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जिस कोरोना वैक्सीन के लिए पागल था भारत का लिबरल गैंग, उससे ही शेन वार्न को आया हार्ट अटैक: क्रिकेटर की मौत में डाॅक्टर का चौंकाने वाला दावा, रोक की डिमांड

डॉक्टर मल्होत्रा ने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर की मौत पर बात करते हुए कहा, " मेरे पिता की मौत भी फाइजर वैक्सीन की दो खुराक लेने के बाद हुई थी और उनके अंदर दिल की बीमारी वैक्सीन लगने के बाद तेजी से बढ़ी।"

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज लेग स्पिनर शेन वॉर्न की मौत एक बार फिर चर्चा में है। दरअसल, वॉर्न की मौत 3 महीने पहले हार्ट अटैक से हुई थी। अब इसी पर कुछ डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि हो सकता है वॉर्न की मौत फाइजर कोरोना वैक्सीन लेने की वजह से हुई हो। उनका दावा है कि इस वैक्सीन से हृदय संबंधी रोग बढ़ते हैं।

जानकारी के मुताबिक मार्च 2023 में शेन वॉर्न की हार्ट अटैक के कारण मौत हुई थी। इससे ठीक 9 माह पहले उन्होंने कोरोना वैक्सीन लगवाई थी। रिपोर्ट्स बताती हैं कि वॉर्न ने फाइजर कोविड mRNA वैक्सीन लगवाई थी जिसकी वजह से हार्ट अटैक आने की संभावना है। इसी तथ्य को देखते हुए ऑस्ट्रेलियाई डॉक्टर क्रिस नील और भारतीय मूल के ब्रिटिश हार्ट रोग विशेषज्ञ डॉ असीम मल्होत्रा ने कहा कि शेन वॉर्न की मौत शायद कोरोना वैक्सीन लेने की वजह से शायद हुई हो।

डॉक्टर मल्होत्रा ने कहा, ” ये मानना मुश्किल होता है कि एक खिलाड़ी को हार्ट अटैक आया। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के पूर्व खिलाड़ी शेन वॉर्न को 52 साल की उम्र में अचानक दिल का दौरा पड़ा था, जिससे उनकी मौत हो गई। हालाँकि, सभी को पता है कि वॉर्न की लाइफस्टाइल बहुत हेल्थी नहीं थी। वह स्मोकिंग करते थे और उनका वजन भी ज्यादा था। मेरे पिता की मौत भी फाइजर वैक्सीन की दो खुराक लेने के बाद हुई थी और उनके अंदर दिल की बीमारी वैक्सीन लगने के बाद तेजी से बढ़ी।” वहीं डॉ नील ने कहा जब तक कि इस मामले में जाँच नहीं हो जाती तब तक के लिए कोविड वैक्सीन लेने पर रोक लगानी चाहिए।

विदेशी वैक्सीन लेने का वामपंथियों ने किया था प्रचार

बता दें कि एक ओर जहाँ आज की स्थिति है जब विदेशी कोविड वैक्सीन को लेकर ऐसे खुलासे हो रहे हैं। वहीं याद दिला दें कि कोरोना काल में जब भारत ने बाजार में अपनी कोविड वैक्सीन उतारी थी तब कैसे विपक्षियों और लिबरलों ने इसका खूब विरोध किया था। कई लोगों ने तो भारत में बनी कोविड वैक्सीन को मोदी वैक्सीन बताते हुए ये तक कहा था कि वो बीजेपी की वैक्सीन नहीं लगवाएँगे। इन लोगों ने विदेशी वैक्सीनों की पैरवी करते हुए ये बताने का प्रयास किया था कि भारत की वैक्सीन सुरक्षित नहीं हैं और अगर किसी को वैक्सीनेट होना है तो वो विदेश में निर्मित वैक्सीन को चुने।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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