रणजी ट्रॉफी चल रही है और क्रिकेट के मैदान पर तो सब कुछ ठीक चल रहा लगता है, लेकिन बाहर राजनीति ने फिर से हल्ला मचा दिया है। साउथ अफ्रीका ए के खिलाफ दो 4 दिवसीय मैचों के लिए इंडिया ए टीम का ऐलान हुआ, जिसमें ऋषभ पंत कप्तान बनाए गए। लेकिन मुंबई के बल्लेबाज सरफराज खान का नाम फिर से गायब था। इससे असदुद्दीन ओवैसी और कॉन्ग्रेस की शमा मोहम्मद जैसे नेता भड़क उठे।
ओवैसी ने पूछा कि सरफराज को क्यों नहीं चुना गया, तो शमा ने सीधे गौतम गंभीर पर निशाना साधा, कहते हुए कि क्या सरफराज का सरनेम ही उनकी चयन न होने की वजह है? ये लोग क्रिकेट को हिंदू-मुस्लिम का रंग दे रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है।
असल में सरफराज और मोहम्मद शमी जैसे खिलाड़ियों का हाल देखिए तो साफ है कि मैदान पर फॉर्म और फिटनेस ही सब कुछ तय करती है, न कि कोई साजिश। इस रिपोर्ट में हम पूरे मामले को खोलकर रखेंगे, ताकि आप समझ सकें कि ये सब राजनीतिक बकवास क्यों है।
सरफराज के न चुने जाने के पीछे हकीकत क्या है?
साउथ अफ्रीका-ए के खिलाफ दो 4 दिवसीय मैचों के लिए इंडिया-ए की टीम घोषित हुई। ऋषभ पंत कप्तान हैं, जो चोट से उबरकर लौटे हैं। साई सुदर्शन, केएल राहुल, मोहम्मद सिराज जैसे खिलाड़ी भी हैं। लेकिन सरफराज खान का नाम नहीं है, जिसके बाद शमा मोहम्मद और ओवैसी ने हंगामा शुरू किया। शमा ने गंभीर पर धार्मिक भेदभाव का इल्जाम लगाया, तो ओवैसी ने पूछा कि सरफराज को क्यों नहीं चुना।
लेकिन असल बात ये है कि रणजी ट्रॉफी में खेल रहे कई खिलाड़ियों को इंडिया ए से बाहर रखा गया है, ताकि वे घरेलू क्रिकेट पर फोकस करें। रजत पाटीदार, रुतुराज गायकवाड़ जैसे बल्लेबाज भी सिर्फ एक मैच के लिए चुने गए। सरफराज का बाहर होना कोई साजिश नहीं, बल्कि चयन समिति का रणजी और टेस्ट सीरीज की तैयारी को बैलेंस करने का फैसला है।
सरफराज का प्रदर्शन आया आड़े
सरफराज खान का घरेलू क्रिकेट में रिकॉर्ड शानदार है। 56 फर्स्ट क्लास मैचों में उनका औसत 65.19 है, जो गजब का है। पिछले साल इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू के बाद दूसरी ही सीरीज के पहले मैच में उन्होंने 150 रनों की पारी खेली। इस साल 17 किलो वजन घटाकर फिटनेस दिखाई। रणजी ट्रॉफी में जम्मू-कश्मीर के खिलाफ 42 और 32 रन बनाए, जिससे मुंबई हार से बची।

लेकिन बाकी प्रदर्शन देखें तो मिक्स्ड रिकॉर्ड है। इंग्लैंड लायंस के खिलाफ 92 रन बनाए, पर न्यूजीलैंड के खिलाफ आखिरी दो टेस्ट की चार पारियों में सिर्फ 21 रन (0, 1, 11, 9)। इंडियंस वर्सेज पीएम इलेवन में 1 रन। क्वाड्रिसेप्स इंजरी भी रही, जिसके चलते चयन समिति ने रणजी पर फोकस करने का फैसला लिया। ये कोई भेदभाव नहीं, बल्कि उनके फॉर्म और फिटनेस का सवाल है।
मोहम्मद शमी का हाल जान लीजिए
शमा और ओवैसी जैसे लोग मोहम्मद शमी को भी घसीटते हैं, कहते हैं कि मुस्लिम खिलाड़ियों को टारगेट किया जा रहा। लेकिन शमी का हाल देखिए। रणजी में बंगाल वर्सेज उत्तराखंड के मैच में 7 विकेट लिए, पर 6 लोअर ऑर्डर के (8-11 नंबर)। सिर्फ कप्तान कुनाल चंडेला (72 रन पर) का विकेट ऊपरी बल्लेबाज का था। दिलीप ट्रॉफी क्वार्टर फाइनल में नॉर्थ जोन के लिए खेले, 100 रन देकर 1 विकेट, दूसरी पारी में जीरो।
IPL 2025 के आखिरी तीन मैचों में सिर्फ 1 विकेट – गुजरात टाइटंस के खिलाफ 48 रन, कोई विकेट नहीं; चेन्नई के खिलाफ 28 रन, 1 विकेट; मुंबई इंडियंस के खिलाफ 28 रन, जीरो विकेट। कुल 9 IPL मैचों में 6 विकेट, इकोनॉमी 11.23। हैमस्ट्रिंग इंजरी भी रही।

शमी की उम्र 35 के करीब है, इंजरी हिस्ट्री लंबी है। जबकि ऑस्ट्रेलिया जैसे टफ दौरे के लिए चयन समिति को फिट और फॉर्म में खिलाड़ी चाहिए, तो शमी का बाहर होना प्रदर्शन की वजह से है, न कि मजहब की वजह से।
कॉन्ग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद की बकवास
कॉन्ग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने एक्स पर लिखा, “क्या सरफराज को उनके सरनेम की वजह से नहीं चुना गया? बस पूछ रही हूँ। हम जानते हैं कि गौतम गंभीर कहाँ खड़े हैं।”

ये सीधा गंभीर पर हमला था, जो पहले भाजपा सांसद रह चुके हैं। शमा ने इसे कम्युनल रंग देने की कोशिश की, जैसे गंभीर ने सरफराज को मजहब के आधार पर बाहर किया। लेकिन गंभीर चयन समिति के हेड नहीं, अजित अगरकर हैं। गंभीर तो ऑस्ट्रेलिया में वनडे सीरीज की कोचिंग में व्यस्त हैं।
शमा का ये बयान सिर्फ हेट फैलाने के लिए था। वो पहले भी रोहित शर्मा को ‘मोटा’ और ‘कमजोर कप्तान’ कहकर विवाद खड़ा कर चुकी हैं। तब सफाई दी, लेकिन अब फिर वही राग। शमा का ‘जस्ट आस्किंग’ दरअसल जहरीली सियासत है, जो क्रिकेट को वोट बैंक बनाती है। अगर सरनेम की बात होती, तो मोहम्मद सिराज, खलील अहमद कैसे खेल रहे? शमा को जवाब देना चाहिए कि सरफराज का डेब्यू रोहित की कप्तानी और भाजपा सरकार में ही क्यों हुआ?
ओवैसी का वही पुराना कम्युनल पैटर्न
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी हमेशा मुस्लिम मुद्दों को उठाकर वोट बैंक बनाते हैं। सरफराज के चयन पर सवाल उठाकर उन्होंने फिर वही किया। एक्स पर लिखा, “सरफराज को इंडिया ए के लिए भी क्यों नहीं चुना गया?”

वैसे जब हनुमा विहारी या रजत पाटीदार जैसे हिंदू खिलाड़ी बाहर होते हैं, तो ओवैसी चुप रहते हैं। ये सेलेक्टेड गुस्सा क्यों? सरफराज का फॉर्म मिक्स्ड है और रणजी में कंटीन्यूटी जरूरी है। ओवैसी को क्रिकेट की बारीकियाँ नहीं समझनी, बस हेडलाइंस चाहिए।
CAA से लेकर कश्मीर तक, हर मुद्दे को कम्युनल बनाना उनका पुराना खेल है। लेकिन क्रिकेट में मेरिट चलता है। सिराज का हालिया ऑस्ट्रेलिया वनडे में प्रदर्शन देखिए – शानदार। इसलिए वो इंडिया ए में हैं। ओवैसी को चाहिए कि सरफराज को सपोर्ट करें, उनके रन गिनें, न कि सियासत करें।
क्रिकेट में मेरिट चलती है, धर्म-मजहब नहीं
इंडिया-ए का सेलेक्शन रणजी और टेस्ट सीरीज की तैयारी को बैलेंस करने की है। चोट से लौटे ऋषभ पंत कप्तान हैं। केएल राहुल, ध्रुव जुरेल, सिराज जैसे सीनियर खिलाड़ी दूसरे मैच में खेलेंगे, ताकि टेस्ट सीरीज की प्रैक्टिस हो। रजत पाटीदार, रुतुराज गायकवाड़ जैसे खिलाड़ी रणजी में कप्तानी कर रहे, इसलिए एक मैच के लिए चुने गए।
सरफराज को रणजी में रन बनाने का मौका दिया गया, ताकि फॉर्म और फिटनेस बरकरार रहे। बीसीसीआई ने साफ किया कि उनके लिए दरवाजे बंद नहीं। अयुष म्हात्रे, हर्ष दुबे जैसे युवा खिलाड़ियों को मौका मिला, जो घरेलू क्रिकेट में शानदार हैं। ये सिलेक्शन मेरिट और स्ट्रैटजी पर आधारित है, न कि धर्म और मजहब पर।
शमा और ओवैसी का ड्रामा क्रिकेटरों को पहुँचा रहा नुकसान
शमा और ओवैसी का ये तमाशा क्रिकेट को नुकसान पहुँचा रहा। क्रिकेटर मेहनत करते हैं, रन बनाते हैं, विकेट लेते हैं, लेकिन ये नेता उन्हें सियासी पॉन बनाते हैं। सरफराज ने कभी शिकायत नहीं की, वो रणजी में रन ठोक रहे। शमी भी फोकस्ड हैं। लेकिन शमा और ओवैसी जैसे लोग बिना तथ्य जाँचे इल्जाम लगाते हैं।
भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने ट्वीट किया, “ये लोग क्रिकेट को भी बाँटना चाहते हैं। देश का पार्टिशन करके मन नहीं भरा?”
This lady & her party is sick. After calling Rohit Sharma fat- she and her party want to divide even our cricket team on communal lines? Desh ka partition karke mann nahi bhara kya?
— Shehzad Jai Hind (Modi Ka Parivar) (@Shehzad_Ind) October 22, 2025
In the same team MOHAMMAD SIRAJ AND KHALEEL AHMED will play ! Stop dividing India on communal… pic.twitter.com/mUEqdeAK9o
क्रिकेट का मैदान धर्म नहीं देखता, वहाँ बल्ला और गेंद चलती है। सरफराज अगर रन बनाते रहेंगे, तो कोई उन्हें रोक नहीं सकता। देश में बल्लेबाजों की भरमार है, लेकिन लगातार रन बनाकर सरफराज फिर से दरवाजा तोड़ देंगे। शमी को भी फिटनेस और कंसिस्टेंसी दिखानी होगी। लेकिन शमा मोहम्मद और ओवैसी जैसे लोग क्रिकेट को कम्युनल बनाकर खिलाड़ियों का नुकसान कर रहे।


