“Commitment is an act, not a word.” दार्शनिक जाँ-पॉल सार्त्र का यह कथन केवल जीवन पर ही नहीं, खेल पर भी उतना ही सटीक बैठता है। विश्व कप जैसे मंच पर इरादे नहीं, प्रदर्शन मायने रखता है। बीती रात और आज सुबह खेले गए ग्रुप चरण के मुकाबलों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि फुटबॉल में कोई भी टीम केवल नाम के दम पर नहीं जीतती। हर मिनट, हर पास और हर गोल अपनी कहानी लिखता है।
फिलाडेल्फिया में कुराकाओ की टीम का मुकाबला आइवरी कोस्ट से था। कुराकाओ ने शुरुआती बढ़त लेने के कई प्रयास किए, लेकिन उसके सभी हमले नाकाम रहे। कभी आर्सेनल के लिए खेल चुके स्टार खिलाड़ी निकोलास पेपे ने सातवें मिनट में गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई और दूसरे हाफ में एक और गोल दागते हुए जीत पर मुहर लगा दी। तीन मैचों में नौ गोल खाने और लगातार दो हार झेलने के बाद कुराकाओ का विश्व कप सफर यहीं समाप्त हो गया।
इसके बाद न्यू जर्सी के स्टेडियम में ग्रुप ई का सबसे बड़ा मुकाबला खेला गया, जहां जर्मनी का सामना इक्वाडोर से था। मैच की शुरुआत तेज रही। युवा फ्लोरियन विर्ट्ज़ ने लीरोए साने को शानदार पास दिया और साने ने उसे गोल में बदलकर जर्मनी को बढ़त दिला दी। इस गोल को लेकर विवाद भी हुआ क्योंकि इक्वाडोर का मानना था कि बिल्ड-अप में फाउल हुआ था, लेकिन VAR ने गोल को बरकरार रखा।
इक्वाडोर ने हालांकि संयम नहीं खोया। सात मिनट बाद ही नील्सन अंगुलो ने गोल कर स्कोर 1-1 कर दिया। दूसरे हाफ में दोनों टीमों के बीच संघर्ष जारी रहा, लेकिन 77वें मिनट में गोंजालो प्लाटा ने शानदार गोल दागकर जर्मनी को स्तब्ध कर दिया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ इक्वाडोर ने लगभग दो दशक बाद विश्व कप के नॉकआउट चरण में जगह बनाई। पीली जर्सी पहने समर्थकों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
ग्रुप एफ में कन्सास सिटी में नीदरलैंड का सामना ट्यूनीशिया से हुआ। ट्यूनीशिया इस टूर्नामेंट में अब तक संघर्ष करती नजर आई थी और इस मुकाबले में भी शुरुआती दस मिनट के भीतर ही नीदरलैंड ने 2-0 की बढ़त बना ली। ब्रायन ब्रॉबी ने एक बार फिर गोल किया। दूसरे हाफ में मस्तौरी ने ट्यूनीशिया के लिए एक गोल कर उम्मीदें जगाईं, लेकिन हाल ही में टॉटनहैम से जुड़े डिफेंडर वान हेके ने 62वें मिनट में गोल कर नीदरलैंड की 3-1 की जीत सुनिश्चित कर दी। टीम ऑरांजे ने शानदार प्रदर्शन के साथ अगले दौर में अपनी जगह पक्की कर ली।
इसी ग्रुप के दूसरे मुकाबले में डलास में जापान और स्वीडन आमने-सामने थे। जापान ने 3-4-3 जबकि स्वीडन ने 3-4-1-2 फॉर्मेशन के साथ शुरुआत की। दोनों टीमें लगातार आक्रमण करती रहीं।
56वें मिनट में रित्सु दोआन के पास पर दाएज़ेन माएदा ने शानदार फिनिश करते हुए जापान को बढ़त दिलाई। लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर कायम नहीं रह सकी। छह मिनट बाद विक्टर ग्योकेरेज़ के पास पर एंथनी इलांगा ने बेहतरीन लेफ्ट फुटेड कर्लर लगाकर स्कोर 1-1 कर दिया। जापान को जीत के कई मौके मिले, लेकिन स्वीडिश गोलकीपर ने शानदार बचाव करते हुए उन्हें गोल से दूर रखा। मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ। जापान एक जीत और दो ड्रॉ के साथ ग्रुप में दूसरे स्थान पर रहते हुए अगले दौर में पहुंच गया, जबकि 48 टीमों वाले इस विश्व कप प्रारूप में सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों में शामिल होने के कारण स्वीडन ने भी नॉकआउट चरण का टिकट हासिल कर लिया। अगले दौर में समुराई ब्लूज़ का सामना ब्राज़ील से होगा।
इसके बाद ग्रुप डी के मुकाबले खेले गए। लॉस एंजिलिस में पहले ही अगले दौर में पहुंच चुकी अमेरिकी टीम ने तुर्किये के खिलाफ अपनी शुरुआती एकादश में नौ बदलाव किए। इसके बावजूद तीसरे मिनट में क्रिस्टोफर ट्रस्टी के गोल से अमेरिका ने बढ़त बना ली। हालांकि अर्दा गुलेर ने दसवें मिनट में बराबरी दिलाई और यिल्माज़ ने तुर्किये को आगे कर दिया।
दूसरे हाफ की शुरुआत में सेबास्टियन बेर्हाल्टर ने अमेरिका के लिए स्कोर 2-2 कर दिया। मुकाबला ड्रॉ की ओर बढ़ता दिख रहा था, लेकिन इंजुरी टाइम के 90+8वें मिनट में कान अयहान ने गोल दागकर तुर्किये को 3-2 की यादगार जीत दिला दी।
इसी समय सैन फ्रांसिस्को में ऑस्ट्रेलिया और पैराग्वे के बीच मुकाबला खेला गया। दोनों टीमें पूरे मैच में गोल नहीं कर सकीं और मुकाबला 0-0 से समाप्त हुआ। इस परिणाम के साथ कंगारू टीम ग्रुप डी में दूसरे स्थान पर रहते हुए अगले दौर के लिए क्वालिफाई करने में सफल रही।
अब नजरें अगले मुकाबलों पर हैं। भारतीय समयानुसार आज रात ग्रुप आई में नॉर्वे और फ्रांस आमने-सामने होंगे, जबकि इराक का सामना सेनेगल से होगा। इसके बाद ग्रुप एच में काबो वर्दे और सऊदी अरब के बीच मुकाबला खेला जाएगा, वहीं स्पेन और उरुग्वे की टक्कर भी खास आकर्षण का केंद्र रहेगी। सुबह ग्रुप जी में बेल्जियम, न्यूज़ीलैंड, मिस्र और ईरान की टीमें मैदान पर उतरेंगी, जहां नॉकआउट की आखिरी तस्वीर काफी हद तक साफ होती नजर आएगी।
विश्व कप का ग्रुप चरण अब अपने निर्णायक मोड़ पर है। यहां हर मैच केवल तीन अंकों की लड़ाई नहीं, बल्कि उम्मीदों, दबाव और इतिहास के बीच लिखा जाने वाला एक नया अध्याय है। कुछ टीमें अपने सपनों को आगे बढ़ा रही हैं, तो कुछ का सफर यहीं थम रहा है। यही फुटबॉल की सबसे बड़ी खूबसूरती है, यह आखिरी सीटी बजने तक किसी कहानी का अंत तय नहीं होने देता। अगले मुकाबलों में कौन इतिहास रचेगा और किसका सपना टूटेगा, इसकी कहानी भी हम आपके लिए लेकर आएंगे।


