Tuesday, January 26, 2021
Home विविध विषय विज्ञान और प्रौद्योगिकी कहाँ, कब, कैसे और क्यों? कोरोना वैक्सीन पर हरेक सवाल का जवाब यहाँ, भ्रम...

कहाँ, कब, कैसे और क्यों? कोरोना वैक्सीन पर हरेक सवाल का जवाब यहाँ, भ्रम फैलाने वालों से रहें दूर

मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन की सुविधा होगी और आपको सूचित कर दिया जाएगा कि आप वैक्सीन लेने के लिए योग्य हैं या नहीं। आप किसी भी सरकारी पहचान-पत्र या सर्विस कार्ड का प्रयोग कर वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के बाद ही आपको इसकी अनुमति मिलेगी।

भारत में कोरोना वैक्सीन को लेकर जम कर भ्रम फैलाया जा रहा है, इसलिए आपको इसकी पूरी प्रक्रिया और वास्तविकता से परिचित रहने की आवश्यकता है। कोरोना जैसी महामारी के खात्मे के लिए आई वैक्सीन का भी अब राजनीतिकरण किया जा रहा है। सीरम इंस्टिट्यूट और भारत बायोटेक के वैक्सीन को मंजूरी मिलने के बाद गई है, सरकार ने एक प्रश्नोत्तरी जारी की है, जिसे पढ़ने के बाद आपका सारा भ्रम दूर हो जाएगा।

क्या कोरोना वैक्सीन सभी को एक साथ दिया जाएगा? इसका जवाब है – नहीं। ये काम चरणों में किया जाएगा। भारत सरकार ने हाई-रिस्क समूहों को चिह्नित किया है, जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन दिया जाएगा। स्वास्थ्य कर्मचारियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स और 50 वर्ष से अधिक की उम्र के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। जरूरतमंदों के बाद पूरी जनसंख्या के लिए ये उपलब्ध रहेगी। वैक्सीन के टाइमलाइन को लेकर लोगों में काफी भ्रम है।

वैसे तो वैक्सीन के निर्माण में सालों लग जाते हैं, लेकिन इस महामारी की आपात स्थिति को देखते हुए इसे कुछ ही महीनों में तैयार किया गया। जब वैक्सीन की सटीकता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए देश की नियामक संस्थाएँ उसे अनुमति देती हैं, तभी उसका प्रयोग किया जाता है। एक और बात जानने लायक ये है कि कोरोना वैक्सीन लेना अनिवार्य नहीं है। सरकार किसी को भी मजबूर नहीं कर रही कि उसे वैक्सीन लेना ही है।

सरकार बस सलाह दे सकती है कि शेड्यूल के हिसाब से लोगों को कोरोना वैक्सीन लेनी चाहिए, ताकि संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके। जो लोग कोरोना संक्रमित हो कर ठीक हो चुके हैं, वो भी अपने इम्यून सिस्टम को और मजबूत करने के लिए वैक्सीन ले सकते हैं। जिन्हें कोरोना संक्रमण है, उन्हें 14 दिनों के लिए वैक्सीन लेने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे वैक्सीन दिए जाने वाले स्थल पर अन्य लोगों में भी संक्रमण फैलने की आशंका है।

आप कौन सा वैक्सीन लेंगे? जिस भी वैक्सीन को सरकारी नियामक संस्थाओं ने लाइसेंस दे रखी है, उन्हें आप ले सकते हैं। आप उनमें से किसी भी वैक्सीन का प्रयोग कर सकते हैं। हाँ, आप वैक्सीन का शेड्यूल एक से ही पूरा करें, बीच में न बदलें। आपने पहला शॉट भारत बायोटेक वैक्सीन का लिया, फिर आप दूसरा शॉट सीरम वाला नहीं ले सकते। वैक्सीन के रखरखाव के लिए सरकारी सिस्टम पर आप सम्पूर्ण भरोसा कर सकते हैं।

भारत दुनिया में सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चलाता रहा है। हर साल कम से कम 2.6 करोड़ नवजात शिशुओं और 2.9 करोड़ माँओं को टीके दिए जाते हैं। भारत की जनसंख्या ही इतनी है कि हर वर्ष वैक्सीन मेकेनिज्म के सिस्टम को मजबूत किया जाता है। वैक्सीन का ट्रायल पूरे नियमों के तहत किया गया है, इसलिए भारत में विकसित की गई वैक्सीन भी उतनी ही प्रभावी होगी, जितनी दुनिया में कहीं और की।

मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन की सुविधा होगी और आपको सूचित कर दिया जाएगा कि आप वैक्सीन लेने के लिए योग्य हैं या नहीं। आप किसी भी सरकारी पहचान-पत्र या सर्विस कार्ड का प्रयोग कर वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के बाद ही आपको इसकी अनुमति मिलेगी। रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन के लिए फोटो आईडी होनी ही चाहिए। कौन सा डोज कब लेना है, इसकी सूचना पंजीकृत फोन नंबर पर आ जाएगी।

वैक्सीन लेने जाएँ तो सारे प्रोटोकॉल्स का पालन करें और सोशल डिटेन्सिंग के नियमों को न भूलें। अगर कहीं भी कोरोना वैक्सीन का कोई साइड इफ़ेक्ट आता है तो कम्पनी को उसकी पूरे डिटेल्स की रिपोर्ट सरकारी नियामकों को सौंपनी पड़ेगी। डाइबिटीज या हाइपरटेंशन वाले लोगों को हाई-रिस्क वाला मानते हुए प्राथमिकता दी जाएगी। चूँकि पहले फेज में सप्लाई लिमिटेड है, इसलिए प्राथमिकता तय की गई है। वैक्सीन लगाने के 2 सप्ताह के बाद आपके शरीर की एंटीबॉडी डेवेलप हो जाएगी।

उधर सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अदार पूनावाला ने भी हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत करते हुए कई सवालों के जवाब दिए हैं। उन्होंने इसे एक बड़ी जीत बताते हुए कहा कि मार्च-अप्रैल तक वो आश्वस्त नहीं थे, लेकिन आर्थिक व तकनीकी रूप से शत-प्रतिशत प्रतिबद्ध थे। उन्होंने कहा कि इसके निर्माण में कोई जल्दबाजी नहीं की गई है। सरकार करार पर हस्ताक्षर के बाद 7 दिन का समय देगी, जिसमें वैक्सीन को कहाँ और कैसे भेजना है ये तय किया जाएगा।

HT से बात करते हुए उन्होंने कहा, “हमने पहले 100 मिलियन खुराक के लिए, सरकार के समक्ष 200 रुपए की लिखित में एक विशेष कीमत की पेशकश की है। यह पेशकश केवल सरकार के लिए है और वो भी सिर्फ 100 मिलियन खुराक के लिए। इससे अधिक के ऑर्डर पर कीमत अधिक अथवा अलग हो सकती है। निजी बाजार में इस वैक्सीन की एक खुराक की कीमत MRP के हिसाब से 1000 रुपए हो सकती है। हम संभवतः इसे 600-700 रुपए में बेचेंगे। विदेशों में निर्यात के लिहाज से इस वैक्सीन की एक खुराक की कीमत 3-5 डॉलर के बीच होगी।”

उन्होंने वैक्सीन को लेकर फ़ैल रहे अफवाह और भ्रम को लेकर कहा कि किसी को भी विज्ञान के तथ्यों पर सवाल उठाने का अधिकार है, लेकिन हमें पढ़ना चाहिए कि डेटा आखिर होता क्या है और कहाँ इसका परीक्षण किया जाता है। विशेषज्ञों के साथ राय-विचार कर आप समझ सकते हैं कि ये वैक्सीन काफी ज्यादा प्रभावी और सुरक्षित है। उन्होंने साफ़ किया कि वैक्सीन लेने के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा रहा है।

याद दिला दें कि भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SRI) और भारत बायोटेक द्वारा विकसित की गई कोरोना वैक्सीन को मंजूरी दे दी है। दोनों ही वैक्सीन को इमरजेंसी स्थिति में रिस्ट्रिक्टेड प्रयोग के लिए मंजूर किया गया। इसका अर्थ है कि आपात स्थिति में इन दोनों द्वारा निर्मित की गई कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी DCGI (Drug Controller General of India) ने दे दी है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

 

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

Video: किसानों के हमले में दीवार से एक-एक कर गिरते रहे पुलिसकर्मी, 109 घायल

वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ द्वारा किए गए हमले से पुलिसकर्मी एक-एक कर लाल किले की दीवार से नीचे गिरते जा रहे हैं।

बिहारी-गुजराती-तमिल-कश्मीरी किसान हो तो डूब मरो… क्योंकि किसान सिर्फ पंजाबी-खालिस्तानी होते हैं, वही अन्नदाता हैं

वास्तविकता ये है कि आप इतने दिनों से एक ऐसी भीड़ के जमावड़े को किसान का आंदोलन कहते रहे। जिसकी परिभाषा वामपंथी मीडिया गिरोह और विपक्षियों ने गढ़ी और जिसका पूरा ड्राफ्ट एक साल पहले हुए शाहीन बाग मॉडल के आधार पर तैयार हुआ।

जर्मनी, आयरलैंड, स्पेन आदि में भी हो चुकी हैं ट्रैक्टर रैलियाँ, लेकिन दिल्ली वाला दंगा कहीं नहीं हुआ

दिल्ली में जो आज हुआ, स्पेन, आयरलैंड, और जर्मनी के किसानों ने वो नहीं किया, हालाँकि वो भी अन्नदाता ही थे और वो भी सरकार के खिलाफ अपनी माँग रख रहे थे।

किसानों के आंदोलन में खालिस्तानी कड़े और नारे का क्या काम?

सवाल उठता है कि जो लोग इसे पवित्र निशान साहिब बोल रहे हैं, वो ये बताएँ कि ये नारा और कड़ा किसका है? यह भी बताएँ कि एक किसान आंदोलन में मजहबी झंडा कहाँ से आया? उसे कैसे डिफेंड किया जाए कि तिरंगा फेंक कर मजहबी झंडा लगा दिया गया?

कैपिटल हिल के लिए छाती पीटने वाले दिल्ली के ‘दंगाइयों’ के लिए पीट रहे ताली: ट्रम्प की आलोचना करने वाले करेंगे राहुल-प्रियंका की निंदा?

कैपिटल हिल वाले अगर दंगाई थे तो दिल्ली के उपद्रवी संत कैसे हुए? ट्रम्प की आलोचना हो रही थी तो राहुल-प्रियंका की निंदा क्यों नहीं? ये दोहरा रवैया अपनाने वाले आज भी फेक न्यूज़ फैलाने में लगे हैं।

वीडियो: जब दंगाई को किसी ने लाल किला पर तिरंगा लगाने दिया, और उसने फेंक दिया!

लाल किले पर एक आदमी सिखों का झंडा चढ़ाने खम्बे पर चढ़ा। जब एक आदमी ने उसकी ओर तिरंगा बढ़ाया तो उसने बेहद अपमानजनक तरीके से तिरंगे को दूर फेंक दिया।

प्रचलित ख़बरें

दिल्ली में ‘किसानों’ ने किया कश्मीर वाला हाल: तलवार ले पुलिस को खदेड़ा, जगह-जगह तोड़फोड़, पुलिस वैन पर पथराव

दिल्ली में प्रदर्शनकारी पुलिस के वज्र वाहन पर चढ़ गए और वहाँ जम कर तोड़-फोड़ मचाई। 'किसानों' द्वारा तलवारें भी भाँजी गईं।

12 साल की लड़की का स्तन दबाया, महिला जज ने कहा – ‘नहीं है यौन शोषण’: बॉम्बे HC का मामला

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने शारीरिक संपर्क या ‘यौन शोषण के इरादे से किया गया शरीर से शरीर का स्पर्श’ (स्किन टू स्किन) के आधार पर...

महिला पुलिस कॉन्स्टेबल को जबरन घेर कर कोने में ले गए ‘अन्नदाता’, किया दुर्व्यवहार: एक अन्य जवान हुआ बेहोश

महिला पुलिस को किसान प्रदर्शनकारी चारों ओर से घेरे हुए थे। कोने में ले जाकर महिला कॉन्स्टेबल के साथ दुर्व्यवहार किया गया।

दलित लड़की की हत्या, गुप्तांग पर प्रहार, नग्न लाश… माँ-बाप-भाई ने ही मुआवजा के लिए रची साजिश: UP पुलिस ने खोली पोल

बाराबंकी में दलित युवती की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया। पुलिस ने बताया कि पिता, माँ और भाई ने ही मिल कर युवती की हत्या कर दी।

तेज रफ्तार ट्रैक्टर से मरा ‘किसान’, राजदीप ने कहा- पुलिस की गोली से हुई मौत, फिर ट्वीट किया डिलीट

राजदीप सरदेसाई ने तिरंगे में लिपटी मृतक की लाश की तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा कि इसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है।

राहुल गाँधी बोले- किसान मजबूत होते तो सेना की जरूरत नहीं होती… अनुवादक मोहम्मद इमरान बेहोश हो गए

इरोड में राहुल गाँधी के अंग्रेजी भाषण का तमिल में अनुवाद करने वाले प्रोफेसर मोहम्मद इमरान मंच पर ही बेहोश होकर गिर पड़े।
- विज्ञापन -

 

लालकिला में देर तक सहमें छिपे रहे 250 बच्चे, हिंसा के दौरान 109 पुलिसकर्मी घायल; 55 LNJP अस्पताल में भर्ती

दिल्ली में किसान ट्रैक्टर रैली का सबसे बुरा प्रभाव पुलिसकर्मियों पर पड़ा है। किसानों द्वारा की गई इस हिंसा में 109 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं, जिनमें से 1 की हालात गंभीर बताई जा रही है।

Video: किसानों के हमले में दीवार से एक-एक कर गिरते रहे पुलिसकर्मी, 109 घायल

वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ द्वारा किए गए हमले से पुलिसकर्मी एक-एक कर लाल किले की दीवार से नीचे गिरते जा रहे हैं।

बिहारी-गुजराती-तमिल-कश्मीरी किसान हो तो डूब मरो… क्योंकि किसान सिर्फ पंजाबी-खालिस्तानी होते हैं, वही अन्नदाता हैं

वास्तविकता ये है कि आप इतने दिनों से एक ऐसी भीड़ के जमावड़े को किसान का आंदोलन कहते रहे। जिसकी परिभाषा वामपंथी मीडिया गिरोह और विपक्षियों ने गढ़ी और जिसका पूरा ड्राफ्ट एक साल पहले हुए शाहीन बाग मॉडल के आधार पर तैयार हुआ।

जर्मनी, आयरलैंड, स्पेन आदि में भी हो चुकी हैं ट्रैक्टर रैलियाँ, लेकिन दिल्ली वाला दंगा कहीं नहीं हुआ

दिल्ली में जो आज हुआ, स्पेन, आयरलैंड, और जर्मनी के किसानों ने वो नहीं किया, हालाँकि वो भी अन्नदाता ही थे और वो भी सरकार के खिलाफ अपनी माँग रख रहे थे।

किसानों के आंदोलन में खालिस्तानी कड़े और नारे का क्या काम?

सवाल उठता है कि जो लोग इसे पवित्र निशान साहिब बोल रहे हैं, वो ये बताएँ कि ये नारा और कड़ा किसका है? यह भी बताएँ कि एक किसान आंदोलन में मजहबी झंडा कहाँ से आया? उसे कैसे डिफेंड किया जाए कि तिरंगा फेंक कर मजहबी झंडा लगा दिया गया?

‘RSS नक्सलियों से भी ज्यादा खतरनाक, संघ समर्थक पैर छूकर गोली मार देते हैं’: कॉन्ग्रेसी सांसद और CM भूपेश बघेल का ज्ञान

कॉन्ग्रेस के सीएम भूपेश ने कहा कि आरएसएस के समर्थक पैर छूकर गोली मार देते हैं। महात्मा गाँधी की हत्या कैसे किया गया था? पहले पैर छुए फिर उनके सीने में गोली मारी।

कैपिटल हिल के लिए छाती पीटने वाले दिल्ली के ‘दंगाइयों’ के लिए पीट रहे ताली: ट्रम्प की आलोचना करने वाले करेंगे राहुल-प्रियंका की निंदा?

कैपिटल हिल वाले अगर दंगाई थे तो दिल्ली के उपद्रवी संत कैसे हुए? ट्रम्प की आलोचना हो रही थी तो राहुल-प्रियंका की निंदा क्यों नहीं? ये दोहरा रवैया अपनाने वाले आज भी फेक न्यूज़ फैलाने में लगे हैं।

‘लाल किले पर लहरा रहा खालिस्तान का झंडा- ऐतिहासिक पल’: ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग ने मनाया ‘ब्लैक डे’

गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर 'खालिस्तानी झंडा' फहराने को लेकर ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (APML) काफी खुश है। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ द्वारा स्थापित पाकिस्तानी राजनीतिक पार्टी ने इसे 'ऐतिहासिक क्षण' बताया है।

वीडियो: जब दंगाई को किसी ने लाल किला पर तिरंगा लगाने दिया, और उसने फेंक दिया!

लाल किले पर एक आदमी सिखों का झंडा चढ़ाने खम्बे पर चढ़ा। जब एक आदमी ने उसकी ओर तिरंगा बढ़ाया तो उसने बेहद अपमानजनक तरीके से तिरंगे को दूर फेंक दिया।

देशी-विदेशी शराब से लदी मिली प्रदर्शनकारी किसानों की ट्रैक्टर: दिल्ली पुलिस ने किया सीज, देखें तस्वीरें

पुलिस ने शराब से भरे एक ट्रैक्टर को सीज किया है। सामने आए फोटो में देखा जा सकता है कि पूरा ट्रैक्टर शराब से भरा हुआ है। यानी कि शराब के नशे में ट्रैक्टरों को चलाया जा रहा है।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,695FollowersFollow
386,000SubscribersSubscribe