Sunday, August 1, 2021
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Mars पर इंसान कर पाएँगे प्रजनन! 200 साल तक जिंदा रहेगा Sperm: वैज्ञानिकों ने नए शोध में किया खुलासा

इस शोध के साथ ही कुछ वैज्ञानिकों ने अब दावा किया है कि लाल ग्रह यानी मंगल पर भी इंसान बच्चे पैदा कर सकता है। माना जाता है कि रेडिएशन की वजह से डीएनए खराब हो सकते हैं और प्रजनन की क्षमता कम हो सकती है। लेकिन नए प्रयोग ने इस सोच को बदल दिया।

मंगल ग्रह पर इंसानी जीवन को लेकर आए दिन कई तरह की रिसर्च होती हैं। ऐसे में इंसान Mars पर प्रजनन कर सकता है या नहीं, इसका जवाब भी वैज्ञानिकों ने खोज निकाला है। वैज्ञानिकों ने अपनी हालिया जाँच में पाया है कि आने वाले समय में इंसान मंगल ग्रह पर प्रजनन करने में सक्षम होगा क्योंकि वहाँ स्पर्म 200 साल तक सर्वाइव कर सकता है।

बता दें कि मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना को लेकर जहाँ इस रिसर्च ने एक रौशनी डाली है। वहीं ये सवाल अब भी उठता है कि आखिर मंगल ग्रह पर कम ग्रैविटी के साथ लोग शारीरिक संबंध कैसे बना सकते हैं?

इस हालिया निष्कर्ष से पहले तक एक्सपर्ट्स को लगता था कि स्पेस के रेडिएशन से DNA खराब हो जाएगा और प्रजनन नामुमकिन होगा। लेकिन इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 6 साल तक चूहे का स्पर्म रखा रहने के बाद भी स्वस्थ पाया गया। जिसे देखते हुए वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष दिया।

मालूम हो कि इस खोज के लिए 66 चूहों से लिए गए सैंपल्स को 2012 में 30 से ज्यादा ग्लास ऐंप्यूल्स में रखा गया था। इसके बाद वैज्ञानिकों ने सबसे बेहतर सैंपल से बच्चे को पैदा करने का फैसला किया। 4 अगस्त, 2013 को 3 सैंपल्स को ISS के लिए लॉन्च किया गया और तीन को जापान के सुकूबा में वैसी ही कंडीशन्स में रखा गया जिनमें कई रेडिएशन शामिल थे।

पहला बॉक्स 19 मई, 2014 को वापस लाया गया और सैंपल के विश्लेषण के बाद प्रॉजेक्ट जारी रखा गया। दूसरा बॉक्स 11 मई, 2016 को लाया गया। तीसरा 3 जून, 2019 को लौटा। धरती पर लौटने के बाद टीम ने RNA सीक्वेंसिंग की मदद से देखा कि सैंपल्स में कितना रेडिएशन पहुँचा है। अपनी रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया कि अंतरिक्ष ट्रिप से स्पर्म के न्यूक्लियस पर फर्क नहीं होता है। इसके बाद धरती पर रखे बॉक्स भी जापान की यामानाशी यूनिवर्सिटी पहुँचाए गए।

इस शोध के साथ ही कुछ वैज्ञानिकों ने अब दावा किया है कि लाल ग्रह यानी मंगल पर भी इंसान बच्चे पैदा कर सकता है। माना जाता है कि रेडिएशन की वजह से डीएनए  खराब हो सकते हैं और प्रजनन की क्षमता कम हो सकती है। लेकिन नए प्रयोग ने इस सोच को बदल दिया। इस काम के लिए वैज्ञानिकों ने चूहों पर किए गए प्रयोग में उनके स्पर्म को फ्रीज करके करीब 6 सालों तक हाई रेडिएशन वाले इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में रखा था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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