Homeविविध विषयअन्य₹128 करोड़ का बिजली बिल, जबकि घर में है केवल पंखा और बल्ब

₹128 करोड़ का बिजली बिल, जबकि घर में है केवल पंखा और बल्ब

हापुड़ के शमीम ने ले रखा है दो किलोवाट का घरेलू कनेक्शन, बिल जमा नहीं करने पर बिजली विभाग ने काटा कनेक्शन।

उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग की लापरवाही का खामियाजा एक गरीब बुजुर्ग को भरना पड़ रहा है। हापुड़ के चमरी गाँव निवासी शमीम को बिजली विभाग ने 1,28,45,95,444 रुपए का बिजली बिल भेजा है। शमीम ने 2 किलो वाट का घरेलू कनेक्शन ले रखा है।

ब‍िल आने के बाद से शमीम बिजली विभाग के अधिकारियों के कार्यालय के चक्कर काट रहा है, लेकिन कोई भी उनकी फरियाद सुनने को तैयार नहीं। ब‍िल न भरने पर शमीम के घर का कनेक्शन भी काट दिया गया है। शमीम ने बताया कि कोई भी अधिकारी उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दे रहा। वो कहाँ से इतना पैसा जमा करा पाएँगे। उन्होंने बताया कि शिकायत करने पर अधिकारियों ने कहा कि जब तक वे बिल जमा नहीं करेंगे, उन्हें कनेक्शन नहीं दिया जाएगा।

शमीम का कहना है कि वे घर में सिर्फ पंखा और लाइट का उपयोग करते हैं? उन्होंने कहा कि उनके घर का बिल मुश्किल से 700 से 800 तक आता है।

वहीं, इस मामले को बिजली विभाग के अधिकारी कोई बड़ी बात नहीं मान रहे हैं। असिस्टेंट इलेक्ट्रिकल इंजीनियर राम शरन ने कहा, “यह तकनीकी खामी है। यदि वे हमें बिल लाकर देते हैं तो हम सिस्टम की तकनीकी खराबी को सुधारने के बाद उन्हें सही बिल जारी कर देंगे। यह कोई बड़ी बात नहीं है, तकनीकी समस्याएँ होती रहती हैं।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -