Homeदेश-समाजरमजान के महीने में हलीम को लेकर फिर भिड़े रोजाधारी, मारपीट की Video आई...

रमजान के महीने में हलीम को लेकर फिर भिड़े रोजाधारी, मारपीट की Video आई सामने: 1 महीने में हैदराबाद से दूसरा मामला

बताया जा रहा है कि वीडियो में नजर आ रहा झगड़ा पैसे के लेनी-देनी पर शुरू हुआ। कथिततौर पर हलीम लेने के बाद ग्राहक ने पैसे नहीं चुकाए इसलिए रेस्टोरेंट मालिक भड़क गया। वहीं ग्राहक का कहना था कि वो पैसे दे चुका है।

रमजान के महीने में हैदराबाद में एक बार फिर हलीम के लिए हंगामा खड़ा हो गया। इस बार घटना मुर्शिदाबाद की है। सामने आई वीडियो में सड़क पर इकट्ठा भीड़ के बीच कुछ लोगों को लड़ाई करते देखा जा सकता है। वीडियो जगह-जगह वायरल है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, झगड़ा पैसे के लेनी-देनी पर शुरू हुआ। कथिततौर पर हलीम लेने के बाद ग्राहक ने पैसे नहीं चुकाए इसलिए रेस्टोरेंट मालिक भड़क गया। वहीं ग्राहक का कहना था कि वो पैसे दे चुका है। वीडियो में चलती सड़क पर कुछ टोपी पहने लोगों को एक दूसरे को मारते देखा जा सकता है।

बता दें कि रमजान के महीने में हैदराबाद से आई ये दूसरी घटना है जहाँ हलीम के लिए मारा-मारी देखी गई। इससे पहले मालकपेट शहर में एक होटल के बाहर बुरी तरह भीड़ हलीम के लिए लड़ाई लड़ते देखी गई थी।

वीडियो में दिख रहा था कि लोग एक दूसरे से धक्का-मुक्की कर रहे थे। बिगड़ते हालातों को देखते हुए पुलिस ने आकर स्थिति को संभाला तो लेकिन ये बेहद मुश्किल काम था। होटल/रेस्टोरेंट के बाहर फ्री हलीम के इंतजार में खड़ा कोई व्यक्ति वहाँ से हटने को तैयार नहीं था। ऐसे में पुलिस को लाठी चार्ज का भी सहारा लेना पड़ा।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -