Friday, July 23, 2021
Homeविविध विषयमनोरंजनबॉलीवुड किसी की बपौती नहीं, कंगना रनौत की सफलता से जलते हैं सब: नेपोटिज्म...

बॉलीवुड किसी की बपौती नहीं, कंगना रनौत की सफलता से जलते हैं सब: नेपोटिज्म पर जारी बहस के बीच शत्रुघ्न सिन्हा

"मैंने देखा है जितने भी लोग कंगना का विरोध करते हैं, कहीं न कहीं उन्हें इस बात से द्वेष है कि आखिर उनके एहसान और मर्ज़ी के बिना कंगना ने इतना कुछ हासिल कैसे किया है। बॉलीवुड के किसी भी गुट का हिस्सा न बनने के बावजूद कंगना ने इतना बड़ा पायदान कैसे हासिल किया।"

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म पर जारी बहस के बीच शत्रुघ्न सिन्हा ने कंगना रनौत का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि कंगना से बॉलीवुड में बहुत से लोग जलते हैं। उन्हें लगता है कि बिना किसी का एहसान लिए कंगना इतनी सफल कैसे हुई।

पूर्व सांसद व अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने कंगना को ‘महिलाओं का धर्मेन्द्र’ भी बताया है। उन्होंने कहा कि वे हमेशा कंगना का साथ देते रहे हैं और आने वाले समय में भी ऐसा ही करेंगे। उन्हें ऐसा महसूस होता है कि जितने भी लोग कंगना के खिलाफ़ बोलते हैं वह उससे इर्ष्या की भावना रखते हैं। 

उन्होंने कहा, “मैंने देखा है जितने भी लोग कंगना का विरोध करते हैं, कहीं न कहीं उन्हें इस बात से द्वेष है कि आखिर उनके एहसान और मर्ज़ी के बिना कंगना ने इतना कुछ हासिल कैसे किया है। बॉलीवुड के किसी भी गुट का हिस्सा न बनने के बावजूद कंगना ने इतना बड़ा पायदान कैसे हासिल किया। कुल मिला कंगना का विरोध करने वाले उसकी बहादुरी और सफलता से परेशान हो चुके हैं और जलते हैं।”

इसके अलावा शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा फ़िल्मी दुनिया में ऐसे तमाम कलाकार हैं जो छोटे शहरों से आते हैं। उनका सपना होता है कि मुंबई में अपना नाम बनाएँ, कुछ बड़ा हासिल करें। इस सूची में हर बड़ा नाम आता है, अमिताभ बच्चन और धर्मेन्द्र जैसे कलाकार भी छोटे शहरों से आते हैं। इनमें से कोई भी बहुत बड़े शहर से नहीं आया है। 

फिर कंगना का ज़िक्र करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, वह खुद उत्तर भारत के एक सामान्य शहर से आती हैं। उनके मुताबिक़ कंगना ने अपने जीवन में बहुत परेशानियों का सामना किया है। इतना कुछ झेलने और देखने के बाद वह इस पायदान पर पहुँची हैं। फिलहाल वह जो कुछ भी कर रही हैं, बहुत अच्छा कर रही हों चाहे वह फ़िल्मी दुनिया हो या असल दुनिया। यही वजह है कि कंगना बॉलीवुड में ‘महिलाओं की धर्मेन्द्र’ हैं।  

शत्रुघ्न सिन्हा ने करण जौहर के शो कॉफी विद करण पर तंज कसते हुए कहा कि ऐसे शो विवाद का कारण बनते हैं। साथ ही कहा कि इंडस्ट्री किसी की बपौती नहीं है।

हाल ही में कंगना ने रिपब्लिक टीवी में साक्षात्कार के दौरान बॉलीवुड के हालात पर खुल कर बात की थी। उन्होंने जावेद अख्तर, महेश भट्ट, आदित्य चोपड़ा, करन जौहर समेत कई मशहूर बॉलीवुड हस्तियों पर गंभीर आरोप लगाए थे।

महेश भट्ट पर सवाल करते हुए कंगना ने कहा, “वह (महेश भट्ट) क्यों सुशांत की काउंसलिंग कर रहे थे? किसने उन्हें ऐसे बात करने का अधिकार दिया, तुम्हारा अंत नज़दीक है। अगर उन्हें पता था कि सुशांत सिंह अच्छा महसूस नहीं कर रहा है तो उन्होंने इस बारे में सुशांत के पिता को क्यों नहीं बताया? वह रिया और सुशांत के बीच क्या कर रहे थे? सभी जानना चाहते हैं। मुंबई पुलिस महेश भट्ट से सवाल क्यों नहीं कर रही है?”

कंगना ने बताया कि उन्हें सलमान खान की फिल्म ‘सुल्तान’ ठुकराने पर आदित्य चोपड़ा ने धमकी दी थी। कंगना ने कहा, “मैंने जैसे ही सलमान खान की सुल्तान के लिए ना कहा, आदित्य ने कहा इसके बाद वह कभी मेरे साथ काम नहीं करेंगे।”

इसके अलावा साक्षात्कार के दौरान कंगना ने एक और अहम बात कही थी। उन्होंने बताया था कि मुंबई पुलिस ने उन्हें समन भेजा। उन्होंने कहा, “मैंने उन्हें बताया कि मैं मनाली में हूँ। वह किसी को भेज कर मेरा बयान दर्ज करा सकते हैं लेकिन इसके बाद मुझसे किसी ने संपर्क नहीं किया। मैं खुद स्पष्ट करना चाहती हूँ अगर मैंने कुछ सार्वजनिक रूप से कहा है और मैं इसे साबित नहीं कर सकी तो अपना पद्मश्री लौटा दूँगी।”

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘कौन है स्वरा भास्कर’: 15 अगस्त से पहले द वायर के दफ्तर में पुलिस, सिद्धार्थ वरदराजन ने आरफा और पेगासस से जोड़ दिया

इससे पहले द वायर की फर्जी खबरों को लेकर कश्मीर पुलिस ने उनको 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया था। उन पर मीडिया ट्रॉयल में शामिल होने का भी आरोप है।

जिस भास्कर में स्टाफ मर्जी से ‘सूसू-पॉटी’ नहीं कर सकते, वहाँ ‘पाठकों की मर्जी’ कॉर्पोरेट शब्दों की चाशनी है बस

"भास्कर में चलेगी पाठकों की मर्जी" - इस वाक्य में ईमानदारी नहीं है। पाठक निरीह है, शब्दों का अफीम देकर उसे मानसिक तौर पर निर्जीव मत बनाइए।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
110,862FollowersFollow
393,000SubscribersSubscribe