1 लाख लोगों का जमा धन डबल: 100 साल पुराने राम नाम बैंक ने ग्राहकों को दिया स्पेशल बोनस

भगवान राम को समर्पित इस अनूठे बैंक में किसी भी तरह का कोई मौद्रिक लेन-देन नहीं होता है। इसके सदस्यों के पास 30 पृष्ठों की एक पुस्तिका होती है, जिसमें 108 सेल होते हैं। इनमें राम भक्त, 108 बार हर रोज़ लाल स्याही से राम का नाम लिखते हैं। इसके बाद यह पुस्तिका उसके खाते में जमा की जाती है।

राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद इलाहाबाद के राम नाम बैंक ने अपने ग्राहकों को स्पेशल बोनस देने का ऐलान किया है। इससे करीब 1 लाख खाता धारकों को फायदा हुआ है। खाते में जमा उनका धन डबल हो गया है।

करीब सौ साल पुराने इस बैंक की खासियत यह है कि इसका न कोई एटीएम है और न ही इस बैंक का कोई चेक बुक होता है। इस बैंक की मुद्रा भगवान राम है और खाते में लोग राम नाम लिखकर जमा करते हैं। साथ ही, बैंक ने ऐसे खाता धारकों के लिए विशेष पुरस्कार का ऐलान किया है जिन्होंने 9-10 नवंबर की मध्यरात्रि तक भगवान राम का नाम कम से कम 1.25 लाख बार लिखकर बैंक में जमा कर रखा हो। उल्लेखनीय है कि 9 नवंबर को ही अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया था।

इस बैंक का संचालन राम नाम सेवा संस्थान करता है। संस्था के अध्यक्ष आशुतोष वार्ष्णेय ने बताया कि बोनस का अर्थ है कि भक्तों द्वारा लिखित भगवान राम का नाम, चाहे वह हाथ से लिखा गया हो, विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए पृष्ठों पर टाइप किया गया हो या मोबाइल ऐप के माध्यम से लिखा गया हो, अब वह डबल माना जाएगा। सरल शब्दों में कहे तो यदि किसी भक्त ने एक बार राम का नाम लिखकर इस बैंक में जमा किया हो तो उसे दो माना जाएगा।

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उन्होंने कहा,

“अगर किसी भक्त ने ‘राम नाम’ एक बार लिखा है, तो इसे दो बार लिखा माना जाएगा। हालाँकि, पुरस्कार/ सम्मान के प्रयोजन के लिए न्यूनतम मानदंड 1.25 लाख निर्धारित किया गया है। जिन्होंने 9-10 नवंबर की आधी रात तक भगवान राम का नाम कम से कम 1.25 लाख बार लिखा था, उन्हें इस पुरस्कार के लिए योग्य माना जाएगा।”

आशुतोष वार्ष्णेय ने कहा, “राम नाम बैंक (एक ग़ैर-लाभकारी संगठन) द्वारा दी गई पुस्तिका में 30 पृष्ठ हैं, और प्रत्येक पृष्ठ में 108 सेल हैं, जहाँ भगवान राम का नाम लिखा जा सकता है। बोनस की घोषणा 10 नवंबर को की गई थी।” पुरस्कार के लिए चुने गए लोगों को 2020 के माघ मेले के दौरान इलाहाबाद के संगम क्षेत्र में आयोजित एक विशेष समारोह में राम नाम बैंक, एक शॉल और एक ‘श्रीफल’ के साथ एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा।

जिन लोगों ने एक करोड़ का आँकड़ा पार कर लिया होगा, उन्हें अक्षयवट मार्ग पर सेक्टर -1 में स्थित बैंक के शिविर में मुफ़्त आवास उपलब्ध कराया जाएगा। आशुतोष वार्ष्णेय ने कहा कि अब तक 12 से अधिक भक्त एक करोड़ का आँकड़ा पार कर चुके हैं।

राम सेवा ट्रस्ट के ट्रस्टियों में से एक गुंजन वार्ष्णेय हैं। वे राम नाम बैंक से भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, “कुंभ मेला-2019 के दौरान लगभग 1,200 भक्तों ने प्रतिज्ञा की थी कि वे भगवान राम का नाम लिखेंगे और उनसे रास्ता दिखाने का आग्रह करेंगे, जिससे अयोध्या विवाद का शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण समाधान हो सके।” उन्होंने यह भी कहा कि 2019 के कुंभ मेले के दौरान भगवान राम का नाम लिखने के लिए पोस्ट-ग्रेजुएट छात्रों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक के विभिन्न क्षेत्रों के भक्तों ने भाग लिया था।

नोएडा में एक आईटी फ़र्म में काम करने वाली आयुषी शुक्ला ने बताया,

“हमने 2019 कुंभ मेले के दौरान एक प्रतिज्ञा ली थी कि हर रोज़ हम भगवान राम का नाम लिखकर कम से कम 10 पुस्तिकाएँ भरेंगे… इस अवधि के दौरान मैंने 10,000 से अधिक बार भगवान राम का नाम लिखा था। “

सदियों से चले आ रहे अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने 9 नबंबर को ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाते हुए विवादित भूमि रामलला को सौंप दी थी। साथ ही मुस्लिम पक्ष को भी अयोध्या में दूसरी जगह मस्जिद निर्माण के लिए पाँच एकड़ ज़मीन दिए जाने का आदेश भी केंद्र सरकार को दिया था।

आशुतोष वार्ष्णेय, जो बैंक के मामलों का प्रबंधन करते हैं, दरअसल, वो अपने दादा की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके दादा ने 20वीं शताब्दी के शुरुआत में इस संगठन की स्थापना की थी।

भगवान राम को समर्पित इस अनूठे बैंक में किसी भी तरह का कोई मौद्रिक लेन-देन नहीं होता है। इसके सदस्यों के पास 30 पृष्ठों की एक पुस्तिका होती है, जिसमें 108 सेल होते हैं। इनमें राम भक्त, 108 बार हर रोज़ लाल स्याही से राम का नाम लिखते हैं। इसके बाद यह पुस्तिका व्यक्ति के खाते में जमा की जाती है। उन्होंने बताया कि लोग उर्दू, अंग्रेज़ी और बंगाली में भी भगवान राम का नाम लिखते हैं।

गुंजन वार्ष्णेय ने कहा, “खाताधारक के खाते को भगवान राम का दिव्य नाम दिया जाता है। अन्य बैंकों की तरह पासबुक जारी की जाती है। इन सभी सेवाओं को मुफ़्त प्रदान किया जाता है। राम नाम बैंक के पास किसी भी अन्य बैंक की तरह पासबुक होती है, जिसमें इस बात का पूरा लेखा जोखा होता है कि कितनी बार और कब राम नाम लिखे गए।”

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