उर्मिला ने आगे कहा, “मुझे नेपोटिज्म का सामना करना पड़ा, हालाँकि मैंने उस समय इसके बारे में बात नहीं की थी। मुझे ‘खट्टे अंगूर’ के तौर पर देखा जाता था, या फिर ‘नाच न जाने आंगन टेढ़ा’। चाहे राजनीति हो, फिल्म हो या कोई अन्य इंडस्ट्री, नेपोटिज्म उतना ही है जितना कि सूरज, चाँद और सितारे। यह फिल्म इंडस्ट्री में साफ तौर पर है, क्योंकि यह लोगों की नजरों में है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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