Tuesday, July 27, 2021
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सेक्स सिर्फ बच्चों के लिए: चर्च की इस डिमांड को लोग करते थे अनसुना, फोरप्ले और डिल्डो हो गए थे लोकप्रिय

पति-पत्नी के बीच सेक्स को लेकर चर्च की राय थी - 'योनि में लिंग'। सिर्फ बच्चे पैदा करो, अधिक मजे नहीं लो। चुंबन तक के खिलाफ था चर्च।

मानवता के इतिहास पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि सेक्स कोई नई बात नहीं थी। दुनिया भर के समाजों में रोमांस लंबे समय से रुचि का विषय रहा है। लेकिन, डॉ एलेनोर जेनेगा ने खुलासा किया है कि मध्य युग में ईसाई लोग केवल बच्चे पैदा करने के लिए सेक्स करने की चर्च की सलाह नहीं मानते थे।

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी महीने की शुरुआत में प्रकाशित हुई किताब ‘द मिडिल एज: ए ग्राफिक हिस्ट्री’ के लेखकर और विशेषज्ञ ने मध्य काल के इतिहास के बारे में इतिहासकार डॉ कैट जरमन से बात की। इस दौरान डॉ जनेगा ने कहा कि मध्य काल में आम लोग बच्चे पैदा करने की बजाय फोर प्ले को ज्यादा बेहतर मानते थे।

क्या चाहता था चर्च

डॉ जेनेगा ने डॉ जरमन से बातचीत के दौरान बताया कि मध्य युग में होने वाले सेक्स के बारे में वो सोचते हैं तो पाते हैं कि यह चर्च का इतिहास रहा है कि वो लोगों को केवल बच्चे पैदा करने के लिए सेक्स करने को कहता था। हालाँकि लेखक ने कहा कि मध्य काल के लोग रोमांस करने को लेकर दिलचस्पी रखते थे, न कि बच्चे पैदा करने को लेकर।

इसके अलावा चर्च का कहना था रविवार को संभोग से बचा जाना चाहिए, क्योंकि यह ईसा मसीह का दिन था। साथ ही मध्य युग में चर्च ने गुरुवार और शुक्रवार के दिन को सेक्स के लिए बैन कर रखा था क्योंकि इस दिन को रविवार के दिन का पवित्र भोज लेने की तैयारी वाला दिन माना जाता था।

लेखिका ने कहा, “वर्तमान में सेक्स को लेकर चर्च के नजरिए को छुपा दिया गया है। जबकि वो खास कर मध्य युग में इसे केवल ‘योनि में लिंग’ वाली क्रिया मानते थे। जबकि हकीकत यह थी कि मध्ययुगीन लोग रोमांस में रुचि रखते थे, जिसे हम फोरप्ले कहते हैं।”

डॉ जनेगा ने कहा कि मध्य काल में चर्च यह मानता था कि पुरुष और महिला दोनों को ही बच्चे पैदा करने के लिए संभोग सुख की जरूरत होती है। इसके अलावा उन्हें और अधिक मजे नहीं लेने चाहिए। जेनेगा ने आगे कहा कि एक प्रभावशाली ईसाई विचारक थॉमस एक्विनास ने तो ‘कामुक चुंबन’ तक के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने अपना मत रखते हुए कहा था कि लोगों को सेक्स के बारे में बहुत अधिक नहीं सोचना चाहिए, इसे सिर्फ वैसे करना चाहिए, जिससे बच्चे पैदा हो सकें।

मध्यकाल में काफी लोकप्रिय थे सेक्स टॉय

डॉ जनेगा ने खुलासा किया है कि मध्य युग में ईसाई लोगों के बीच सेक्स टॉय काफी लोकप्रिय थे। उन्होंने कहा कि मध्य युग में लोग समलैंगिक विचार के कारण सेक्स टॉय को नहीं देखते थे बल्कि उनके लिए वो चीज ऐसी थी, जो किसी को प्रेग्नेंट नहीं कर सकती थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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