Thursday, May 30, 2024
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लेखकों को पैसे नहीं देता है बॉलीवुड, साउथ और हॉलीवुड से उठा रहा कहानियाँ: अपनी संस्कृति का अपमान, फ्लॉप पर फ्लॉप देने के पीछे ये हैं कारण

बॉलीवुड में बड़े लेखकों की अनदेखी को इसके पतन का मुख्य कारण माना जा रहा है। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लेखकों को कमतर आँकना, उन्हें कम पैसा देना भी बॉलीवुड को दिन में तारे दिखा रहा है।

बॉलीवुड फिल्मों का पिछले कुछ समय से बॉक्स ऑफिस पर बहुत बुरा हश्र हो रहा है। डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ और कार्तिक आर्यन की ‘भूल भुलैया 2’ को छोड़ दिया जाए, तो अधिकतर फिल्मों ने दर्शकों को निराश किया है। बॉलीवुड (Bollywood) का कोई भी पटकथा लेखक अपनी कहानी से दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में कामयाब नहीं हो पा रहा है। वहीं दर्शक भी अब घिसी-पिटी कहानियों को बिल्कुल भी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

यही कारण है कि दर्शकों ने 2022 में अब तक रिलीज हुई कई फिल्मों, जैसे जर्सी, जयेशभाई जोरदार, धाकड़ और सम्राट पृथ्वीराज चौहान को सिरे से नकार दिया। वहीं दक्षिण भारतीय फिल्मों को सिनेमाप्रेमियों ने भरपूर प्यार दिया। रीमे​क को सिरे से नकारने के बावजूद आने वाले कुछ सालों तक दर्शकों को बॉलीवुड में केवल हॉलीवुड और साउथ की फिल्मों का रीमेक ही देखने को मिलेगा। ऐसा लगता है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के दिन लदने वाले हैं। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि सितारे गर्दिश में होने के बावजूद वह कोई भी सबक नहीं ले रहा है।

आमिर खान (Aamir Khan) की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ भी हॉलीवुड (Hollywood) फिल्म ‘फॉरेस्ट गंप’ की ऑफिशियल रीमेक है, जो 11 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इसके अलावा हॉलीवुड की एक और रीमेक ‘रैंबो’ में टाइगर श्रॉफ नजर आएँगे। इसी तरह हॉलीवुड फिल्म ‘द नाइट मैनेजर’ के हिंदी रीमेक में आदित्य राय कपूर डबल रोल में दिखाई देंगे। ‘द इंटर्न’ के रीमेक में अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण नजर आएँगे। जूलियस आईज के रीमेक में तापसी पन्नू नजर आएँगी।

इसी तरह दक्षिण भारतीय फिल्म ‘कैथी’ के रीमेक में अजय देवगन हैं। बॉलीवुड में तेलुगु फिल्म अनुकूकुंडा के रीमेक संडे नाम से बनाई जाएगी। विक्रम वेदा की रीमेक में ऋतिक रोशन और सैफ अली खान होंगे। मास्टर की रीमेक में सलमान खान और पुष्पा फेम अल्लावैकुंठ पुरमुलु में कार्तिक आर्यन नजर दिखाई देंगे। कुल मिलाकर बॉलीवुड अब केवल हॉलीवुड और साउथ सिनेमा के कंटेट पर निर्भर है। यानी, बॉलीवुड का अपना कोई कंटेट नहीं होगा।

यही कारण है कि साउथ की हर फिल्म हिंदी बेल्ट में हर दिन नए रिकॉर्ड तोड़ रही हैं। बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुई कमल हासन की ‘विक्रम’ और अदिवि शेष की ‘मेजर’ इसका ताजा उदाहरण हैं, जिसके सामने अक्षय कुमार की ‘सम्राट पृथ्वीराज’ सुपरफ्लॉप हो गई। बॉलीवुड की टॉलीवुड और हॉलीवुड के कंटेट पर बढ़ती निर्भरता का बड़ा कारण इनकी कमजोर पटकथा है, बड़े स्टार को मुख्य भूमिका देना, पूरी फिल्म केवल उसे ही ध्यान में रखकर लिखना, बड़े और भव्य सेट को दर्शकों के आगे परोसना, अपनी कहानियों में इति​हास के साथ छेड़छाड़ करना और टैलेंटेड कलाकारों की बजाय स्टार किड्स को फिल्म का चेहरा बनाना।

साथ ही ओटीटी प्लेटफॉर्म पर हटकर और जमीनी हकीकत को बयाँ करने वाली कहानियों को मात न दे पाना। बॉलीवुड में बड़े लेखकों की अनदेखी को इसके पतन का मुख्य कारण माना जा रहा है। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लेखकों को कमतर आँकना, उन्हें कम पैसा देना भी बॉलीवुड को दिन में तारे दिखा रहा है। इसकी वजह से साउथ सिनेमा बॉलीवुड पर भारी पड़ रहा है। वे लोगों के दिल के करीब और उनकी समस्याओं को सबके समक्ष लाने का प्रयास करते हैं, जो दर्शकों को दिल से जोड़ती है।

उदाहरण के लिए राजामौली के पिता विजयेंद्र प्रसाद का नाम आज भी दक्षिण भारत में काफी मशहूर है। उन्होंने अपने बेटे की सारी फिल्में लिखी हैं, इसके अलावा उनके खाते में बॉलीवुड की बजरंगी भाईजान और मणिकर्णिका भी है। वहीं हॉलीवुड के लेखकों का भी दुनिया में अपना दबदबा होता है। दर्शकों के दिल दिमाग पर खासा असर छोड़ने के लिए वे फिल्म की कहानी को लिखने में सालों बिता देते हैं। लेकिन, बॉलीवुड में ऐसा नहीं है। हाल ही में रिलीज हुई ‘सम्राट पृथ्वीराज चौहान’ फिल्म की कहानी मुहम्मद गोरी और पृथ्वीराज चौहान के ऐतिहासिक तथ्यों के साथ मेल नहीं खाती है।

यह कुछ बड़ी वजहें हैं, जिनकी वजह से साउथ के आगे बॉलीवुड की फिल्में कोई खास कमाल नहीं दिखा पा रही हैं। कुछ सालों में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के पास साउथ के रीमेक भी नहीं होंगे, क्योंकि अब दक्षिण भारतीय फिल्मों को क्षेत्रीय भाषाओं में डब करके रिलीज करने का चलन बढ़ गया है, जिससे उनकी कमाई भी बॉलीवुड फिल्मों की तुलना में कहीं अधिक हो रही है। य​ही कारण है कि बॉलीवुड के बड़े फिल्ममेकर्स ने साउथ प्रोडक्शन कंपनियों में पैसा लगाना शुरू कर दिया है। ऐसे में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का भविष्य क्या होगा, यह आने वाले कुछ सालों में सबके सामने होगा।

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