Homeदेश-समाजबच गई आवारा कुत्ते के हमले में घायल 1 साल की बच्ची, लेकिन चेहरे...

बच गई आवारा कुत्ते के हमले में घायल 1 साल की बच्ची, लेकिन चेहरे पर लग गए 115 टाँके: 36 घंटे तक चला मैराथन ऑपरेशन

एमएमजी के ईएनटी विशेषज्ञ डॉक्टर राकेश ने बताया कि लड़की के चेहरे पर कई चोटें थीं, जिसके लिए बहुत छोटे टाँके लगाने पड़े। डॉ महेंद्र और ईएनटी स्पेशलिस्ट ने मिलकर प्राथमिक सर्जरी की।

आवारा कुत्तों के हमलों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। इन कुत्तों के हमलों का शिकार अक्सर छोटे बच्चे बनते हैं। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से इसी तरह की एक और भयानक घटना सामने आई। यहाँ एक साल की बच्ची रिया पर आवारा कुत्ते ने बेरहमी से हमला कर दिया। कुत्ते के हमले में बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई थी। 36 घंटे तक चले ऑपरेशन में पीड़िता को 115 टाँके लगे हैं।

घटना शहर के विजयनगर इलाके की है। एमएमजी जिला अस्पताल में रिया नाम की बच्ची का ऑपरेशन किया गया। रविवार (20 नवंबर, 2022) को घर के बाहर खेल रही बच्ची पर कुत्ते ने हमला कर दिया था। कुत्ते ने हमले के दौरान लड़की के चेहरे से मांस तक नोच लिया था। चेहरे पर जख्म इतने गहरे थे कि बच्ची के दाँत भी बाहर से दिखने लगे थे।

‘अमर उजाला’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एमएमजी के ईएनटी विशेषज्ञ डॉक्टर राकेश ने बताया कि लड़की के चेहरे पर कई चोटें थीं, जिसके लिए बहुत छोटे टाँके लगाने पड़े। डॉ महेंद्र और ईएनटी स्पेशलिस्ट ने मिलकर प्राथमिक सर्जरी की। बच्ची को चेहरे पर लगभग सवा सौ टांके लगे हैं। ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉक्टर राकेश ने बताया कि बच्ची के चेहरे, नाक कान के पास कई स्थानों पर टेढ़े-मेढ़े घाव थे, जिन पर टाँके लगाने पड़े हैं।

बच्चे की हालत अब स्थिर है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची अगले 14-15 दिनों में सामान्य हो जाएगी। सीएमएस डॉ मनोज चतुर्वेदी ने बताया कि इस तरह की सर्जरी के लिए सीरम और एंटी-रेबीज जैसे इंजेक्शन की जरूरत होती है जो सर्जरी के दौरान दिए जाने होते हैं। ये इंजेक्शन काफी महँगे होते हैं और बाहर से मँगवाए जाते हैं। इनकी आपूर्ति सरकार द्वारा नहीं की जाती है।

दूसरी ओर बच्ची के पिता ने आरोप लगाया है कि बच्ची को नोएडा के चाइल्ड पीजीआई अस्पताल ने भर्ती करने से मना कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वहाँ के डॉक्टरों ने पीड़िता को किसी अन्य अस्पताल में रेफर भी नहीं किया। बच्ची के पिता का कहना है निजी अस्पताल ऑपरेशन के लिए बहुत पैसे माँग रहे थे, लेकिन एमजीएम में बेहतर इलाज हो गया। हालाँकि बच्ची के चेहरे पर घाव के निशान रह जाने का खतरा है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

राम-कृष्ण-शिव भी हैं, लेकिन सबसे ऊपर स्वामीनारायण: समझिए- BAPS की शुरुआत से बड़ा बनने की पूरी कहानी

BAPS के मंदिरों में राम, कृष्ण, शिव, पार्वती, गणेश और हनुमान की मूर्तियाँ भी होती हैं लेकिन वो सब मूर्तियाँ स्वामी स्वामीनारायण से छोटी होती हैं। आखिर क्या है इनकी मान्यता?

EC में कैसे आए 3 कमिश्नर? जब राजीव गांधी से भिड़े CEC शास्त्री, तो बदल दिया गया चुनाव आयोग का पूरा गेम

चुनाव आयोग में तीन कमिश्नर्स की व्यवस्था कैसे शुरू हुई? राजीव गाँधी, आरवीएस शास्त्री और टीएन शेषन से जुड़ी पूरी कहानी समझिए।
- विज्ञापन -