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3 साल में 4 गुना हुआ बैंक फ्रॉड, लेकिन नुकसान की रकम एक तिहाई हुई: RBI रिपोर्ट से खुलासा, प्राइवेट बैंक के कस्टमर झाँसे में ज्यादा आते हैं

2021-22 में लोगों का ₹45,358 करोड़ का नुकसान हुआ था, 2022-23 में यह नुकसान घट कर ₹26,127 करोड़ हो गया था। 2023-24 में लोगों का ₹13,930 करोड़ का नुकसान हुआ है। यानी तीन वर्षों में नुकसान की रकम घट कर एक तिहाई हो गई है।

वित्त वर्ष 2023-24 में पिछले तीन साल के मुकाबले लोगों के साथ होने वाले बैंक फ्रॉड के मामलों में लगभग चार गुने की वृद्धि हुई है लेकिन इनसे होने वाला नुकसान एक तिहाई हो गया है। सबसे अधिक धोखाधड़ी निजी बैंक में खाता रखने वालों के साथ हो रही है जबकि सबसे ज्यादा पैसा सरकारी बैंकों में खाता रखने वालों का लुट रहा है। यह जानकारी वित्त वर्ष 2023-24 के लिए जारी की गई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की वार्षिक रिपोर्ट में दी गई है।

RBI द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में लोगों से बैंक धोखाधड़ी के 36,075 मामले हुए। इस धोखाधड़ी के कारण लोगों का ₹13,930 करोड़ का नुकसान हुआ है। अगर इसकी तुलना 2021-22 से की जाए तो धोखाधड़ी के मामले चौगुने हो गए हैं। 2021-22 में 9,046 जबकि 2022-23 में धोखाधड़ी के कुल 13,564 मामले सामने आए थे।

2021-22 में लोगों का ₹45,358 करोड़ का नुकसान हुआ था, 2022-23 में यह नुकसान घट कर ₹26,127 करोड़ हो गया था। यानि बीते तीन वर्षों में धोखाधड़ी के मामले चार गुना बढ़ गए हैं जबकि उनमें लुटने वाली रकम तीन गुने घट गई है।

RBI ने यह भी बताया है कि बैंक धोखाधड़ी का सबसे अधिक शिकार निजी बैंकों में खाता रखने वाले लोग हो रहे हैं। 2023-24 में बैंक धोखाधड़ी का शिकार होने वाले 67.1% लोगों का खाता निजी बैंक में था। निजी बैंक में खाता रखने वाले 24,210 लोग 2023-24 में बैंक धोखाधड़ी का शिकार हुआ हैं। वहीं बैंक धोखाधड़ी का शिकार होने वाले 22.8% लोग सरकारी बैंकों में खाता रखते हैं। 2023-24 में ऐसे 10,507 लोगों के साथ धोखाधड़ी हुई है। इसके अलावा विदेशी बैकों में खाता रखने वाले 2,899 (8.1%) लोगों के साथ धोखाधड़ी हुई है।

जहाँ धोखाधड़ी के मामलों में फँसने वालों की संख्या निजी बैंक खाताधारकों की अधिक है, वहीं ज्यादा पैसा सरकारी बैंकों में खाता रखने वाले गँवा रहे हैं। निजी बैंक खाताधारकों ने 2023-24 के दौरान इन धोखाधड़ी में ₹3,170 करोड़ गँवाए हैं। सरकारी बैंक खाताधारकों ने 2023 के दौरान धोखाधड़ी के चलते ₹10,507 करोड़ रूपए गँवाए हैं। 2022-23 में भी सरकारी बैंक में खाता रखने वालों ने ₹18, 750 करोड़ गँवाए थे, जबकि निजी बैंकों में खाता रखने वालों का ₹6,159 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ था।

यह भी रिपोर्ट में बताया गया है कि 80% धोखाधड़ी के मामले इन्टरनेट या कार्ड से जुड़े हुए हैं। हालाँकि, सबसे ज्यादा पैसे का घपला लोन के मामलों में हुआ है। लोन के मामलों में 2023-24 में ₹11,772 करोड़ की धोखाधड़ी हुई है। यह धोखाधड़ी 2022-23 में ₹24,685 करोड़ की थी जबकि 2021-22 में लोन के ही मामलों में ₹43,272 करोड़ की धोखाधड़ी हुई थी।

गौरतलब है कि भारत में इन्टरनेट के प्रसार के साथ ही बैंक फ्रॉड के मामले लगातार बढ़े हैं। लोगों को आसान लोन, बड़े पुरष्कार या फिर उन्हें डरा धमका कर उनसे धोखाधड़ी हो रही है। RBI समेत सरकार ने लगातार इस पर कदम उठाए हैं। इसी कारण यह सामने आया है कि लोग अब अधिक मामलों को प्रशासन के पास ले जा रहे हैं। बीते कुछ समय में पैसों की वापसी भी हो रही है।

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अर्पित त्रिपाठी
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