Tuesday, August 3, 2021
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पाक से आए हिंदू ने बेटी का नाम रखा ‘नागरिकता’, पिता ने कहा – भारत की बेटी हुई है

ज्यादातर शरणार्थियों का कहना है कि पाकिस्तान में अपना घर छोड़ने का फैसला इनके लिए आसान नहीं था। लेकिन उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था। धार्मिक उन्माद के कारण इन पाकिस्तानी हिंदुओं को अपना देश छोड़ना पड़ा।

लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पास होने के बाद दिल्ली के मजनू का टीला में पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थी बेहद खुश हैं और ये लोग बिल पास होने की खबर सुनते ही नाचने गाने लगे। उन्हें उम्मीद है कि लंबे संघर्ष के बाद उन्हें भारत की नागरिकता मिल जाएगी। हिंदू शरणार्थियों ने नाच-गाकर और ढोल बजाकर जश्न मनाया। पाक से आए ये हिंदू शरणार्थी इतने खुश हुए कि 7 साल से शरण लेकर भारत में रह रहे एक हिंदू शरणार्थी ने सोमवार (दिसंबर 9, 2019) को जन्मी बेटी का नाम ही ‘नागरिकता’ रख दिया। बच्ची के पिता ने कहा- भारत की बेटी हुई है।

हिन्दू शरणार्थी ने बच्ची का नाम ‘नागरिकता’ रखा है

बेटी की माँ आरती ने कहा, “नागरिकता मिलने से आजादी मिल जाएगी। हम कुछ अच्छा व्यवसाय कर सकते हैं। सात साल के बाद आज वह दिन आया जिसका हमें इंतजार था।” बच्ची के पिता ने कहा कि उन्हें इस बिल से बहुत खुशी हो रही है, इसलिए उन्होंने अपनी बेटी का नाम नागरिकता रखा है। परिजनों ने कहा कि सभी पार्टियों से निवेदन है कि वे इस बिल का विरोध न करें। उनका कहना है कि अब उन्हें आसानी से नागरिकता मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि वह भारत में 7 साल से रह रहे हैं।

दिल्ली के मजनू का टीला में पाकिस्तान से आकर रहने वाले हिंदू शरणार्थी पड़ोसी मुल्क से इस कदर सताए गए हैं कि वो खुद को पाकिस्तानी कहलवाना तक पसंद नहीं करते। वो खुद को हिंदुस्तानी कहते हैं। नागरिकता की माँ आरती से जब पूछा जाता है कि पाकिस्तान में रहने के दौरान उन्हें किस प्रकार की समस्याओं और परिस्थितियों का सामना करना पड़ा तो उन्होंने कहा कि उन्हें वहाँ पर कोई इज्जत नहीं मिलती थी। प्यास लगने पर उनके ग्लास में पानी नहीं दिया जाता था। वहाँ हिंदुओं का कोई इज्जत नहीं है। वो लोग चाहते हैं कि वहाँ पर सिर्फ मजहब विशेष वाले रहें। उन्होंने कहा कि भारत में वो पूरे इज्जत के साथ आराम से रह रहे हैं।

नागरिकता की दादी ने भी इस बात पर अपनी सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि यहाँ पर वो अपनेपन से रह रही हैं, जबकि वहाँ पर उनके साथ भेद-भाव हो रहा था। वहीं जब उनसे यह पूछा जाता है कि क्या पाकिस्तान में हिंदू लड़कियाँ सुरक्षित नहीं है, तो उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि वहाँ पर वो बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है और ये बात कहते हुए अब काफी समय हो गया है। वो इससे तंग आ चुके हैं। वो बताती हैं कि वो लेग वैध वीजा लेकर भारत आए थे और समय-समय पर उसे रीन्यू भी करवाते रहते हैं।

इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि नागरिकता बिल को लेकर वो क्या कहना चाहती हैं तो नागरिकता की दादी कहती हैं, “उसके लिए तो हमारी पोती ही काफी है। हम इतने खुश हो गए कि इसका नाम ही ‘नागरिकता’ रख दिया। किसी ने भी आज तक अपनी बच्ची का नाम नागरिकता नहीं रखा होगा। हमने पहले ही नागरिकता को हाथ में पकड़ लिया है और हमें उम्मीद है कि इसके आने के साथ ही हमें नागरिकता मिलेगी ही मिलेगी।” इसके साथ ही नागरिकता की दादी ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे का नाम ‘भारत’ रखा था, तभी से उनके मन में था कि एक दिन वो भारत जरूर जाएँगी। उन्होंने अपनी बेटी का नाम ‘भारती’ रखा और अब अपनी पोती का नाम ‘नागरिकता’ रखा है।

वहाँ पर रह रहे एक अन्य हिन्दू शरणार्थी से जब पूछा गया कि पाकिस्तान में रहने के दौरान उन्हें किन जुल्मों-सितम का सामना करना पड़ा तो उन्होंने काफी भावुक होते हुए कहा कि पाकिस्तान के अंदर हिंदू होना गुनाह है, क्योंकि वहाँ हिंदुत्व की कोई अहमियत ही नहीं है। यहाँ हिन्दुस्तान में हिन्दू-मु##म-सिख-ईसाई सारे भाई-भाई है। भारत ही वो जगह है, जहाँ हम हिन्दू सुरक्षित हैं, इसलिए वो पाकिस्तान से भारत में रहने आए हैं। उन्होंने सभी पार्टियों से निवेदन किया है कि राज्यसभा में इस बिल का समर्थन करें ताकि उनका और उनके बच्चों का भविष्य संवर सके।

पाकिस्तान से आए इन हिंदुओं को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें भारत की नागरिकता मिल जाएगी और उनकी शरणार्थी पहचान खत्म हो जाएगी। इनमें से ज्यादातर शरणार्थियों का कहना है कि पाकिस्तान में अपना घर छोड़ने का फैसला इनके लिए आसान नहीं था। लेकिन उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था। धार्मिक उन्माद के कारण इन पाकिस्तानी हिंदुओं को अपना देश छोड़ना पड़ा।

बता दें कि नागरिकता संशोधन बिल में प्रावधान है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिन्दू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध एवं पारसी समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है। बिल के जरिए मौजूदा कानूनों में संशोधन किया जाएगा, ताकि चुनिंदा वर्गों के नागरिकता दी जा सके। राज्यसभा में विधेयक पास होने पर यह कानून बन जाएगा।

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रवि अग्रहरि
अपने बारे में का बताएँ गुरु, बस बनारसी हूँ, इसी में महादेव की कृपा है! बाकी राजनीति, कला, इतिहास, संस्कृति, फ़िल्म, मनोविज्ञान से लेकर ज्ञान-विज्ञान की किसी भी नामचीन परम्परा का विशेषज्ञ नहीं हूँ!

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