Homeविविध विषयमनोरंजनराहुल गाँधी पर फ़िल्म बनाता तो अधिकतर शूटिंग थाईलैंड में करनी पड़ती: विवेक ओबेरॉय

राहुल गाँधी पर फ़िल्म बनाता तो अधिकतर शूटिंग थाईलैंड में करनी पड़ती: विवेक ओबेरॉय

विवेक ने पूरे साक्षात्कार में इस बात को स्वीकार किया कि वो पीएम नरेंद्र मोदी पर विश्वास करते हैं और आज के समय में देश को उनके जैसे नेता की ही आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री मोदी की बायोपिक पर बनी फ़िल्म को लेकर विवेक ओबेरॉय काफी जद्दोज़हद करते नज़र आ रहे हैं। बता दें कि यह फ़िल्म आगामी 5 अप्रैल को रिलीज़ होने वाली है। फ़िल्म को लेकर विवेक काफी चिंता में हैं जिसकी वजह है इस पर लगे तमाम तरह के आरोप। इसमें ‘बैकडोर फंडिंग’ और ‘राजनीतिक प्रचार’ के आरोप शामिल हैं। इसलिए अपनी फ़िल्म का बचाव करते हुए वो समाचार स्टूडियो के चक्कर लगा रहे हैं।

हाल ही में, उन्होंने उन सवालों के जवाब देने के लिए NDTV स्टूडियो का दौरा किया। विष्णु सोम को एक साक्षात्कार में, उन्होंने कहा कि इस फ़िल्म को बनाने का निर्णय लेने में उन्हें केवल 30 सेकंड लगे।

साक्षात्कार के दौरान ही सोम ने उनसे पूछा कि क्या वो कभी राहुल गाँधी की भूमिका निभाएँगे? इस पर विवेक ने तुरंत जवाब दिया, “अगर उन्होंने (राहुल गाँधी) भूमिका निभाने लायक कुछ किया होता, तो मैं निभाता।” राहुल गाँधी के लगातार विदेशी दौरों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए मुझे फ़िल्म की अधिकतर शूटिंग थाईलैंड में करनी पड़ती। विवेक के इस जवाब के बाद दर्शकों के बीच हँसी के ठहाके गूँज उठे।

विवेक ने पूरे साक्षात्कार में इस बात को स्वीकार किया कि वो पीएम नरेंद्र मोदी पर विश्वास करते हैं और आज के समय में देश को उनके जैसे नेता की ही आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी के चाय वाले बनने से लेकर एक विश्व नेता बनने तक की कहानी हर दूसरे वैश्विक नेता के लिए प्रेरणादायक है।

विवेक ओबेरॉय ने बार-बार ज़ोर देकर कहा है कि उन्होंने भले ही अतीत में भाजपा के लिए प्रचार किया है, लेकिन वे पार्टी के सदस्य अभी तक नहीं हैं। उन्होंने साक्षात्कर्ता सोम से कहा कि वह (विवेक) प्रधानमंत्री के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। NDTV के पत्रकार ने यह भी पूछा कि क्या नरेंद्र मोदी ने फ़िल्म की स्क्रिप्ट की समीक्षा की थी या कम से कम इसे पढ़ा था। इस पर विवेक ने कहा, “एक आदमी जो राष्ट्र चलाता है, उसके पास इन चीजों के लिए समय कैसे हो सकता है?” सोम ने चुटकी लेते हुए कहा, “वह प्रतिदिन 18 घंटे काम करते हैं, वह एक पटकथा तो पढ़ सकते थे।” इस पर विवेक ने कहा कि हाँ, वो बहुत काम करते हैं यही उनकी कुशल कार्यशैली की पहचान है और इसीलिए उनके पास स्क्रिप्ट के लिए समय नहीं होता।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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