Wednesday, April 21, 2021
Home विविध विषय अन्य ₹1390 देकर फेसबुक चाहता है आपकी ब्राउज़िंग हिस्ट्री, 'निजी' जानकारियों में घुसपैठ, आप लेंगे...

₹1390 देकर फेसबुक चाहता है आपकी ब्राउज़िंग हिस्ट्री, ‘निजी’ जानकारियों में घुसपैठ, आप लेंगे रिस्क?

आपको $20 तक का मासिक शुल्क मिलेगा, और अगर आप किसी अन्य व्यक्ति को भी अपना डाटा देने के लिए मना लें तो आपको रेफरल बोनस भी मिलेगा। फ़िलहाल यह प्रोग्राम केवल अमेरिका और भारत के उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध होगा।

हालिया लोकसभा निर्वाचन के दौरान विभिन्न विवादों के केंद्र में रहा फ़ेसबुक एक और संभावित रूप से विवादास्पद ऍप लेकर हाज़िर है। यूज़र्स की निजी जानकारी आधिकारिक रूप से हासिल करने के लिए फेसबुक ने ‘स्टडी’ नामक एक ऍप लॉन्च किया है, जिससे वह उपभोक्ता की सहमति से उनकी ब्राउज़िंग हिस्ट्री, वह कौन-कौन से ऍप इस्तेमाल करना पसंद करते हैं, कितनी देर तक करते हैं आदि इकठ्ठा करेगा। इस जानकारी का वह क्या करने वाला है इसका तो उसने खुलासा नहीं किया है, लेकिन इसके लिए $20 अर्थात लगभग 1390 रुपए तक यूज़र्स को मासिक भुगतान मिलेगा। फ़िलहाल इस ‘स्टडी’ प्रोग्राम में भागीदारी सीमित भौगोलिक क्षेत्र में रह रहे लोगों की ही होगी।

वेबसाइट पर घोषणा, जानकारी फेसबुक के बाहर साझा न करने का वादा

फेसबुक ने अपनी वेबसाइट पर इस कार्यक्रम की घोषणा करते हुए वादा किया है कि स्टडी ऍप के ज़रिए इकट्ठा जानकारी का वह न तो यूज़र्स को कौन से विज्ञापन दिखाए जाने हैं, इसका निर्धारण करने के लिए करेगा, न ही इस डाटा को वह किसी अन्य थर्ड पार्टी के साथ बाँटेगा। उसने यह भी वादा किया है कि वह अति-संवेदनशील जानकारियाँ जैसे आपका यूज़रनेम, पासवर्ड, फ़ोटो/वीडियो या आपके एसएमएस/अन्य किसी ऍप (वॉट्सऍप, ट्विटर आदि) से आए संदेश आदि नहीं पढ़ेगा या एक्सेस करेगा। इसके अलावा यूज़र्स के पास इस कार्यक्रम से बाहर निकलने का विकल्प हमेशा रहेगा- यानि किसी भी समय आप अपनी जानकारी देना बंद करने का अधिकार सुरक्षित रखेंगे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसके लिए आपको $20 तक का मासिक शुल्क मिलेगा, और अगर आप किसी अन्य व्यक्ति को भी अपना डाटा देने के लिए मना लें तो आपको रेफरल बोनस भी मिलेगा। फ़िलहाल यह प्रोग्राम केवल अमेरिका और भारत के उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध होगा। इसके अलावा यह केवल एंड्राइड यूज़र्स के लिए है, क्योंकि एप्पल के ऑपरेटिंग सिस्टम आईओएस के सुरक्षा प्रबंधन एक ऍप को किसी दूसरी ऍप तक इतनी पहुँच बहुत आसानी से नहीं दे देते।

निजता को लेकर चिंता बरकरार, फ़ेसबुक का इतिहास नहीं रहा है बहुत आशाजनक

फेसबुक के लाख वादों के बावजूद निजता को लेकर शंकाएँ उठना लाज़मी है। न केवल इसलिए कि यह ‘स्टडी’ प्रोग्राम अपने आप में, अपनी प्रकृति में ही किसी अनजाने व्यक्ति को अपने घर में केवल यह देखने के लिए बैठा लेने जैसा है कि आप घर में कौन से कपड़े पहनते हैं, क्या खाते या टीवी पर देखते हैं आदि, बल्कि इसलिए भी कि फेसबुक का अपने यूज़र्स की निजता, और यहाँ तक कि उनकी निजी जानकारी, को लेकर इतिहास बहुत उजला नहीं है।

कैम्ब्रिज एनालिटिका तो सभी के जेहन में ताज़ा है कि कैसे फेसबुक ने अपने उपभोक्ताओं की जानकारी कैम्ब्रिज एनालिटिका कम्पनी को सौंप दी थी। इसके अलावा पिछले साल एक और ‘स्कैंडल’ सामने आया जब यह खुलासा हुआ कि नेटफ्लिक्स, स्पॉटीफाई जैसी कम्पनियाँ फेसबुक को खिड़की की तरह इस्तेमाल कर आपके सन्देशों में झाँक सकतीं हैं, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न यह देख सकतीं हैं कि आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में कौन-कौन है आदि। यही नहीं, फ़ेसबुक पर पहले भी एप्पल ने सीमित प्रतिबंध लगाया था प्राइवेसी के हनन और उसके सुरक्षा प्रबंधों को चकमा देने के कारण। इसके अलावा फेसबुक इस इकठ्ठा हुई जानकारी का क्या करने वाला है, इसका बहुत अस्पष्ट सा ‘बेहतर उत्पाद और सेवाएँ विकसित करने के लिए’ जवाब दिया गया है।

नफ़ा बनाम नुकसान

इस प्रोग्राम में हिस्सा लेने के नफ़े हैं:

  • $20 की बैठे-बिठाए कमाई

अपनी निजी जानकारी के नुकसान/संभावित खतरे हैं:

  • आपकी जानकारी गलत हाथों में पड़ने का संभावित खतरा
  • फेसबुक द्वारा (या किसी कर्मचारी द्वारा निजी रूप से भी) थर्ड-पार्टियों को अवैध तरीके से आपकी जानकारी बेचे जाने के बाद आपको ‘ध्यान में रखकर’/निशाना बनाकर दिखाए गए राजनीतिक और कॉर्पोरेट विज्ञापन
  • फ़ेसबुक को वह जानकारियाँ भी प्राप्त हो जाना जो शायद आप न देना चाहें (खासकर कि यदि आप राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं तो यह दीर्घकालिक रूप से शर्तिया खतरे से खाली नहीं है)
  • ‘स्टडी’ प्रोग्राम से पूरी तरह हटने के लिए केवल ऍप अनइंस्टाल कर लेना काफी नहीं होगा- आपको इसकी बाकायदा सूचना देनी होगी। यह सूचना कैसे देनी होगी, फेसबुक ने यह साफ़ नहीं किया है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

देश को लॉकडाउन से बचाएँ, आजीविका के साधन बाधित न हों, राज्य सरकारें श्रमिकों में भरोसा जगाएँ: PM मोदी

"हमारा प्रयास है कि कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकते हुए आजीविका के साधन बाधित नहीं हों। केंद्र और राज्यों की सरकारों की मदद से श्रमिकों को भी वैक्सीन दी जाएगी। हमारी राज्य सरकारों से अपील है कि वो श्रमिकों में भरोसा जगाएँ।"

‘दिल्ली के अस्पतालों में कुछ ही घंटे का ऑक्सीजन बाकी’, केजरीवाल ने हाथ जोड़कर कहा- ‘मोदी सरकार जल्द करे इंतजाम’

“दिल्ली में ऑक्सीजन की भारी किल्लत है। मैं फिर से केंद्र से अनुरोध करता हूँ दिल्ली को तत्काल ऑक्सीजन मुहैया कराई जाए। कुछ ही अस्पतालों में कुछ ही घंटों के लिए ऑक्सीजन बची हुई है।”

पत्रकारिता का पीपली लाइवः स्टूडियो से सेटिंग, श्मशान से बरखा दत्त ने रिपोर्टिंग की सजाई चिता

चलते-चलते कोरोना तक पहुँचे हैं। एक वर्ष पहले से किसी आशा में बैठे थे। विशेषज्ञ को लाकर चैनल पर बैठाया। वो बोला; इतने बिलियन संक्रमित होंगे। इतने मिलियन मर जाएँगे।

यूपी में दूसरी बार बिना मास्क धरे गए तो ₹10,000 जुर्माने के साथ फोटो भी होगी सार्वजनिक, थूकने पर 500 का फटका

उत्तर प्रदेश में पब्लिक प्लेस पर थूकने वालों के खिलाफ सख्ती करने का आदेश जारी किया गया है। इसके तहत यदि कोई व्यक्ति पब्लिक प्लेस में थूकते हुए पकड़ा गया तो उस पर 500 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।

हाँ, हम मंदिर के लिए लड़े… क्योंकि वहाँ लाउडस्पीकर से ऐलान कर भीड़ नहीं बुलाई जाती, पेट्रोल बम नहीं बाँधे जाते

हिंदुओं को तीन बातें याद रखनी चाहिए, और जो भी ये मंदिर-अस्पताल की घटिया बाइनरी दे, उसके मुँह पर मार फेंकनी चाहिए।

दिल्ली-महाराष्ट्र में लॉकडाउन: राहुल गाँधी ने एक बार फिर राज्यों की नाकामी के लिए मोदी सरकार को ठहराया जिम्मेदार

"प्रवासी एक बार फिर पलायन कर रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि उनके बैंक खातों में रुपए डाले। लेकिन कोरोना फैलाने के लिए जनता को दोष देने वाली सरकार क्या ऐसा जन सहायक कदम उठाएगी?"

प्रचलित ख़बरें

‘सुअर के बच्चे BJP, सुअर के बच्चे CISF’: TMC नेता फिरहाद हाकिम ने समर्थकों को हिंसा के लिए उकसाया, Video वायरल

TMC नेता फिरहाद हाकिम का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। इसमें वह बीजेपी और केंद्रीय सुरक्षा बलों को 'सुअर' बता रहे हैं।

रेमडेसिविर खेप को लेकर महाराष्ट्र के FDA मंत्री ने किया उद्धव सरकार को शर्मिंदा, कहा- ‘हमने दी थी बीजेपी को परमीशन’

महाविकास अघाड़ी को और शर्मिंदा करते हुए राजेंद्र शिंगणे ने पुष्टि की कि ये इंजेक्शन किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। उन्हें भाजपा नेताओं ने भी इसके बारे में आश्वासन दिया था।

हाँ, हम मंदिर के लिए लड़े… क्योंकि वहाँ लाउडस्पीकर से ऐलान कर भीड़ नहीं बुलाई जाती, पेट्रोल बम नहीं बाँधे जाते

हिंदुओं को तीन बातें याद रखनी चाहिए, और जो भी ये मंदिर-अस्पताल की घटिया बाइनरी दे, उसके मुँह पर मार फेंकनी चाहिए।

‘मई में दिखेगा कोरोना का सबसे भयंकर रूप’: IIT कानपुर की स्टडी में दावा- दूसरी लहर कुम्भ और रैलियों से नहीं

प्रोफेसर मणिन्द्र और उनकी टीम ने पूरे देश के डेटा का अध्ययन किया। अलग-अलग राज्यों में मिलने वाले कोरोना के साप्ताहिक आँकड़ों को भी परखा।

‘भारत में कोरोना के डबल म्यूटेशन ने दुनिया को चिंता में डाला’: मीडिया द्वारा बनाए जा रहे ‘डर के माहौल’ का FactCheck

'ब्लूमबर्ग' की रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत के इस डबल म्यूटेशन ने दुनिया को चिंता में डाल दिया है। जानिए क्या है इसके पीछे की सच्चाई।

नासिर ने बीड़ी सुलगाने के लिए माचिस जलाई, जलती तीली से लाइब्रेरी में आगः 3000 भगवद्गीता समेत 11 हजार पुस्तकें राख

कर्नाटक के मैसूर की एक लाइब्रेरी में आग लगने से 3000 भगवद्गीता समेत 11 हजार पुस्तकें राख हो गई थी। पुलिस ने सैयद नासिर को गिरफ्तार किया है।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,985FansLike
82,390FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe