Sunday, September 27, 2020
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बजट को समझना-बूझना है तो इन 32 शब्दों को ठीक से जान लें

बजट के दस्तावेजों को समझने के लिए उसमें प्रयुक्त होने वाली शब्दावली को समझना बेहद ज़रूरी है। नहीं तो वित्त मंत्री बजट पढ़ते रहेंगे और आप चाय पर चर्चा में शामिल ही नहीं हो पाएँगे

संसद का बजट सत्र 31 जनवरी से 13 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। हालाँकि संसद के कामकाज को देखते हुए इसे बढ़ाया भी जा सकता है। 31 जनवरी को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त बैठक संबोधन के साथ बजट सत्र शुरू किया जाएगा।

वित्त मंत्री बजट दिवस पर खर्च, राजस्व, घाटा ऋण आदि सहित सरकार के वित्त का एक व्यापक विवरण प्रस्तुत करते हैं। लेकिन बजट के दस्तावेजों को समझने के लिए उसमें प्रयुक्त होने वाली शब्दावली को समझना बेहद ज़रूरी है। आइए आपको दस्तावेजों और शब्दावली के बारे में बताते हैं।

सकल आर्थिक डेटा (Aggregate Economic Data): यह देश में हुए कुल व्यय और संपूर्ण अर्थव्यवस्था से संबंधित वस्तुओं और सेवाओं के कुल उत्पादन की व्याख्या करता है।

वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual Financial Statement): यह वित्तीय विवरण अनुच्छेद 112 पर आधारित होता है। इसमें आने वाले साल और पिछले वर्ष हुए खर्चे के बारे में बताया जाता है।

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विनियोग विधेयक (Appropriation Bill): अनुच्छेद 114(3) के अंतर्गत संसद की ओर से कोई भी कानून बनाए बिना संचित निधि से पैसे नहीं निकाले जा सकते। यह एक दस्तावेज है, जो सरकार को अपने वार्षिक खर्चों को पूरा करने के लिए संचित निधि से धन निकालने का अधिकार देता है।

संतुलित बजट (Balanced Budget): ऐसा बजट जिसमें सार्वजनिक व्यय और कुल राजस्‍व प्राप्तियाँ बराबर हों। इसका मतलब न तो कोई घाटा है और न ही कोई अधिशेष।

बजट एक नज़र में (Budget at a Glance): यह एक दस्तावेज है, जो कर राजस्व, खर्च और अन्य प्राप्तियों व विवरणों का संक्षिप्त ब्यौरा दिखाता है।

बजट चक्र (Budget Cycle ): इसमें बजट के बारे में निर्णय लेने और उन निर्णयों को लागू करने की बात होती है। यह आमतौर पर चार चरण का होता है – बजट तैयार करना, अधिनियमित करना, निष्पादन लेखा परीक्षण और मूल्यांकन।

बजटीय कमी (Budgetary Deficit): यह सरकार के राजस्व और पूंजी खाते दोनों में सभी प्राप्तियों और खर्चों के बीच का अंतर है।

भुगतान संतुलन (Balance of Payments): इस शब्द का उपयोग किसी अवधि में देश के बाहर और देश के भीतर भुगतान के बीच कुल अंतर को दर्शाने के लिए किया जाता है।

केंद्रीय योजना परिव्यय (Central Plan Outlay): यह अर्थव्यवस्था में विभिन्न क्षेत्रों और सरकार के मंत्रालयों के बीच मौद्रिक संसाधनों का विभाजन है।

समेकित बजट (Consolidated Budget): इसमें सभी स्रोतों से प्राप्त राजस्व और सभी गतिविधियों के लिए खर्च का विवरण शामिल होता है।

ऋण (Debt): सरकारी ऋण वह बकाया राशि है, जो निजी कर्जदाताओं को तय समय पर सरकार देने के लिए बाध्य होती है।

विनिवेश (Disinvestment): विनिवेश प्रकिया में निवेश का उल्टा होता है। निवेश यानी किसी कारोबार में, किसी संस्था में, किसी परियोजना में रकम लगाना और विनिवेश यानी किसी चीज या संस्था को बेचकर उस रकम को वापस निकालना।

व्यय बजट (Expenditure Budget): यह विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के राजस्व और पूँजी के खर्च को दर्शाता है और ‘योजना’ तथा ‘गैर-योजना’ के तहत प्रत्येक के संबंध में अनुमान प्रस्तुत करता है।

अतिरिक्त-बजटीय (Extra-governmental): ये बजट में शामिल न होने वाले सरकारी लेनदेन को संदर्भित करता है।

वित्त विधेयक (Finance Bill): बजट में प्रस्तावित नए कर लगाने, कर प्रस्तावों में परिवर्तन या मौजूदा कर ढाँचे को जारी रखने के लिए संसद में प्रस्तुत विधेयक को वित्त विधेयक कहते हैं।

राजकोषीय नीति रणनीति विवरण (Fiscal Policy Strategy Statement): यह कराधान, खर्च, उधार, निवेश, प्रशासित मूल्य निर्धारण और गारंटी से संबंधित सरकार की रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit): यह सरकार के कुल खर्च और उसकी प्राप्तियों तथा गैर-ऋण पूँजी प्राप्तियों के बीच का अंतर होता है। आय और खर्च के अंतर को दूर करने के लिए हर साल सरकार की ओर से लिया जाने वाला अतिरिक्त कर्ज राजकोषीय घाटा कहलाता है।

राजकोषीय नीति (Fiscal Policy): राजकोषीय नीति वह नीति है, जिसमें सरकार अपने व्यय तथा आय के कार्यक्रम को राष्ट्रीय आय, उत्पादन तथा रोजगार पर वांछित प्रभाव डालने और अवांछित प्रभावों को रोकने के लिए प्रयुक्त करती है।

वित्तीय वर्ष (Fiscal Year): वित्तीय वर्ष सरकार द्वारा लेखाँकन और बजट उद्देश्यों के लिए उपयोग की जाने वाली अवधि है।

सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product): एक वर्ष के दौरान देश में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य है। इसमें बदलाव के आधार पर देश के आर्थिक विकास को मापा जाता है।

आयकर (Income Tax): यह प्रत्येक व्यक्ति की आय पर भारत सरकार द्वारा लगाया जाने वाला एक कर है। आयकर सरकारों के क्षेत्राधिकार के भीतर स्थित सभी संस्थाओं/व्यक्ति द्वारा उत्पन्न वित्तीय आय पर लागू होता है।

मुद्रास्फीति (Inflation): मुद्रास्फीति वस्तुओं और सेवाओं की सामान्य कीमत में वृद्धि है। मुद्रास्फीति को मुद्रा की क्रय शक्ति में गिरावट के रूप में भी परिभाषित किया जा सकता है।

संयुक्त खाता (Joint Account): एक ऐसा खाता, जो दो से अधिक विभाग/संस्था/लोग से संबंधित हो।

मैक्रो-इकोनॉमिक (Macro-Economic): इसमें अर्थशास्त्र में समस्त आर्थिक क्रियाओं का संपूर्ण रूप से अध्ययन किया जाता है। जैसे राष्ट्रीय आय, उत्पादन, रोजगार/बेरोजगारी, व्यापार चक्र, मुद्रा संकुचन, आर्थिक विकास, अंर्तराष्ट्रीय व्यापार, जैसी आर्थिक क्रियाएँ।

माइक्रो-इकोनॉमिक (Micro-Economic): यह शब्द अर्थशास्त्र के उस भाग से संबंधित है, जो व्यक्तिगत बाजारों, कीमतों, उद्योगों, मांग और आपूर्ति जैसे विषयों का अध्ययन करता है।

गैर-योजना व्यय (Non-plan expenditure): सरकार की कर्ज़ अदायगी, पेंशन भुगतान, राज्यों को किया जाने वाला वैधानिक अन्तरण, सुरक्षा, विदेशी मामलों, नोट-सिक्के बनाने, पूर्व निर्मित परिसम्पत्तियों का रख-रखाव, सामाजिक सुविधाओं को पूर्ववत रखने आदि पर किया जाने वाला व्यय ही गैर योजनागत व्यय है।

आउटकम बजट (Outcome Budget): इसका उद्देश्य जिम्मेदारी तय करना है। यानी किसी विभाग या मंत्रालय को आवंटित बजट और उससे निर्धारित व प्राप्त लक्ष्यों का लेखा-जोखा। इससे पता चलता है कि सरकार या कौन विभाग बजटीय अपेक्षाओं पर कितना खरा उतर रहा है।

योजना व्यय (Plan Expenditure): केंद्र सरकार कुल व्यय का एक महत्वपूर्ण अनुपात बनाती है। योजनागत व्यय विभिन्न मंत्रालयों और योजना आयोग द्वारा मिल कर बनाया जाता है। इसमें मोटे तौर पर वे सभी व्यय आते हैं, जो विभिन्न विभागों द्वारा चलाई जा रही योजनाओं पर किया जाता है।

राजस्व (Revenue): सरकार द्वारा अपनी संप्रभु शक्तियों के तहत एकत्रित की गई वार्षिक आय ही राजस्व है।

कर राजस्व (Tax revenue): कोई सरकार टैक्स लगा कर जो रेवेन्यू हासिल करती है, उसे टैक्स रेवेन्यू कहा जाता है। सरकार विभिन्न प्रकार के टैक्स लगाती है। यह सरकार की आय का प्राथमिक और प्रमुख स्रोत है।

मूल्य वर्धित कर (Value-Added Tax): कोई भी उत्पाद विभिन्न चरणों से होकर अंतिम उत्पाद के तौर पर मार्केट में पहुँचता है। ऐसे में उत्पाद के प्रथम चरण की लागत और अंतिम चरण की कीमत पर ही टैक्स लगाया जाता है। VAT से कमोडिटी टैक्स में पारदर्शिता आती है।

शून्य-आधारित बजट (Zero-based budgeting): इसके तहत किसी विभाग या संगठन द्वारा प्रस्तावित खर्च की हर मद को बिलकुल नई मद मानकार या उसका आधार शून्य मानते हुए फिर से मूल्याँकन किया जाता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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