Wednesday, May 22, 2024
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‘छपाक’ की रियल स्टोरी: 15 साल की लक्ष्मी ने शादी से इनकार किया तो 32 साल के नईम ने तेजाब फेंका

आज लक्ष्मी और आलोक दीक्षित की एक बेटी है। उसका नाम पीहू है। लक्ष्मी की दृढ़इच्छा शक्ति के ही कारण अब एसिड अटैक सर्वाइवर को राइट ऑफ पर्सन विथ डिसेबिलीटी एक्ट, 2016 के तहत कानूनी अधिकार दिए जाते हैं।

दीपिका पादुकोण की हालिया फिल्म ‘छपाक’ 10 जनवरी को रिलीज होगी। ये फिल्म एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल के जीवन से प्रेरित है। लक्ष्मी अग्रवाल कौन हैं? क्यों फिल्म की निर्देशक मेघना गुलजार ने फिल्म बनाने के लिए उनकी कहानी चुनी?

मध्यम वर्गीय परिवार से आने वाली लक्ष्मी का जन्म 1 जून 1990 को हुआ था। लक्ष्मी बचपन से ही गायक बनने के सपने देखती थीं। लेकिन, 15 साल की उम्र में उनके जीवन में एक अजीब मोड़ आया, जब 32 वर्षीय नईम की नजर लक्ष्मी पर पड़ी। नईम ने लक्ष्मी से शादी करने की इच्छा जताई। जवाब ‘न’ में मिला। इसके बाद उसने पूरे 10 महीने तक लगातार लक्ष्मी का पीछा किया। वह स्कूल जाती तो नईम रास्ते में उनका इंतजार करता। मन होने पर थप्पड़ मार देता, फब्तियाँ कसता…। शायद वह जानता था कि लक्ष्मी चाहकर भी उसकी बद्तमी़जियों के बारे में घर में नहीं बताएगी। क्योंकि, अगर उसने ऐसा किया तो नईम को कुछ कहने से पहले घर वाले लक्ष्मी का स्कूल जाना छुड़वा देते। उसके सपनों को समय से पहले मार दिया जाता। यह सोच वह अपने परिवार वालों के आगे चुप रही।

एक दिन लक्ष्मी को खान मार्केट जाते हुए नईम का फोन आया और उसने लक्ष्मी से पूछा कि तुम तो जिंदगी में कुछ करना चाहती हो, आगे बढ़ना चाहती, पढ़ना चाहती हो… है न? लक्ष्मी ने इस बार बड़ी सहजता से जवाब ‘हाँ’ में दिया और इसके बाद नईम ने कॉल काट दी। अगले दिन खान मार्केट जाने के रास्ते में लक्ष्मी को नईम और नईम के भाई की गर्लफ्रेंड इंतजार करते मिले। लेकिन, जब उन्हें देखकर लक्ष्मी ने रास्ता बदलने की कोशिश की तो वे उसका पीछा करने लगे। थोड़ी देर में रोड क्रॉस करते हुए वह लड़की उसका रास्ता घेर लेती है और नईम उस पर एसिड डाल देता है।

इस घटना के बाद लक्ष्मी वहीं सड़क पर पड़ी रही। एक टैक्सी ड्राइवर ने उसकी हालत देख गाड़ी रोकी और उसे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवाया। लक्ष्मी कई महीनों तक अस्पताल में रही और कई सर्जरी हुई। इसके कारण कई महीनों तक वह अपना चेहरा नहीं देख पाई। परिवारवालों ने घर से शीशा फ्रेम हटा दिया था। लेकिन, एक दिन जब उसने शीशे में अपना चेहरा देखा तो डर गईं। आँख, नाक सब गायब हो चुके थे।

एसिड से झुलसने से भी ज्यादा पीड़ा लक्ष्मी को समाज का अपने प्रति रवैया देख हुई। मात्र 16 साल की उम्र में लक्ष्मी आत्महत्या करने की सोचने लगी। लेकिन कहते हैं न मुश्किल घड़ी ज्यादा समय तक नहीं टिकती। साल 2006 में उन्होंने भारत में एसिड बैन को लेकर पीआईएल डाली। केस लंबा चला, लेकिन कई लोगों के सहयोग से वे साल 2013 में इसे जीतने में सफल हुईं। इस जीत के बाद लक्ष्मी ने एसिड अटैक के ख़िलाफ़ कई मंचों से जागरूकता फैलाने का काम किया। लक्ष्मी का आज भी मानना है कि एसिड अटैक के ख़िलाफ़ अब भी बहुत कुछ करना बाकी है।

साल 2014 में 28 वर्षीय लक्ष्मी को इंटरनेशनल वूमेन ऑफ करेज से यूएस के पूर्व प्रेसिडेंट बराक ओबामा की पत्नी मिशैल ओबामा द्वारा नवाजा गया। इस अवार्ड से पहले वो साल 2013 में आलोक दीक्षित और आशीष शुक्ला के अभियान स्टॉप एसिड अटैक से जुड़ चुकी थी। वर्तमान में इसे छाँव फाउंडेशन के नाम से जाना जाता है।

आज लक्ष्मी और आलोक दीक्षित की एक बेटी है। उसका नाम पीहू है। लक्ष्मी की दृढ़इच्छा शक्ति के ही कारण अब एसिड अटैक सर्वाइवर को राइट ऑफ पर्सन विथ डिसेबिलीटी एक्ट, 2016 के तहत कानूनी अधिकार दिए जाते हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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