बुलंदशहर हिंसा मामले में 44 अभियुक्तों पर चलेगा राजद्रोह का मुकदमा

पिछले साल 3 दिसंबर को बुलंदशहर में उस वक़्त हिंसा भड़क उठी थी जब बुलंदशहर के चिंगरावती के पास महाव गाँव के एक खेत में गायों के शव पाए गए थे। प्रदर्शनकारी एक थाने के बाहर इकट्ठा हुए थे और दावा किया था कि उन्हें अपने इलाक़े में गायों के शवों मिले हैं।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार ने बुलंदशहर के चिंगरावती इलाके में हिंसा भड़काने के 44 आरोपितों पर राजद्रोह लगाने की अनुमति दे दी है। बुलंदशहर के कोतवाली स्याना के गाँव चिंगरावती में गोकशी के बाद हुई हिंसा में एक पुलिसकर्मी सहित दो लोगों की जान जाने चली गई थी।

मामले की जाँच कर रहे अधिकारी राघवेंद्र मिश्रा के अनुसार, उन्हें स्याना हिंसा के 44 आरोपितों के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए के तहत राजद्रोह लगाने की मंज़ूरी मिल गई है।

उन्होंने बताया, “इस साल 19 फरवरी को, हमने आधिकारिक तौर पर एक अनुरोध भेजा था, जिसमें आरोपितों के ख़िलाफ़ राजद्रोह लगाने के लिए मंज़ूरी माँगी गई थी। आज, हमें मंज़ूरी पत्र मिल गया है और हमने इसे अदालत में पेश कर दिया है।”

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पिछले साल 3 दिसंबर को बुलंदशहर में उस वक़्त हिंसा भड़क उठी थी जब बुलंदशहर के चिंगरावती के पास महाव गाँव के एक खेत में गायों के शव पाए गए थे। प्रदर्शनकारी एक थाने के बाहर इकट्ठा हुए थे और दावा किया था कि उन्हें अपने इलाक़े में गायों के शवों मिले हैं।

बार-बार शिक़ायत के बाद भी पुलिस की लापरवाही से नाराज़ होकर वे पुलिस से भिड़ गए थे। इसके चलते विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो गया जहाँ पुलिस निरीक्षक सुबोध सिंह ने ग़लती से 17 वर्षीय लड़के सुमित को गोली मार दी। भीड़ द्वारा गोली मारे जाने के बाद इंस्पेक्टर सिंह की भी मौत हो गई थी।

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