Sunday, January 17, 2021
Home विविध विषय अन्य 'मैं और एला नग्न तैरते, एनर्जी-सेंसेशन बढ़ाने को लेते थे MDMA' - आतिश तसीर...

‘मैं और एला नग्न तैरते, एनर्जी-सेंसेशन बढ़ाने को लेते थे MDMA’ – आतिश तसीर ने अपने प्यार को ऐसे किया बदनाम

आतिश ने एला से संबंधों के दौरान अपने पाकिस्तान मूल के पिता होने की पहचान भी छिपाई थी, खुद को भारतीय बताया था। ब्रिटेन में शाही पैलेस के गार्ड भी उससे यही सवाल करते थे कि क्या तुम ही वो भारतीय हो, जो राजकुमारी के साथ...

प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से ये बात जगजाहिर है कि किसी भी प्रेम संबंध में एक दूसरे के साथ बिताए समय का सम्मान करना सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है। लेकिन प्यार के हसीन क्षणों में आई नजदीकियों को किसी एक के द्वारा अपनी बपौती समझ लेना या उसे परिस्थितियों के अनुरूप अपने फायदे के लिए जगजाहिर करना, न केवल उस रिश्ते में आई करीबियों को अश्लीलता से पेश करना है बल्कि आपके साथी को भी कई सवालों के कठघरे में खड़ा कर देता है। हालाँकि, मुमकिन है कि ऐसी हरकत कोई जाहिल, दिमाग से पैदल व्यक्ति चार लोगों के बीच में शेखी बघारते हुए करता दिख जाए, पर क्या इसकी उम्मीद समाज के पढ़े-लिखे और बुद्धिजीवी तबके से की जा सकती है? शायद नहीं। लेकिन हिंदुओं के ख़िलाफ़ लगातार जहर उगलने वाले और टाइम मैगजीन में लिखने वाले पत्रकार आतिश तासीर ऐसे शख्स हैं, जो न सिर्फ ऐसा लिखते हैं बल्कि इसमें संदर्भ और संदेश ढूँढकर उसे जस्टिफाई करने का भी प्रयास करते हैं।

साल 2018 में वैनिटी फेयर नामक वेबसाइट पर आतिश तासीर का एक लेख छपा। हालाँकि, लेख का शीर्षक ऐसा था, जैसे वह ब्रिटेन के शाही केंसिंगटन पैलेस में पसरे नस्लवाद पर कुछ गंभीर अनुभव साझा करने वाले हैं। लेकिन जब लेख की शुरुआत हुई तो इसके लिए सबसे पहले उन्होंने एला एंडरसेन के साथ अपने संबंधों के बारे में बताना शुरू किया।

लेख की शुरुआत में आतिश ने बताया कि एला, केंट के प्रिंस और प्रिंसेज मिशेल की बेटी थी और एक हाउस पार्टी के दौरान उनकी मुलाकात हुई थी। आतिश के मुताबिक धीरे-धीरे दोनों में नजदीकियाँ बढ़ी और दोनों ने साथ में वहाँ 3 साल बिताए।

इस दौरान आतिश केंसिंगटन पैलेस से जुड़े रहे और दोनों के बारे में मीडिया में भी कई विवादित बाते हुईं। उनके लेख को पढ़कर लगा जैसे इस बीच वे मीडिया में आई एक हेडलाइन से आहत भी हुए थे- जो “PRINCESS PUSHY ‘DELIGHTED’ OVER HER DAUGHTER’S ROMANCE WITH INDIA’S CAPTAIN CONDOM” नाम से पब्लिश हुई थी। उन्होंने इस लेख के शीर्षक को उनके रिश्ते के लिए आपत्तिजनक बताया और नीचे अपने संबंधों की शुरुआत पर बात करने लगे। अफसोस जिस तरह के शीर्षक को लेकर आतिश ने आपत्ति जताई, उससे कहीं ज्यादा गंदगी उन्होंने अपने लेख में परोस दी।

आतिश तासीर ने लिखा कि टाइम मैगजीन में बतौर संवाददाता अपना करियर शुरू करने के बाद और लंदन ब्यूरो में शिफ्ट होने से पहले उन्होंने एला के साथ खूबसूरत वक्त गुजारा। हालाँकि, ये वक्त उन्होंने कैसे गुजारा, इसका उल्लेख आतिश ने लेख के शुरू में ही कर दिया। उन्होंने लिखा, “मैं और एला उस दौरान बकिंग्घम पैलेस में महारानी के स्विमिंग पूल में नंगे तैरते थे। दोनों ने साथ में MDMA (एनर्जी और सेंसेशन बढ़ाने के लिए लिया जाने वाला एक तरह का ड्रग) भी लेते थे।” इसके बाद आतिश अपने लेख को थोड़ा एंगल देते हैं – भावनाओं का तड़का लगा कर। वो बताते हैं कि उनके पिता एक पाकिस्तानी बिजनेसमैन और राजनेता थे, जिन्होंने उनकी माँ को उस समय छोड़ दिया था जब वो सिर्फ 2 साल के थे।

शब्दों के साथ कैसे खेला जाता है, यह पत्रकार या लेखक से बेहतर कौन समझ सकता है। लेकिन शब्दों की भी अपनी गरिमा होती है। अगर यह खबरों में एंगल देने के लिए प्रयोग की जाए तो प्रोपेगेंडा कहलाता है लेकिन आपसी संबंधी के लिए प्रयोग किए जाएँ तो नीचता कहलाती है। आतिश कैसे पत्रकार हैं, इसका तो पता नहीं लेकिन अपनी प्रेमिका के साथ अंतरंग संबंधों पर बोलकर उन्होंने साबित कर दिया कि वो नीच इंसान हैं, निहायत ही घटिया मानसिकता वाले। वे ट्विटर पर जिस तरह हर मुद्दे को गौमूत्र तक खींच लाते हैं, उसी तरह ब्रिटेन में नस्लवाद के मुद्दे को समझाते-समझाते वो अपने और एला के बीच अंतरंग संबंधों को उजागर कर देते हैं। वे बता देते हैं कि उनके और एला के बीच कैसे संबंध थे और उसमें ऊर्जा भरने के लिए वे क्या-क्या करते थे। बिना यह सोचे कि एला अब किसी और की ब्याहता है, बिना यह सोचे कि इन बातों का शायद उसके परिवार पर असर पड़ सकता है।

इस दौरान उनका इस बात से कोई सरोकार नहीं रह जाता कि वे अपने लेख में अपनी जिस प्रेमिका की पहचान उजागर करके उसके बारे में बातें कर रहे हैं, उससे सार्वजनिक पटल पर उस महिला की छवि पर क्या असर पड़ेगा? उन्हें अपने लेख में एला का संदर्भ देते हुए बिलकुल महसूस नहीं होता कि क्या उन्हें इसका अधिकार है? या फिर वो इतने बड़े स्तंभकार बन चुके हैं कि किसी की निजता को तार-तार करना उनके लिए मात्र लेख में इस्तेमाल होने वाला एक किस्सा भर है?

इस लेख में वो एला के साथ बिताए किस्से का प्रयोग करके ब्रिटिश राजघराने से संबंधित लोगों में पसरे घमंड और उनके नस्लवादी होने का उल्लेख करते हैं और अपने-एला के रिश्ते से जुड़े एक किस्से के बारे में बताते हैं। वो कहते हैं कि एक बार उन्हें प्रिसेंज मिशेल की दोस्त ने कहा था कि ब्रिटिश लोगों को ये बात बिलकुल पसंद नहीं कि कोई विदेशी आए और उनकी राजकुमारियों को चुरा (प्यार में फँसा कर) कर ले जाए। वे बताते हैं कि ब्रिटिश लोगों में चिंता, आक्रोश और नफरत के होने का मतलब ही ये था कि वो अपने शाही परिवार को कितना प्यार करते हैं। उनके लेख के मुताबिक एला और उनके रिश्ते के दौरान जो समय, उन्होंने वहाँ गुजारा उस वक्त लगभग हर कोई नस्लवादी हुआ करता था।

ये बात स्वीकार्य है कि विश्व के अधिकतर देश एक समय तक नस्लवाद से काफी काफी प्रभावित रहे हैं, अभी भी हैं और ये भी सच है कि इन मुद्दों पर अपनी बात और अपनी राय रखना बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन इसके लिए एक लड़की के साथ अपने संबंधों को उजागर करना और उसके साथ बिताए समय को बिना अनुमति के जगजाहिर करना, न किसी के अधिकार क्षेत्र में आता है और न ही यह नैतिक रूप से सही है। खैर आतिश तासीर से नैतिकता की उम्मीद कैसी!

हम बहुत से नाट्य प्रस्तुति और कहानियाँ पढ़ते हैं, जिसमें पूरी घटना सत्य पर आधारित होती है, लेकिन उसके पात्रों के नाम बदलकर उसकी निजता को सुरक्षित रखा जाता है और अपना मूल संदेश भी दे दिया जाता है। पर आतिश का लेख शुरुआत से ही पढ़ने पर महसूस होता है कि शायद वे अपने बौद्धिक स्तर को इस्लाम, कट्टरपंथ आदि के आगे विस्तार दे ही नहीं पाए हैं। उन्हें पता ही नहीं है कि किसी के साथ संबंध होने का अर्थ उसकी सालों बाद में बदनामी करना नहीं होता। उन्हें मालूम है तो सिर्फ़ अपने पिता की तरह भारत और हिंदुओं के लिए जहर उगलना, साथ में अपने लेख के लिए महिलाओं को एक मात्र विषय वस्तु समझना।

यह जानना भी जरूरी है कि भारत सरकार को धोखा देने के कारण अपना OCI (Overseas Citizenship of India) रद्द करवा चुके आतिश के इस लेख से इस बात का भी पता चलता है कि एला से संबंधों के दौरान उन्होंने अपने पाकिस्तान मूल के पिता होने की पहचान भी छिपाई थी और खुद को भारतीय बताया था। क्योंकि शाही पैलेस के बाहर घूम रहे पुलिस वाले जब उन्हें मिलते थे तो वह उनसे यही सवाल करते थे कि क्या तुम ही वो भारतीय शख्स हो, जो एला के साथ रह रहे हो? इसके अलावा मीडिया हेडलाइन्स में भी उस समय उनके लिए ‘इंडियन’ शब्द का ही प्रयोग होता था। ऐसा इसलिए क्योंकि आतिश की माँ भारतीय मूल की हैं।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

एक साथ 8 ट्रेनें, सब से पहुँच सकेंगे सरदार पटेल की सबसे ऊँची मूर्ति तक: केवड़िया होगा देश का पहला ‘ग्रीन बिल्डिंग’ स्टेशन

इस रेल कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा लाभ स्टेचू ऑफ़ यूनिटी देखने के लिए आने वाले पर्यटकों को मिलेगा। इसके अलावा इस कनेक्टिविटी से केवड़िया में...

फहद अहमद अब बना ‘किसान नेता’, पहले था CAA विरोधी छात्र नेता: स्वरा-मंडली संग करता है काम, AMU में मिली थी ‘ट्रेनिंग’

मुंबई के TISS में Ph.D कर रहा एक छात्र नेता है फहद अहमद, जो CAA विरोधी प्रदर्शनकारी हुआ करता था, अब वो 'किसान नेता' बन गया है।

‘उलेमाओं की बात मानें और गड़बड़ कोरोना वैक्सीन न लगवाएँ, नॉर्वे में 30 लोग मर गए’: सपा सांसद शफीकुर्रहमान

सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कोरोना के टीके पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की है कि वो कोरोना वैक्सीन न लगवाएँ।

भारत के खिलाफ विद्रोह, खालिस्तान से जुड़े मामले में ‘किसान नेता’ को समन, जवाब मिला – ‘नहीं आऊँगा, मेरे घर में शादी है’

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने 'लोक भलाई इंसाफ वेलफेयर सोसाइटी (LBWS)' के 'किसान नेता' बलदेव सिंह सिरसा को पेश होने के लिए समन भेजा है।

नॉर्वे में वैक्सीन लेने वाले 25000 में से 29 की मौत, भारत में पहले ही दिन टीका लगवाने वाले 2 लाख लोग एकदम स्वस्थ

नॉर्वे में कोरोना वैक्सीन लगाने के बाद अब तक 29 लोगों की मौत हो चुकी है। ये सभी 75 वर्ष के थे, जिनके शरीर में पहले से कई बीमारियाँ थीं।

#BanTandavNow: अमेज़ॉन प्राइम के हिंदूफोबिक प्रोपेगेंडा से भरे वेब-सीरीज़ तांडव के बहिष्कार की लोगों ने की अपील

अमेज़न प्राइम पर हालिया रिलीज सैफ अली खान स्टारर राजनीतिक ड्रामा सीरीज़ ‘तांडव’, जिसे निर्देशित किया है अली अब्बास ज़फ़र ने। अली की इस सीरीज में हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया गया है।

प्रचलित ख़बरें

निधि राजदान की ‘प्रोफेसरी’ से संस्थानों ने भी झाड़ा पल्ला, हार्वर्ड ने कहा- हमारे यहाँ जर्नलिज्म डिपार्टमेंट नहीं

निधि राजदान द्वारा खुद को 'फिशिंग अटैक' का शिकार बताने के बाद हार्वर्ड ने कहा है कि उसके कैम्पस में न तो पत्रकारिता का कोई विभाग और न ही कोई कॉलेज है।

अब्बू करते हैं गंदा काम… मना करने पर चुभाते हैं सेफ्टी पिन: बच्चियों ने रो-रोकर माँ को सुनाई आपबीती, शिकायत दर्ज

माँ कहती हैं कि उन्होंने इस संबंध में अपने शौहर से बात की थी लेकिन जवाब में उसने कहा कि अगर ये सब किसी को पता चली तो वह जान से मार देगा।

‘अगर तलोजा वापस गए तो मुझे मार डालेंगे, अर्नब का नाम लेने तक वे कर रहे हैं किसी को टॉर्चर के लिए भुगतान’: पूर्व...

पत्नी समरजनी कहती हैं कि पार्थो ने पुकारा, "मुझे छोड़कर मत जाओ... अगर वे मुझे तलोजा जेल वापस ले जाते हैं, तो वे मुझे मार डालेंगे। वे कहेंगे कि सब कुछ ठीक है और मुझे वापस ले जाएँगे और मार डालेंगे।”

मंच पर माँ सरस्वती की तस्वीर से भड़का मराठी कवि, हटाई नहीं तो ठुकराया अवॉर्ड

मराठी कवि यशवंत मनोहर का कहना था कि उन्होंने सम्मान समारोह के मंच पर रखी गई सरस्वती की तस्वीर पर आपत्ति जताई थी। फिर भी तस्वीर नहीं हटाई गई थी इसलिए उन्होंने पुरस्कार लेने से मना कर दिया।

मारपीट से रोका तो शाहबाज अंसारी ने भीम आर्मी के नेता रंजीत पासवान को चाकुओं से गोदा, मौत

शाहबाज अंसारी ने भीम आर्मी नेता रंजीत पासवान की चाकू घोंप कर हत्या कर दी, जिसके बाद गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपित के घर को जला दिया।

केंद्रीय मंत्री को झूठा साबित करने के लिए रवीश ने फैलाई फेक न्यूज: NDTV की घटिया पत्रकारिता के लिए सरकार ने लगाई लताड़

पत्र में लिखा गया कि ऐसे संवेदनशील समय में जब किसान दिल्ली के पास विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, उस समय रवीश कुमार ने महत्वपूर्ण तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है, जो किसानों को भ्रमित करता है और समाज में नकारात्मक भावनाओं को उकसाता है।

एक साथ 8 ट्रेनें, सब से पहुँच सकेंगे सरदार पटेल की सबसे ऊँची मूर्ति तक: केवड़िया होगा देश का पहला ‘ग्रीन बिल्डिंग’ स्टेशन

इस रेल कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा लाभ स्टेचू ऑफ़ यूनिटी देखने के लिए आने वाले पर्यटकों को मिलेगा। इसके अलावा इस कनेक्टिविटी से केवड़िया में...

फहद अहमद अब बना ‘किसान नेता’, पहले था CAA विरोधी छात्र नेता: स्वरा-मंडली संग करता है काम, AMU में मिली थी ‘ट्रेनिंग’

मुंबई के TISS में Ph.D कर रहा एक छात्र नेता है फहद अहमद, जो CAA विरोधी प्रदर्शनकारी हुआ करता था, अब वो 'किसान नेता' बन गया है।

प्राइवेट वीडियो, किसी और से शादी तक नहीं करने दी… सदमे से माँ की मौत: महाराष्ट्र के मंत्री पर गंभीर आरोप

“धनंजय मुंडे की वजह से मेरी ज़िंदगी और करियर दोनों बर्बाद हो गए। उसने मुझे किसी और से शादी तक नहीं करने दी। जब मेरी माँ को..."

‘उलेमाओं की बात मानें और गड़बड़ कोरोना वैक्सीन न लगवाएँ, नॉर्वे में 30 लोग मर गए’: सपा सांसद शफीकुर्रहमान

सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कोरोना के टीके पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की है कि वो कोरोना वैक्सीन न लगवाएँ।

भारत के खिलाफ विद्रोह, खालिस्तान से जुड़े मामले में ‘किसान नेता’ को समन, जवाब मिला – ‘नहीं आऊँगा, मेरे घर में शादी है’

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने 'लोक भलाई इंसाफ वेलफेयर सोसाइटी (LBWS)' के 'किसान नेता' बलदेव सिंह सिरसा को पेश होने के लिए समन भेजा है।

नॉर्वे में वैक्सीन लेने वाले 25000 में से 29 की मौत, भारत में पहले ही दिन टीका लगवाने वाले 2 लाख लोग एकदम स्वस्थ

नॉर्वे में कोरोना वैक्सीन लगाने के बाद अब तक 29 लोगों की मौत हो चुकी है। ये सभी 75 वर्ष के थे, जिनके शरीर में पहले से कई बीमारियाँ थीं।

#BanTandavNow: अमेज़ॉन प्राइम के हिंदूफोबिक प्रोपेगेंडा से भरे वेब-सीरीज़ तांडव के बहिष्कार की लोगों ने की अपील

अमेज़न प्राइम पर हालिया रिलीज सैफ अली खान स्टारर राजनीतिक ड्रामा सीरीज़ ‘तांडव’, जिसे निर्देशित किया है अली अब्बास ज़फ़र ने। अली की इस सीरीज में हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया गया है।

‘अगर तलोजा वापस गए तो मुझे मार डालेंगे, अर्नब का नाम लेने तक वे कर रहे हैं किसी को टॉर्चर के लिए भुगतान’: पूर्व...

पत्नी समरजनी कहती हैं कि पार्थो ने पुकारा, "मुझे छोड़कर मत जाओ... अगर वे मुझे तलोजा जेल वापस ले जाते हैं, तो वे मुझे मार डालेंगे। वे कहेंगे कि सब कुछ ठीक है और मुझे वापस ले जाएँगे और मार डालेंगे।”

राम मंदिर निर्माण की तारीख से क्यों अटकने लगी विपक्षियों की साँसें, बदलते चुनावी माहौल का किस पर कितना होगा असर?

अब जबकि राम मंदिर निर्माण के पूरा होने की तिथि सामने आ गई है तो उन्हीं भाजपा विरोधियों की साँस अटकने लगी है। विपक्षी दल यह मानकर बैठे हैं कि भाजपा मंदिर निर्माण 2024 के ठीक पहले पूरा करवाकर इसे आगामी लोकसभा चुनाव में मुद्दा बनाएगी।

वीडियो: ग्लास-कैरी बैग पर ‘अली’ लिखा होने से मुस्लिम भीड़ का हंगामा, कहा- ‘इस्लाम को लेकर ऐसी हरकतें, बर्दाश्त नहीं करेंगे’

“हम अपने बुजुर्गों की शान में की गई गुस्ताखी को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। ये यहाँ पर रखा क्यों गया है? 10 लाख- 15 लाख, जितने भी रुपए का है ये, हम तत्काल देंगें, यहीं पर।"

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,695FollowersFollow
381,000SubscribersSubscribe