Friday, March 5, 2021
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आम बजट से पहले बजट की पूरी कहानी, क्यों इतना गोपनीय रखा जाता है पिटारा?

चूँकि बजट वर्तमान वित्तीय वर्ष के खत्म होने से पहले ही बनना शुरू होता है तो आय और व्यय सही-सही बता पाना संभव नहीं है। इसलिए बजट तीन भाग में प्रस्तुत किया जाता है।

सोमवार (1 फरवरी 2021) को देश का आम बजट आएगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसे पेश करेंगी। इस पिटारे में क्या होगा, क्या नहीं, यह यकीनी तौर पर बताना फिलहाल मुश्किल है। क्योंकि ये पिटारा काफी गोपनीयता के साथ रखा जाता है। हालाँकि अर्थशास्त्र और राजनीति के विशेषज्ञ अपने-अपने हिसाब से कयास लगा रहे हैं। लेकिन किसका तुक्का कितना सही लगेगा ये तो कल (फरवरी 1, 2021) ही पता चलेगा।

लेकिन पिटारे को इतनी गोपनीयता के साथ क्यों रखा जाता है?

दरअसल 1947 में यूनाइटेड किंगडम में बजट पेश होने वाले दिन वहाँ के तत्कालीन वित्त मंत्री (British Chancellor of the Exchequer) हुघ डाल्टन ने बजट स्पीच देने से पहले एक पत्रकार से बात करने के दौरान कुछ ऐसे टैक्स के बारे में जानकारी दी, जो उन्होंने बजट में शामिल किया था। यह खबर बाहर आई और डाल्टन को इस्तीफा देना पड़ा। तब से इंगलैंड तो छोड़िए, हमारे यहाँ भी आरके षणमुखम चेट्टी ने सोचा कि बजट का पिटारा बंद ही अच्छा।

अब ये आरके षणमुखम चेट्टी कौन हैं? वे स्वतंत्र भारत के पहले वित्त मंत्री थे। लेकिन कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़े हुए नहीं थे। पहली कैबिनेट में कई सदस्य गैर-कॉन्ग्रेस पार्टी से थे, जिनमें से बीआर अंबेडकर और आरके षणमुखम चेट्टी भी थे। वे एक उद्योगपति थे साथ ही, कोच्चि राज्य के दीवान और चैंबर ऑफ प्रिंसेस के संवैधानिक सलाहकार भी थे।

स्वतंत्र भारत के वे भले पहले वित्त मंत्री थे लेकिन भारत का पहला बजट उन्होंने पेश नहीं किया था। भारत का पहला केंद्रीय बजट ‘जेम्स विल्सन’ ने 18 फरवरी, 1869 को पेश किया था। जेम्स विल्सन भारतीय काउंसिल के वित्त मामलों को सँभालने वाले सदस्य थे। साथ ही, ‘द इकोनॉमिस्ट’ के संस्थापक भी थे। 1869 के बाद बजट हर साल पेश किया जाता रहा है और स्वतंत्र भारत के संविधान में ‘अनुच्छेद 112’ के तहत सरकार को हर साल अपने खर्चों और आमदनी का ब्यौरा देना जरूरी है।

अब आते हैं बजट की प्रक्रिया पर। बजट पेश होने से कुछ महीने पहले ही तैयार होना शुरू हो जाता है। अमूमन अगस्त-सितम्बर से बजट बनना शुरू हो जाता है। पेश होने से कुछ दिन पहले प्रिंट होता है। इसी प्रिंटिंग की प्रक्रिया में जाने से पहले ‘कुछ मीठा हो जाए’ के तर्ज पर ‘हलवा सेरेमनी’ होता है। लेकिन इस साल का बजट प्रिंट नहीं होगा, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में प्रेजेंट किया जाएगा।

चूँकि बजट वर्तमान वित्तीय वर्ष के खत्म होने से पहले ही बनना शुरू होता है तो आय और व्यय सही-सही बता पाना संभव नहीं है। इसलिए बजट तीन भाग में प्रस्तुत किया जाता है। पहले भाग में पिछले वित्तीय वर्ष (2019-20) का वास्तविक आय-व्यय का लेखा-जोखा, दूसरे भाग में वर्तमान वित्तीय वर्ष (2020-2021) का रिवाइज्ड बजट, और तीसरे भाग में आने वाले साल (2021-2022) का बजट।

वित्त मंत्री के बजट पर भाषण देने के बाद बजट को संसद से स्वीकृति मिलना जरूरी होता है वरना माना जाता है कि सरकार ने अपना बहुमत खो दिया है। इस प्रक्रिया में दो विधेयकों पर संसद की स्वीकृति जरूरी होती है। पहला, वित्त विधेयक और दूसरा विनियोग विधेयक। विनियोग विधेयक के तहत ही सरकार को अपने खर्चों के लिए राजकोष से धन प्राप्त होता है।

  • अब जानते है भारत के कुछ ऐसे बजट के बारे में, जिसमें कुछ अलग तरह के फैसले लिए गए या जो किसी वजह से आम बजट की तुलना में खास रहा:
  • 1947-48 में स्वतंत्र भारत का पहला बजट पेश हुआ।
  • 1948-49 के बजट में पहली बार चुनाव से पहले पेश किया जाने वाला बजट अंतरिम बजट कहलाया।
  • 1950-51 के बजट में योजना आयोग बनने की घोषणा हुई।
  • 1955-56 के बजट में पहली बार परिवार को ध्यान में रखते हुए विवाहित और अविवाहित लोगों के लिए टैक्स में अलग-अलग तरह से छूट दी गई।
  • 1957-58 में पहली बार ‘वेल्थ टैक्स’ के रूप में पहली बार नया प्रत्यक्ष कर लागू हुआ।
  • 1965-66 में काले धन से निपटने के लिए पहली बार ‘वॉलंटरी डिस्क्लोजर ऑफ अनेकांउटेड वेल्थ’ योजना लाई गई।
  • 1970-71 में पहली बार बजट किसी महिला प्रधानमंत्री सह वित्तमंत्री के द्वारा पेश किया गया।
  • 1985-86 में पहली बार वित्त मंत्री वीपी सिंह ने ‘वित्तीय और औद्योगिक पुनर्निर्माण बोर्ड’ के गठन का प्रस्ताव रखा जो वर्तमान में इनसॉलवेन्सी कोड की नींव बनी।
  • 1987-88 में मिनिमम अल्टरनेट टैक्स की अवधारणा लाई गई।
  • 1993-94 के बजट में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज बनाने की घोषणा हुई।
  • 1994-95 में पहली बार सर्विस टैक्स लागू किया गया।
  • 1997-98 के बजट को ‘ड्रीम बजट’ कहा गया। इसमें इनकम टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स रेट को कम करने से लेकर कई दूसरे आर्थिक सुधार लागू किए गए।
  • 1998-99 में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने एनआरआई निवेश को आकर्षित करने के लिए दो योजनाओं की घोषणा किया। पहला, UTI इंडिया मिलेनियम स्कीम और दूसरा, SBI का रेसर्जेंट इंडिया बॉन्ड्स।
  • 2006-07 के बजट में पहली बार ‘एक देश एक टैक्स’ के लिए GST का जिक्र किया गया, जिसके सात साल बाद एनडीए सरकार के नेतृत्व में या अस्तित्व में आया।
  • 2009-10 में UIDAI की घोषणा की गई और आधार प्रोजेक्ट शुरू हुआ।
  • 2015-16 में देश की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत बनाने के लिए नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की घोषणा की गई। गाँव में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए दीन दयाल ग्रामीण कौशल योजना की घोषणा की गई। 
  • 2017-18 में अंत्योदय योजना की शुरुआत की गई।
  • 2019-20 में पहली बार भारत की महिला वित्त मंत्री ने बजट पेश किया। इस बजट में एक अलग मंत्रालय ‘जल शक्ति मंत्रालय’ के गठन की बात कही गई।
  • 2020-21 में नई शिक्षा नीति आने की बात कही गई।

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