Friday, April 16, 2021
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नहीं महसूस किया कोई भेदभाव, मिले बराबर अवसर: IAF की आपत्ति के बाद गुंजन सक्सेना ने भी बयाँ किया अनुभव

"हाँ, कमर्शियल फिल्म के रूप में या फिक्शन के रूप में, फिल्म ने मेरी कहानी को दिखाने की कोशिश की है। लेकिन जो बात किसी भी संदेह से परे है वो ये कि मेरे लिए दरवाजों खोले गए और कई अवसर दिए गए। और ये चीज फिल्म में भी दिखाई गई है।"

नेटफ्लिक्स (Netflix) की फिल्म ‘गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल’ में अनुचित नकारात्मक चित्रण पर IAF की आपत्ति के बाद गुंजन सक्सेना ने अपने वास्तविक अनुभवों पर बयान जारी किया है। 

उन्होंने अपनी बात रखते हुए यह स्पष्ट किया कि उनके साथ उनके वरिष्ठों ने, साथियों ने और कमांडिंग ऑफिसर्स ने किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया। उन लोगों ने तो हर प्रकार से उनका सहयोग किया

IANS से बात करते हुए सक्सेना ने भारतीय वायु सेना की संस्कृति के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि IAF के प्रशिक्षण और मजबूत नीतियों ने ही उन्हें असाधारण रूप से साहसी उपलब्धियाँ हासिल करने के लिए साहस प्रदान किया।

उन्होंने बताया कि भारतीय सशस्त्र बल की सभी शाखाओं की सभी महिला अधिकारी जिन्होंने संगठन में रहकर देश की सेवा की है या कर रही हैं, वह सभी वायुसेना के मजबूत मूल्यों और समृद्ध सांस्कृतिक लोकाचार से प्रेरित हैं।

साल1994 में प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करके IAF से जुड़ने वाली सक्सेना बताती हैं, “हाँ, कमर्शियल फिल्म के रूप में या फिक्शन के रूप में, फिल्म ने मेरी कहानी को दिखाने की कोशिश की है। लेकिन जो बात किसी भी संदेह से परे है वो ये कि मेरे लिए दरवाजों खोले गए और कई अवसर दिए गए। और ये चीज फिल्म में भी दिखाई गई है।”

सक्सेना का यह भी कहना है कि भारतीय वायुसेना में रहते हुए उन्होंने कोई भेदभाव का सामना नहीं किया। उन्हें और अन्य अधिकारियों को बराबर अवसर दिए गए। उन्होंने इस बात पर भी गौर करवाया कि भारतीय वायु सेना में महिला अधिकारियों की बढ़ती दर संगठन की समतावादी नीतियों की प्रमाण हैं।

भारतीय वायुसेना में जाने के बाद शुरुआती सालों में जब उनसे लैंगिक भेदभाव पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “IAF भारत की एक बेहद सम्मानित संस्था है। वह आप में बदलाव लाने के बारे में प्रगतिशील और सकारात्मक है।”

गौरतलब है कि गुंजन सक्सेना के जीवन व संघर्षों पर आधारित फिल्म में नकारात्मक चित्रण पर एयरफोर्स ने आपत्ति जताई थी। इंडियन एयर फोर्स ने सेंसर बोर्ड को लिखे अपने पत्र में बातें साफ-साफ समझाई थी। IAF ने कहा था, “नेटफ्लिक्स और धर्मा प्रोडक्शंस ने भारतीय वायु सेना का प्रतिनिधित्व प्रामाणिकता के साथ करने की सहमति व्यक्त की थी ताकि यह फिल्म अगली पीढ़ी को वायु सेना में ज्वाइन करने के लिए प्रेरित करने में मदद करती।”

IAF के अनुसार जब फिल्म का ट्रेलर हाल ही में जारी किया गया, तो यह देखा गया कि इसमें भारतीय वायुसेना को अनुचित ढंग से दिखाया गया है। गुंजन सक्सेना मतलब श्रीदेवी की बेटी जाह्णवी कपूर (बॉलीवुड में नेपोटिजम) के स्क्रीन कैरेक्टर को महिमामंडित करने के लिए फिल्म में जबरन ऐसी परिस्थितियाँ प्रस्तुत की गईं, जो वायु सेना की कार्य संस्कृति के विपरीत है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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