Wednesday, January 27, 2021
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केवल 25 सेकेंड बजेगी फोन की घंटी: टेलीकॉम कंपनियों की टक्कर कस्टमर पर भारी

"यद्यपि हमने महसूस किया कि इससे ग्राहकों को परेशानी हो सकती है लेकिन ट्राई की ओर से कोई निर्देश नहीं होने और इंटरकनेक्ट शुल्क के घाटे से बचने के लिए हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचा है। इसलिए हमने हमारे नेटवर्क पर फोन की घंटी बजने की अवधि को घटाने का निर्णय किया है।"

टेलीकॉम कंपनियों की प्रतिस्पर्धा ग्राहकों को भारी पड़ने वाली है। एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने अपने नेटवर्क से बाहर की कॉल पर घंटी बजने का समय घटाकर केवल 25 सेकेंड कर दिया है। अमूमन कॉल आने के समय बजने वाली फोन की घंटी की अवधि 40 से 45 सेकेंड होती है।

एयरटेल ने कहा कि उसने फोन की घंटी बजने की अवधि को 25 सेकेंड तक सीमित करने का निर्णय लिया। जियो के ऐसा करने के बाद यह फ़ैसला किया गया है। इससे ग्राहकों को असुविधा हो सकती है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) नियामक की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट निर्देश ना होने के चलते कंपनी के पास कोई और विकल्प नहीं बचा है। हालाँकि, कंपनी नियामक के सामने इस बात को कई बार रख चुकी है।

एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के इस कदम का एक मकसद कॉल जुड़े रहने के समय के मुताबिक उस पर लगने वाले इंटरकनेक्ट उपयोग शुल्क (आईयूसी) की लागत घटाना भी है। ट्राई से जुड़े सूत्रों ने बताया कि नियामक 14 अक्टूबर को ‘कॉल किए जाने वाले व्यक्ति के फोन की घंटी बजने की समय-सीमा’ के मुद्दे पर एक खुली चर्चा कराने की योजना बना रहा है। इसके अलावा इस पूरे आईयूसी मुद्दे पर भी बातचीत होगी। इसके लिए एक परिचर्चा पत्र पहले ही जारी कर दिया गया है। इस पर जल्द निर्णय किया जाएगा।

एयरटेल ने अपने पत्र में कहा, “यद्यपि हमने महसूस किया कि इससे ग्राहकों को परेशानी हो सकती है लेकिन ट्राई की ओर से कोई निर्देश नहीं होने और इंटरकनेक्ट शुल्क के घाटे से बचने के लिए हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचा है। इसलिए हमने हमारे नेटवर्क पर फोन की घंटी बजने की अवधि को घटाने का निर्णय किया है।”

एयरटेल ने जियो के इस क़दम के प्रभाव के बारे में बार-बार ट्राई को बताया है। कंपनी का कहना है कि फोन की घंटी बजने की अवधि कम करने से मिस्ड कॉल की संख्या बढ़ेगी। इससे किसी व्यक्ति को कॉल लगाने और साथ ही मिस्ड कॉल देखने के बाद वापस कॉल करने की संख्या भी बढ़ेगी। इससे ग्राहकों के अनुभव के साथ-साथ नेटवर्क की गुणवत्ता पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

पिछले महीने आईयूसी के मुद्दे को लेकर सभी कंपनियों का विवाद नियामक के पास तक पहुँच गया था। एयरटेल ने दूसरे नेटवर्क पर कॉल जुड़ने को पैसा कम चुकाने के लिए जियो पर प्रणाली के साथ ‘धोखाधड़ी’ करने का आरोप लगाया था। वास्तव में आईयूसी को एक जनवरी 2020 से ख़त्म किए जाने का प्रस्ताव है। लेकिन ट्राई इस समय-सीमा की अभी समीक्षा कर रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

 

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