Saturday, July 24, 2021
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फोटो फ़ीचर: मौनी अमावस्या पर संगम का नज़ारा अद्भुत, अविश्वसनीय, अकल्पनीय

कुम्भ अर्थात आस्था का महासंगम, आप भारतीय हैं और अगर कुम्भ नहीं गए तो दिव्यता के अनुभव से चूक गए। सभ्यता के अगर जीवंत दस्तावेज से परिचित होना हो तो हो आइए कुम्भ

कुम्भ मेला में आज दूसरे शाही स्नान के अवसर पर संगम का नज़ारा अविस्मरणीय रहा। आज माघी अमावस्या (मौनी अमावस्या) पर मध्यरात्रि से ही करोड़ों श्रद्धालु, साधु-संतों ने संगम पर पावन पुनीत गंगा में आस्था की डुबकी लगा अमृत पान किया।

मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में संगम तट पर जुटे श्रद्धालु

शाही स्नान को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स ने कई तस्वीरें शेयर की हैं। इनमें कुम्भ के अद्भुत दृश्य को देखकर सिर्फ़ तीन शब्द मुख से निकलते हैं अद्भुत, अविस्मरणीय, अवर्णनीय।

प्रातः कालीन आस्था के संगम की एक झलक

कुम्भ अर्थात आस्था का महासंगम, आप भारतीय हैं और अगर कुम्भ नहीं गए तो दिव्यता के अनुभव से चूक गए। सभ्यता के अगर जीवंत दस्तावेज से परिचित होना हो तो हो आइए कुम्भ।

मौनी अमावस्या पर दिव्यता के स्नान का एक और नज़ारा

आज प्रयागराज में अमरत्व स्नान के लिए संगम घाट पर सुबह से ही महानिर्वाणी और अटल अखाड़ा ने स्नान किया। इसके बाद श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा, तपोनिधि श्री पंचायती आनंद, पंचदशनाम जूना अखाड़ा, अग्नि, आह्वान अखाड़े के संतों ने डुबकी लगाई।

शाही स्नान का एरियल व्यू

आज मौनी अमावस्या के महास्नान में क़रीब चार करोड़ श्रद्धालुओं, संत, महात्माओं ने स्नान कर दिव्यता का अनुभव किया।

कोहरे में लिपटी तस्वीर

मौनी अमावस्या पर बड़ी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद होने के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। अपर पुलिस महानिदेशक एस.एन. साबत ने कहा, सोमवती अमावस्या होने की वजह से  ‘मकर संक्रांति’ के स्नान की तुलना में हमने ‘मौनी अमावस्या’ पर सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ा दी थी।

क्या कहा जाए, मंत्रमुग्ध हुआ जा सकता है

मेला प्रशासन ने घाटों पर सुगम स्नान के व्यापक प्रबंध किए थे। जाल के साथ बैरीकेडिंग की गई थी। पैरा मिलिट्री की 17 कम्पनियाँ, आरएएफ, बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी, आईटीबीपी और अन्य अर्धसैनिक बलों की 37 कंपनियों की तैनाती की गई थी।

एनडीआरएफ की 10 कम्पनियाँ मुस्तैद थी। होमगार्ड के 14 हजार जवानों को भी ड्यूटी पर लगाया गया था। 111 घुड़सवार पुलिस घाटों से लेकर संगम तक निगरानी कर रहे थे।

ऐसे नज़ारे इतिहास ने पहले शायद ही कहीं देखा हो। सोशल मीडिया पर आज पूरे दिन इन तस्वीरों ने लोगों को अभिभूत किया।

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रवि अग्रहरि
अपने बारे में का बताएँ गुरु, बस बनारसी हूँ, इसी में महादेव की कृपा है! बाकी राजनीति, कला, इतिहास, संस्कृति, फ़िल्म, मनोविज्ञान से लेकर ज्ञान-विज्ञान की किसी भी नामचीन परम्परा का विशेषज्ञ नहीं हूँ!

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