खुद को 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सबसे बड़ा रक्षक' बताने वाला लेफ्ट-लिबरल जमात सीजेपी प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ भीड़ की बदसलूकी को जायज ठहरा रहा है।
पीएम मोदी को सेशेल्स दौरे के दौरान देश के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया। ये पुरस्कार सबसे पहले पीएम मोदी को दिया गया है। लेकिन भारत में ही इस पर सवाल उठाने लगे हैं।
तुम्हारे (मुस्लिम) 'मर्द' 'हैंडसम' और 'खूबसूरती' नहीं है आरफा और निवेदिता, वे महिलाओं को सुरमा लगाकर नहीं फँसाते बल्कि माथे पर टीका और हाथ में कलावा पहनकर आते हैं।
कुणाल कामरा के शो में जब पत्रकारिता की 'सस्ती आलिया भट्ट' मनीषा पांडे पहुँची तो बेकाबू हो गई। अपने शो के पाकिस्तानी दर्शक होने का ऐसे बखान किया जैसे ये कोई 'तमगा' हो।
आरफा ने 'लव जिहाद' को सीधे-सीधे हिंदू महिलाओं का अपमान बता दिया। मतलब जो भी इस मुद्दे पर सवाल उठा रहा है, वो महिलाओं को नासमझ मान रहा है, यहाँ यही बताने की कोशिश की गई।
खुद को 'निष्पक्ष' पत्रकार बताने वाले रवीश कुमार ने असम के सीएम हिमंता बिस्वा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा ने लगाए आरोपों के मामले में बिना जानकारी के टिप्पणी की।