Saturday, July 24, 2021
Homeविविध विषयमनोरंजनSeema-The Untold Story: 1962 में चीनी आक्रमण और सरकारी उदासीनता को दर्शाती फिल्म

Seema-The Untold Story: 1962 में चीनी आक्रमण और सरकारी उदासीनता को दर्शाती फिल्म

तेजपुर में उस समय हाहाकार मच गया था जब 1962 में असम के एक छोटे से शहर तेजपुर में युद्ध की आशंका पैदा हुई। चीनी सैनिकों ने तेजी से भारत में अपना रास्ता बनाकर लगभग 150 किमी दूर बोमडिला पहुँच गए थे।

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता हिरेन बोरा द्वारा बनाई गई असमिया भाषा की फिल्म सीमा- द अनटोल्ड स्टोरी ने सिनेमाघरों में धूम मचा दी है। ये फिल्म 29 मार्च को रिलीज हुई। इस फिल्म में 1962 में चीन द्वारा किए गए आक्रमण के दौरान असम के तेजपुर के लोगों की स्थिति को दर्शाया गया है। इसमें दिखाया गया है कि उस समय किस तरह डर गए थे और उन्होंने अपना बचाव किस तरह से किया था।

बता दें कि, फिल्म निर्माता हिरेन बोरा का होमटाउन तेजपुर है और जिस समय ये आक्रमण हुआ था, उस समय बोरा 12 साल के थे। उस घटना को इन्होंने अपनी आँखों से देखा है। चीनी आक्रमण के लगभग 6 दशक बाद, बोरा ने इस फिल्म के जरिए उस समय के भयावह स्थिति को दिखाने का प्रयास किया है। हिरेन का कहना है कि इस फिल्म के जरिए उन्होंने उस तेजपुर को श्रद्धांजलि दी है, जहाँ पर उनका बचपन बीता है। इस फिल्म में निपॉन गोस्वामी, अरुण नाथ और जहाँआरा बेगम जैसे कलाकारों ने मुख्य किरदार निभाए हैं। वहीं, जाने-माने अभिनेता जॉर्ज बेकर ने ब्रिटिश पत्रकार विलियम स्मिथ की प्रमुख भूमिका निभाई है।

हिरेन 1962 की घटना को याद करते हुए कहते हैं कि हालाँकि तेजपुर से उनकी काफी यादें जुड़ी हैं, लेकिन एक ऐसी याद है जो वहाँ से दूर जाने के बाद आज भी उनके जेहन में जिंदा है। बोरा बताते हैं कि तेजपुर में उस समय हाहाकार मच गया, जब 1962 में असम के एक छोटे से शहर तेजपुर में युद्ध की आशंका पैदा हुई। चीनी सैनिक तेजी से भारत में अपना रास्ता बनाकर लगभग 150 किमी दूर बोमडिला पहुँच गए थे। हालाँकि चीन ने युद्धविराम की घोषणा कर दी, मगर लोगों के मन में भय पहले से ही पैदा हो गया था। जब स्थिति को काबू करने में प्रशासन भी असफल हो गई, तो लोगों ने युद्ध के डर से भागना शुरू कर दिया।

हिरेन बोरा बताते हैं कि उनके दादा जी ने अपने बेटों को परिवार के साथ वहाँ से निकलकर पास के नागाँव जाने के लिए कहा। मगर उन्होंने खुद वहाँ पर रहकर अपने शहर की रक्षा करने का फैसला किया। हिरेन कहते हैं कि उनके दादाजी इस दौरान अकेले नहीं थे। कुछ और भी लोग थे वहाँ पर, जिनमें से कुछ लोगों के पास तो बचने का विकल्प नहीं था, तो कुछ लोग तेजपुर से लगाव की वजह से वहाँ रुक गए थे। हिरेन को इस बात का अफसोस है कि 1962 का चीनी आक्रमण पूर्वोत्तर भारत के इतिहास में एक बहुत बड़ी घटना होने के बावजूद इसे ना तो लोकप्रिय संस्कृति में, ना ही किताबों में चित्रित किया गया और ना ही फिल्मों में दिखाया गया।  

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘हमने मोदी को जिताया की रट लगाते हो, खुद 2 बार लड़े तो क्यों नहीं जीत गए?’ महिला पत्रकार ने उतार दी राकेश टिकैत...

'इंडिया 1 न्यूज़' की गरिमा सिंह ने राकेश टिकैत के इस बयान को लेकर भी सवाल पूछा जिसमें वो बार-बार कहते हैं कि इस सरकार को 'हमने जिताया'।

UP में सपा-AIMIM का मुस्लिम डिप्टी CM, मायावती का ब्राह्मण प्रेम और राहुल गाँधी को पसंद नहीं ‘अमेठी’ के आम: 2022 की तैयारी

राहुल गाँधी ने कहा कि उन्हें यूपी के आम का स्वाद पसंद नहीं। उन्होंने कहा कि उन्हें आंध्र प्रदेश के आम पसंद हैं। ओवैसी ने सपा को दिया गठबंधन का ऑफर।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
110,931FollowersFollow
393,000SubscribersSubscribe