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PFI के जिन कट्टरपंथियों ने काटा था केरल में प्रोफेसर का हाथ, उन्हें 13 साल बाद मिली उम्रकैद की सजा: 3 दोषियों को सिर्फ 3 साल की जेल

केस में दोषी ठहराए गए अन्य तीन का नाम एमके नौशा, पीपी मोइदीनकुनु और पीएम अयूब हैं। उन्हें तीन वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई। अदालत ने वसूल की गई जुर्माना राशि में से पीड़िता को 4,00,000 रुपए का मुआवजा देने का भी आदेश दिया।

केरल के एर्नाकुलम में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के ट्रायल कोर्ट ने साल 2010 में एक प्रोफेसर टीजे जोसेफ की हथेली काटकर हत्या के प्रयास के मामले में दोषी ठहराए गए छह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के इस्लामी कट्टरपंथियों में से तीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने गुरुवार (13 जुलाई 2023) को अपना फैसला सुनाते हुए सजील, नजीब और एमके नजर को उम्रकैद की सजा के साथ-साथ 50,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया।

केस में दोषी ठहराए गए अन्य तीन का नाम एमके नौशा, पीपी मोइदीनकुनु और पीएम अयूब हैं। उन्हें तीन वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई। अदालत ने वसूल की गई जुर्माना राशि में से पीड़िता को 4,00,000 रुपए का मुआवजा देने का भी आदेश दिया।

इससे पहले कोर्ट ने सभी छह आरोपितो को भारतीय दंड संहिता, गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दोषी ठहराया था। उन्हें मजहब के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देने का दोषी पाया गया था।

इनके अलावा राष्ट्रीय जाँच एजेंसी अभी भी चार्जशीट में उल्लेखित नाम सवाद की तलाश कर रही है। जो कि प्रोफेसर पर हुए बर्बर हमले में शामिल था और पीएफआई का सदस्य भी था।

बता दें कि टीजे जोसेफ के ऊपर हमला 4 जुलाई 2010 को दिनदहाड़े हुआ था। घटना में उनकी हथेली काट दी गई थी। कट्टरपंथियों ने ये हमला एक प्रश्न-पत्र में पूछे गए सवाल के बाद किया था। प्रोफेसर उस दिन चर्च से लौट रहे थे जब उनके ऊपर अटैक हुआ। साल 2011 में पुलिस ने 27 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। बाद में 20 लोग गिरफ्तार हुए और 2015 में 13 लोगों को दोषी ठहराया गया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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