Friday, February 3, 2023
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लॉकडाउन में मनचलों को डराने का नया तरीका: पुलिस ने कोरोना ‘मरीज’ वाली एंबुलेंस में डाल दिया

पुलिस ने पहले मनचले लड़कों को पकड़ा। फिर उन्हें सबक सिखाने के लिए एक ऐसी एंबुलेंस में बंद करने का नाटक किया, जिसमें एक फर्जी मरीज था और जो मनचलों को एंबुलेंस में देखते ही उन्हें छूने की कोशिश करने लगा। इसके बाद लड़के खिड़की, दरवाजा खोल खोलकर भागने लगे और अपने मुँह पर कपड़ा बाँधने लगे।

देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान सड़कों पर उतरकर नियमों का उल्लंघन करने वाले मनचलों को सबक सिखाने के लिए अब पुलिस नए-नए तरीके खोज रही है। पिछले दिनों कुछ वायरल वीडियोज़ में हमने देखा कि कहीं पर डंडों के बूते तो कहीं उठक-बैठक करा लोगों को सड़कों पर आने से रोका जा रहा था।

कुछ वीडियो में पुलिस गाना गाकर, फूल-माला पहनाकर लोगों से लॉकडाउन का पालन करने की गुजारिश करती दिखी। कई कोशिशों के बावजूद भी जब ऐसे लोग बाज नहीं आए, तो पुलिस ने एक नया तरीका खोजा। जिसका वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर वायरल है।

इस वीडियो में हम देख सकते हैं कि पुलिस सड़क पर आ रहे लोगों को एक फर्जी मरीज के साथ एंबुलेंस में बंद कर डरा रही है। ताकि उन्हें समझ आ सके कि इस समय सड़क पर बिना मास्क आदि के उतरना कितना खतरनाक है।

हालाँकि ये वीडियो कहाँ की है, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती। लेकिन वीडियो की भाषा को सुनकर ये साउथ के किसी राज्य की मालूम होती है। इसे देखकर कुछ लोगों को ये तरीका नागरिकों में डर व्याप्त करने वाला लग सकता है। लेकिन वीडियो देखने पर मालूम चलेगा कि इससे दिलचस्प तरीका और कुछ नहीं है।

इस वीडियो में पुलिस जो काम सड़क पर बेवजह घूम रहे लोगों के साथ करती दिख रही है, उसे देखकर लगता है कि यदि हर राज्य की पुलिस ऐसा तरीका अपना ले, तो शायद सड़कों पर दिखने वाले अन्य लोग भी घर पर बैठे दिखें।

हम देख सकते है कि इस वीडियो में पुलिस ने पहले मनचले लड़कों को पकड़ा। फिर उन्हें सबक सिखाने के लिए एक ऐसी एम्बुलेंस में बंद करने का नाटक किया, जिसमें एक फर्जी मरीज था और जो मनचलों को एंबुलेंस में देखते ही उन्हें छूने की कोशिश करने लगा। इसके बाद लड़के खिड़की, दरवाजा खोल खोलकर भागने लगे और अपने मुँह पर कपड़ा बाँधने लगे।

गौरतलब है कि जिस तरह पिछले दिनों सड़क पर उतर रहे लोग पुलिसकर्मियों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सिरदर्द बने, उन सब घटनाओं को देखकर लगता है कि इस तरह के प्रयास सराहे जाने चाहिए। हर राज्य की पुलिस ने अपनी ओर से अलग तरीके आजमाएँ, लेकिन जरूरत मुताबिक परिणाम नहीं मिला। ज्यादा सख्ती किए जाने पर सुरक्षाकर्मियों पर पत्थरबाजी तक की घटनाएँ सामने आईं। जैसे अलीगढ के भुजपुरा में पुलिसकर्मियों पर तब हमला हुआ जब वह लॉकडाउन का पालन कराने पहुँचे थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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