Sunday, April 14, 2024
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एयर ट्रैफिक कंट्रोल पर थीं संध्या और उनके पायलट पति उड़ा रहे थे AN-32: गायब विमान की मार्मिक कहानी

पारिवारिक सहमति से दोनों की शादी फरवरी 2018 में हुई, 2 साल भी नहीं हुए थे और संध्या को अपने जीवन में उस अँधकार का सामना करना पड़ा, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। ऐसे हालात से गुज़रना और फिर उससे उबरना कितना.....

भारतीय वायु सेना के लापता विमान AN-32 में सवार जवानों की कोई जानकारी न मिल पाने की वजह से उनके परिजनों के बीच तनाव का माहौल था। इन्हीं में एक नाम फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट आशीष तंवर का था, जिनकी पत्नी संध्या तंवर उस वक़्त असम के जोरहाट में IAF एयर ट्रैफिक कंट्रोल में ड्यूटी पर तैनात थीं। बता दें कि चीन से लगी सीमा के पास मेंचुका एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड के लिए इस विमान ने सोमवार (3 जून) को 12.25 बजे उड़ान भरी थी और 33 मिनट बाद ही विमान से सम्पर्क टूट गया था। यह सब पायलट की पत्नी संध्या की आँखों के सामने था, जो चाहकर भी कुछ करने की स्थिति में नहीं थीं। एक पत्नी के लिए यह मंज़र कितना पीड़ादायक रहा होगा, इसका तो केवल अंदाज़ा भर ही लगाया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश के मथुरा की रहने वाली संध्या ने पिछले साल ही जोरहाट में ड्यूटी ज्वॉइन की थी जहाँ आशीष भी अपनी ट्रेनिंग पूरी करने बाद पहुँचे थे। पारिवारिक सहमति से दोनों की शादी फरवरी 2018 में हुई, 2 साल भी नहीं हुए थे और संध्या को अपने जीवन में उस अँधकार का सामना करना पड़ा, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। ऐसे हालात से गुज़रना और फिर उससे उबरना कितना साहसिक काम होगा उसका जीता-जागता प्रमाण हैं फ्लाइट लेफ्टिनेंट आशीष की पत्नी। आँखों के सामने पति को खो देने के एहसास ने दिल और दिमाग पर जो गहरा असर छोड़ा होगा वो संध्या के लिए किसी सदमे के कम तो बिल्कुल नहीं होगा।

फ्लाइट लेफ्टिनेंट आशीष के चाचा उदयवीर सिंह ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उनकी पत्नी संध्या ने परिवार को इस बात की जानकारी दोपहर 1 बजे दी कि AN-32 विमान से सम्पर्क नहीं हो पा रहा है।

आशीष के चाचा ने बताया कि पहले तो उन्हें यह लग रहा था कि विमान चीनी सीमा पार चला गया हो और आपातकालीन लेंडिंग करने में क़ामयाब रहा हो, लेकिन जैसे-जैसे सर्च अभियान में कुछ हाथ नहीं लगा, उससे उनकी चिंता और बढ़ती गई। वहीं, आशीष के पिता का रो-रोकर बुरा हाल था, बावजूद इसके वो अपने बेटे का हाल जानने के लिए वो असम भी गए, जहाँ उन्होंने अधिकारियों से बात करके इस संबंध में अधिक जानकारी जुटाने की कोशिश की। आशीष की माँ की निगाहें बेटे की घर वापसी की आस लगाए बैठी थीं, जो अब कुछ बोलने की स्थिति में नहीं। एक माँ का इस क़दर चुप हो जाना उनके अपार दु:ख को प्रकट करने के लिए काफ़ी है।

आशीष के परिवार के अधिकांश सदस्य सेना में कार्यरत रहते हुए देश सेवा कर रहे हैं। आशीष हमेशा से देश सेवा में जाने का सपना देखते थे। उनकी पत्नी संध्या वायुसेना में रडार ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं। आशीष की बहन अंजुला तंवर भी वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर हैं। उनके पिता राधेलाल तथा ताऊ उदयवीर सेना से सूबेदार मेजर के पद से सेवानिवृत हैं। चाचा जयनारायण व कृपाल सिंह भी भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं। उनके ताऊ ने बताया कि आशीष के लापता होने के बाद से पूरा परिवार चिंता में है।

आशीष के परिजनों को हमेशा उन पर गर्व रहा, आज वो उनकी बातों को याद करते नहीं थकते। होश संभालते ही आशीष के मन में ‘राष्ट्र की सेवा का भाव’ जागृत हो गया था, इसके लिए उन्होंने भारतीय वायु सेना का रुख़ किया।

आशीष को याद करते हुए उनके चाचा शिव नारायण ने बताया कि एक बार आशीष से पूछा गया कि वो बड़ा होकर क्या बनेगा तो उसने जवाब दिया था कि, ‘फ़ौजी का बेटा फ़ौजी बनता है’। आशीष के इस जवाब में उनका वो सपना साफ़ नज़र आता था जिसे उन्होंने अपनी युवा अवस्था में पूरा कर दिखाया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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