Sunday, April 21, 2024
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‘… तो 30000 स्टाफ के साथ डूब जाएँगे’: क्यों कानूनी पचड़े में फँसा ₹26000 करोड़ का डील, अंबानी-बियानी-बेजॉस का क्या दाँव पर लगा

2020 में रिलायंस रिटेल ने फ्यूचर ग्रुप के रिटेल, होलसेल और लॉजिस्टिक्स कारोबार को खरीदने की घोषणा की। इस डील पर अमेजन को आपत्ति है।

यदि रिलायंस के साथ 26,000 करोड़ रुपए का सौदा नहीं होता है तो फ्यूचर रिटेल लिमिटेड डूब जाएगी। 30 हजार लोगों की नौकरियाँ चली जाएगी। यह दलील मंगलवार (11 जनवरी 2022) को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई। मामला फ्यूचर रिटेल (Future Retail) और ऑनलाइन दिग्गज अमेजन (Amazon) के बीच जारी कानून लड़ाई से जुड़ा है। फिलहाल शीर्ष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षा रख लिया है। यह लड़ाई सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग (CCI) और मध्यस्थता पंचाट में चल रही है। मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) और जेफ बेजोस (Jeff Bezos) जैसे दुनिया के धनकुबेर इस लड़ाई के किरदार हैं।

क्या है मामला?

बिग बाजार (Big Bazaar) का आपने नाम सुना होगा। किशोर बियाणी की फ्यूचर रिटेल ने इस रिटेल चेन स्टोर की शुरुआत 2001 में की थी। देश में अपनी तरह का यह पहला शुरुआत था। देश के 400 श​हरों में फ्यूचर के 1800 रिटेल स्टोर हैं। 2020 में रिलायंस रिटेल ने फ्यूचर ग्रुप के रिटेल, होलसेल और लॉजिस्टिक्स कारोबार को खरीदने की घोषणा की। इस डील पर अमेजन को आपत्ति है।

अमेजन की आपत्ति

दरअसल फ्यूचर ग्रुप के साथ एक डील 2019 में अमेजन ने भी की थी। इसके तहत करीब 1500 करोड़ रुपए में फ्यूचर कूपन में 49 फीसदी हिस्सेदारी अमेजन को बेची गई थी। अमेजन का कहना है कि रिलायंस और फ्यूचर का सौदा इस डील का उल्लंघन करता है। अमेजन का यह भी कहना है कि 2019 का डील उसे 3 से 10 साल के भीतर फ्यूचर रिटेल में हिस्सेदारी खरीदने का अधिकार भी देता है।

फ्यूचर ने क्यों किया सौदा

फ्यूचर ग्रुप कर्ज में डूबी है। 2019 में उस पर कर्ज 12,778 करोड़ रुपए था। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA ने उसकी रेटिंग निगेटिव कर दी थी। इसके बाद उसने अमेजन के साथ डील किया जिसे नवंबर 2019 में भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग ने मँजूरी दे दी, लेकिन दिसंबर 2021 में निलंबित कर दिया। आर्थिक हालत दुरुस्त नहीं होने पर फ्यूचर ने 2020 में रिलायंस के साथ डील की।

अब तक क्या

अमेजन ने रिलायंस और फ्यूचर के डील को सिंगापुर की मध्यस्थता अदालत में चुनौती दी। अक्टूबर 2020 में मध्यस्थता पंचाट का अंतरिम फैसला अमेजन के पक्ष में आया। अमेजन ने सेबी, सीसीआई, स्टॉक एक्सचेंज को भी इस डील को रोकने के लिए पत्र लिखा। इसके बाद फ्यूचर ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका डाली। दिसंबर 2020 में हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने फ्यूचर के हक में फैसला दिया। उससे पहले नवंबर 2020 में रिलायंस के साथ उसके डील को सीसीआई ने भी मँजूरी दे दी थी। जनवरी 2021 में इस डील को सेबी से भी क्लीयरेंस मिल गई। जनवरी 2021 को फ्यूचर एनसीएलटी भी पहुँच गई। दूसरी तरफ दिल्ली हाई कोर्ट के सिंगल बेंच के फैसले को अमेजन ने डिवीजन बेच में चुनौती दी। मध्यस्थता पंचाट के फैसले को लागू कराने की गुहार लगाई। फरवरी में हाई कोर्ट ने सिंगापुर के पंचाट के फैसले को सही बताया। इसे फ्यूचर ने डिविजन बेंच में चुनौती दी, जिसके खिलाफ अमेजन सुप्रीम कोर्ट चली गई। सुप्रीम कोर्ट ने डील पर फैसला लेने से एनसीएलटी को रोक रखा है। नवंबर 2021 में इस मामले से जुड़े सभी पक्षों को शीर्ष अदालत ने संयम बरतने को कहा था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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