Thursday, August 13, 2020
Home विविध विषय अन्य 'मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं' - मुसलमान महिला मंत्री की तब की बात... और अब संविधान...

‘मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं’ – मुसलमान महिला मंत्री की तब की बात… और अब संविधान के रास्ते मजहबी कट्टरता!

नजमा हेपतुल्ला ने मुसलमानों के अल्पसंख्यक दर्ज़े को लेकर बयान दिया था कि यह मुस्लिम मामलों का मंत्रालय नहीं बल्कि यह अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय है। नजमा हेपतुल्ला ने जोर देते हुए कहा था कि मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं।

आजादी के बाद से ही भारत में मुस्लिम और कथित बुद्धिजिवी अक्सर अल्पसंख्यकों के अधिकारों का रोना रोते रहे हैं। हालाँकि, संविधान कभी धार्मिक आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव की इजाजत नहीं देता। संविधान की प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्ष शब्द जोड़े जाने के बाद तो किसी के धार्मिक अधिकारों पर चर्चा होनी ही नहीं चाहिए, लेकिन फिर भी यह समय-समय पर चर्चा का विषय बन ही जाता है।

संविधान में अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को विधि के समक्ष समता का आश्वासन देता है। लेकिन हम यह देखते आए हैं कि विधि की समता के सामने हर समय कई प्रकार के धार्मिक दुराग्रह खड़े हो जाते हैं। सवाल मुस्लिमों की अल्पसंख्यक बने रहने में रूचि को लेकर है। इसका एक कारण कॉन्ग्रेस और वामपंथियों की तुष्टिकरण की नीति रही है। साथ ही अल्पसंख्यक बने रहने में वास्तविक मारा-मारी पीड़ित और शोषित के भाव की है। किसी देश में अल्पसंख्यक होना, उस देश की कृपा और मेहरबानी पर आश्रित होने जैसा भाव देता है। बावजूद इसके भारत में अल्पसंख्यक होना एक अवसर माना जाता रहा है।

पहला सवाल तो देश के मुस्लिमों को खुद से ही करना चाहिए कि क्या वो संविधान लिखे जाने के इतने वर्ष बाद भी स्वयं को संविधान की शर्तों से मंजूर मानते हैं? आज़ादी माँगने वाले मुस्लिम क्या 21वीं सदी के आज़ादी के विचारों से सहमत हैं? हाल ही में नागरिकता संशोधन कानून के बहाने शाहीन बाग़ में जो कुछ चल रहा है, वह किसी से भी छुपा नहीं है।

जब धर्मनिरपेक्षता को संविधान का मौलिक हिस्सा माना गया, तब सुप्रीम कोर्ट ने ये तय किया कि संसद इसे किसी भी तरह से कमजोर करने में सक्षम नहीं है, बल्कि इसे मजबूत बनाने के लिए जरूरी कदम उठा सकती है। लेकिन धर्मनिरपेक्षता शब्द के बावजूद भी भारत का मुसलमान आज भी मुख्यधारा से जुड़ने में इतना असहज क्यों रहता है? इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि भारत का मुसलमान आज भी कई आधारभूत क्षेत्रों में अन्य धर्म के लोगों की तुलना में पिछड़े हुए हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार आदि ऐसे उदाहरण हैं, जिसमें मुसलमान आज भी समय से बहुत पीछे खड़ा है।

जब तक स्वयं मुस्लिम अपनी मजहबी कट्टरता के आवरण को नहीं त्याग देते, तब तक इस समाज के पुनर्जागरण की उम्मीद करनी फिजूल है। मुस्लिम समाज को खुद अपनी बुनियादी बदलावों के लिए लक्ष्य बनाने होंगे और समय सीमा तय करनी होगी। इसका सबसे ताजा और सटीक उदाहरण तीन तलाक का गैर कानूनी होना है। सरकार को इस कानून को पारित करने के लिए एक बड़े वोट बैंक से खिलाफत का जोखिम उठाना पड़ा। हाल ही में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने नागरिकता संशोधन कानून को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि यह उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।

मुस्लिमों के पिछड़ेपन में सबसे बड़ा हाथ अगर धार्मिक कट्टरता के बाद किसी का रहा है तो वो कॉन्ग्रेस जैसे विपक्षी दल ही हैं। नागरिकता संशोधन कानून, यानी CAA और NRC ने एक नई बहस को भी छेड़ दिया है। यह बहस है पूरे देशभर में संविधान के ही भाग-4, अनुच्छेद- 44 (DPSP) में वर्णित यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने की बात। इसमें संविधान निर्माताओं द्वारा नीति-निर्देश दिया गया है कि समान नागरिक कानून (UCC) लागू करना हमारा लक्ष्य होगा।

लेकिन भारत जैसी विविधता वाले देश में UCC को लागू करना कितना आसान हो सकता है? महज तीन तलाक को ही गैर कानूनी घोषित करने पर कई तरह के फतवे और विरोध देखने को मिले। मुस्लिमों के ‘नए राजनीतिक धर्म गुरु’ और AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी जैसे पढ़े-लिखे लोग भी यह कहते हुए देखे गए कि तीन तलाक उनके धर्म का विषय है और सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

अब, जबकि समाज और सभ्यता, दोनों ही राजनीति और धर्म से बाहर आना चाह रही है, ऐसे में अगर धार्मिक अधिकार ही आपके मूल अधिकारों पर भारी पड़ जाए तो आप किसे चुनेंगे? सत्य अपाच्य जरूर है, लेकिन मुस्लिम आज भी खुद को अल्पसंख्यक कहकर अलग किस्म के नशे में मशगूल है। लेकिन बहुत ही कम लोग इस बात से वाकिफ़ हैं कि अल्पसंख्यक होने का मतलब मुस्लिम होने से नहीं है।

वर्ष 2014 में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय का प्रभार संभालने के तुरंत बाद नजमा हेपतुल्ला ने मुसलमानों के अल्पसंख्यक दर्ज़े को लेकर बयान दिया था कि यह मुस्लिम मामलों का मंत्रालय नहीं बल्कि यह अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय है। नजमा हेपतुल्ला ने जोर देते हुए कहा था कि मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं।

इस बयान के पीछे देश में परम्परागत चली आ रही ‘हिन्दू बहुसंख्यक बनाम मुस्लिम अल्पसंख्यक’ चर्चा की पोल खुल जाती है। जबकि वास्तविकता यह है कि भारत के संविधान में अल्पसंख्यक वर्ग की परिकल्पना एक खुली श्रेणी के रूप में धार्मिक, भाषाई और सांस्कृतिक रूप से विशिष्ट विभिन्न वर्गों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से की गई है। इसलिए स्पष्ट है कि भारत के संविधान में एक स्थाई अल्पसंख्यक वर्ग के रूप में सिर्फ मुसलमानों के होने की ही संभावना शून्य है। संविधान में ‘धार्मिक अल्पसंख्यक’ भी कोई नहीं है।

क्या बदला जा सकता है संविधान? लोकतंत्र की मर्यादा पुनर्स्थापित करने वाला केस

शाहीन बाग की इन औरतों का हंगामा और संविधान देने वाली उन 15 महिलाओं का हासिल

26 जनवरी 1990: संविधान की रोशनी में डूब गया इस्लामिक आतंकवाद, भारत को जीतना ही था

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

टैक्स रिफॉर्म्स के लिए ‘विवाद से विश्वास’: खुलासा करने पर 70% तक की छूट, आयकर में पारदर्शिता

आयकर विभाग के काम में दक्षता और पारदर्शिता लाने के लिए केंद्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड की ओर से कई पहल की गई है। विभाग की ओर से...

मणिपुर का शेर बीर टिकेंद्रजीत सिंह: अंग्रेजों ने जिन्हें कहा था ‘खतरनाक बाघ’, दी थी खुली जगह पर फाँसी

बीर टिकेंद्रजीत सिंह को 13 अगस्त 1891 को आम जनता के सामने एक खुली जगह पर फाँसी लगाई ताकि लोगों में डर पैदा किया जा सके।

ट्रांसपैरेंट टैक्सेशन – ऑनरिंग द ऑनेस्ट: PM मोदी ने लॉन्च किया प्लेटफॉर्म, ईमानदार टैक्सपेयर्स को प्रोत्साहन

PM मोदी ने ईमानदारी से कर चुकाने वालों के लिए 'ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन- ऑनरिंग द ऑनेस्ट' नामक एक प्लेटफॉर्म का शुभारंभ करके...

इंदिरा गाँधी बाबर की कब्र पर गईं, सिर झुकाया और बोलीं – ‘मैंने इतिहास को महसूस किया…’

वो बाबर के मकबरे की ओर चल दिए। वे मकबरे के सामने खड़ी हुईं और हल्का सा सिर झुकाया। बाद में वे बोलीं - "मैं इतिहास को महसूस कर रही थी।"

उतावले राजदीप ने चलाई प्रणब मुखर्जी की मौत की ‘ब्रेकिंग’ खबर, फिर फेक न्यूज बता कर ट्वीट किया डिलीट

राजदीप सरदेसाई ने आदतन उतावलेपन में प्रणब मुखर्जी की मौत की फेक न्यूज़ को 'ब्रेकिंग' बताते हुए अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर कर डाली।

…जब पुलिस वालों ने रोते हुए सीनियर ऑफिसर से माँगी गोली चलाने की इजाजत: बेंगलुरु दंगे का सच

वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ पुलिस वालों पर टूट पड़ती है। हालात भयावह हो जाने के बाद पुलिसकर्मियों ने...

प्रचलित ख़बरें

पैगम्बर मुहम्मद पर FB पोस्ट, दलित कॉन्ग्रेस MLA के घर पर हमला: 1000+ मुस्लिम भीड़, बेंगलुरु में दंगे व आगजनी

बेंगलुरु में 1000 से भी अधिक की मुस्लिम भीड़ ने स्थानीय विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर को घेर लिया और तोड़फोड़ शुरू कर दी।

गोधरा पर मुस्लिम भीड़ को क्लिन चिट, घुटनों को सेक्स में समेट वाजपेयी का मजाक: एक राहत इंदौरी यह भी

"रंग चेहरे का ज़र्द कैसा है, आईना गर्द-गर्द कैसा है, काम घुटनों से जब लिया ही नहीं...फिर ये घुटनों में दर्द कैसा है" - राहत इंदौरी ने यह...

पैगंबर मुहम्मद पर खबर, भड़के दंगे और 17 लोगों की मौत: घटना भारत की, जब दो मीडिया हाउस पर किया गया अटैक

वो 5 मौके, जब पैगंबर मुहम्मद के नाम पर इस्लामी कट्टरता का भयावह चेहरा देखने को मिला। मीडिया हाउस पर हमला भारत में हुआ था, लोग भूल गए होंगे!

दंगाइयों के संपत्ति से की जाएगी नुकसान की भरपाई: कर्नाटक के गृहमंत्री का ऐलान, तेजस्वी सूर्या ने योगी सरकार की तर्ज पर की थी...

बसवराज बोम्मई ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि सार्वजनिक संपत्ति और वाहनों को नुकसान की भरपाई क्षति पहुँचाने वाले दंगाइयों को करना होगा।

महेश भट्ट की ‘सड़क-2’ में किया जाएगा हिन्दुओं को बदनाम: आश्रम के साधु के ‘असली चेहरे’ को एक्सपोज करेगी आलिया

21 साल बाद निर्देशन में लौट रहे महेश भट्ट की फिल्म सड़क-2 में एक साधु को बुरा दिखाया जाएगा, आलिया द्वारा उसके 'काले कृत्यों' का खुलासा...

‘जल्दी अपलोड कर’ – बेंगलुरु में मुस्लिमों के मंदिर बचाने का ड्रामा अंत के 5 सेकंड में फुस्स, नए वीडियो से खुली पोल

राजदीप सरदेसाई ने भी मुसलमानों को 'मानव श्रृंखला' कहा। आगजनी करने वालों का कोई धर्म नहीं, मगर मंदिर के लिए मानव श्रृंखला बनाने वाले...

सड़क 2 ने ‘अंग्रेजों’ को भी पिछड़ा: 58 लाख से ज्यादा डिसलाइक, यूट्यूब पर ‘Top-10’ वीडियो में शामिल

'सड़क 2' के ट्रेलर को अब तक 5.8 मिलियन (58 लाख) से ज्यादा बार डिस्लाइक किया चुका है, जो कि अपने आप में बेहद ही खराब रिकॉर्ड...

संबित पात्रा पर टूट पड़े लिबरल्स: कॉन्ग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी की टीवी चैनल पर बहस के बाद हुई मौत को बनाया हथियार

कॉन्ग्रेस समर्थकों और लिबरल्स ने राजीव त्यागी की मृत्यु को हथियार बना कर संबित पात्रा के खिलाफ़ ज़हर उगलना शुरू कर दिया।

टैक्स रिफॉर्म्स के लिए ‘विवाद से विश्वास’: खुलासा करने पर 70% तक की छूट, आयकर में पारदर्शिता

आयकर विभाग के काम में दक्षता और पारदर्शिता लाने के लिए केंद्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड की ओर से कई पहल की गई है। विभाग की ओर से...

मणिपुर का शेर बीर टिकेंद्रजीत सिंह: अंग्रेजों ने जिन्हें कहा था ‘खतरनाक बाघ’, दी थी खुली जगह पर फाँसी

बीर टिकेंद्रजीत सिंह को 13 अगस्त 1891 को आम जनता के सामने एक खुली जगह पर फाँसी लगाई ताकि लोगों में डर पैदा किया जा सके।

बेंगलुरु दंगों पर कर्नाटक सरकार सख्त: न्यायिक जाँच का आदेश, पहले किया दंगाइयों से नुकसान वसूलने का ऐलान

बंगलुरु दंगों की न्यायिक जाँच होगी। CM बीएस येदुराप्पा, गृहमंत्री बसवराज बोम्मई और पुलिस अधिकारियों की बैठक में इस मामले से संबंधित...

ट्रांसपैरेंट टैक्सेशन – ऑनरिंग द ऑनेस्ट: PM मोदी ने लॉन्च किया प्लेटफॉर्म, ईमानदार टैक्सपेयर्स को प्रोत्साहन

PM मोदी ने ईमानदारी से कर चुकाने वालों के लिए 'ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन- ऑनरिंग द ऑनेस्ट' नामक एक प्लेटफॉर्म का शुभारंभ करके...

इंदिरा गाँधी बाबर की कब्र पर गईं, सिर झुकाया और बोलीं – ‘मैंने इतिहास को महसूस किया…’

वो बाबर के मकबरे की ओर चल दिए। वे मकबरे के सामने खड़ी हुईं और हल्का सा सिर झुकाया। बाद में वे बोलीं - "मैं इतिहास को महसूस कर रही थी।"

उतावले राजदीप ने चलाई प्रणब मुखर्जी की मौत की ‘ब्रेकिंग’ खबर, फिर फेक न्यूज बता कर ट्वीट किया डिलीट

राजदीप सरदेसाई ने आदतन उतावलेपन में प्रणब मुखर्जी की मौत की फेक न्यूज़ को 'ब्रेकिंग' बताते हुए अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर कर डाली।

…जब पुलिस वालों ने रोते हुए सीनियर ऑफिसर से माँगी गोली चलाने की इजाजत: बेंगलुरु दंगे का सच

वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ पुलिस वालों पर टूट पड़ती है। हालात भयावह हो जाने के बाद पुलिसकर्मियों ने...

CCTV कैमरों और स्ट्रीटलाइट्स को तोड़ा, फिर धारदार हथियार से थाने पर हमला: बेंगलुरु दंगे की पूरी प्लानिंग

70+ पुलिसकर्मियों को चोटें आईं। भीड़ ने उन पर धारदार हथियार भी फेंके। इनमें, 40 घायल पुलिस डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन के थे जबकि अन्य...

हमसे जुड़ें

246,500FansLike
64,745FollowersFollow
298,000SubscribersSubscribe
Advertisements