Saturday, June 22, 2024
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रेवड़ी बाँटने वालों के पास शिक्षकों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं, DUTA अध्यक्ष ने बताया- AAP सरकार ने प्रोफेसरों से लेकर कर्मचारियों तक की रोकी सैलरी

DUTA अध्यक्ष प्रोफेसर भागी का कहना है कि दिल्ली सरकार फंड की कटौती कर दिल्ली सरकार द्वारा वित्त पोषित कॉलेजों को Self Financing Model पर ले जा रही है और उन्हें विवश किया जा रहा है कि छात्रों की फीस में बढ़ोत्तरी कर कॉलेज के लिए फंड जुटाए। उ

दिल्ली और पंजाब में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी की सरकारें अपने प्रचार पर करोड़ों रुपए खर्च करती हैं, लेकिन जब कर्मचारियों को वेतन देने की बात आती है तो हाथ खड़े कर देती है। दिल्ली सरकार द्वारा वित्त पोषित कॉलेजों के पास अपने कर्मचारियों को देने के लिए पैसे नहीं है। वहीं, पंजाब में AAP सरकार ने कर्मचारियों को अगस्त माह का वेतन एक सप्ताह देर से दिया।

दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज (DDU) आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा फंडेड है। इस कॉलेज की हालत ये है कि इसके पास अपने शिक्षण कर्मचारियों का भुगतान करने के लिए बहुत कम पैसे बचे हैं। इस कारण से कर्मचारियों के वेतन के कुछ हिस्से को रोक लिया है।

इन कर्मचारियों को नोटिस देकर कॉलेज को कहना पड़ा कि वह सहायक प्रोफेसरों की नेट सैलेरी या टेक-होम राशि से 30,000 रुपए और एसोसिएट प्रोफेसरों एवं प्रोफेसरों की नेट सैलेरी से 50,000 रुपए रोक रहा है।

दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध एक कॉलेज है, जिसे 1990 में स्थापित किया गया था। इस कॉलेज की शत-प्रतिशत फंडिंग दिल्ली सरकार द्वारा की जाती है। हालाँकि, आम आदमी पार्टी की सरकार में अब इस कॉलेज को फंड की कमी से जूझना पड़ रहा है।

दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (DUTA) के अध्यक्ष प्रोफेसर अजय कुमार भागी ने ऑपइंडिया को बताया, “यह मामला सिर्फ दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज का नहीं है। दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले 12 कॉलेजों को पिछले 5 सालों से ग्रांट देर से दी जारी है। अब पिछले 2 सालों से इनके ग्रांट में कटौती की जा रही है।”

प्रोफेसर भागी ने कहा कि मामला वेतन में ही नहीं, स्टाफ के पुराने एरियर, एलटीसी, मेडिकल, चाइल्स एजुकेशन आदि भी बकाया है और इनका भुगतान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फंड की कमी के कारण कॉलेजों की प्रशासनिक और भवनों के रख-रखाव पर भी असर पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि दिल्ली देहात के दो महत्वपूर्ण महिला कॉलेजों- अदिति महाविद्यालय और भगिनी निवेदिता कॉलेज की बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है और वो गिरने की कगार पर पहुँच चुकी है। उन्होंने बताया कि फंड की कमी के कारण इन कॉलेजों में मूलभूत सुविधाओं का तक अभाव हो गया है।

प्रोफेसर भागी ने बताया कि इस संबंध में वे पुराने उप-राज्यपाल से लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तक मिल चुके हैं, धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं दे रहा है। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर नए उप-राज्यपाल वीके सक्सेना से मुलाकात कर चुके हैं और उन्होंने दिल्ली सरकार से इस पर जवाब माँगा है।

प्रोफेसर भागी का कहना है कि दिल्ली सरकार फंड की कटौती कर इन कॉलेजों को Self Financing Model पर ले जा रही है और उन्हें विवश किया जा रहा है कि छात्रों की फीस में बढ़ोत्तरी कर कॉलेज के लिए फंड जुटाए।

प्रोफेसर भागी का कहना है कि दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले हायर एजुकेशन संस्थानों में ऐसा किया जा चुका है और अब कॉलेजों को इस दिशा में धकेला जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों पर दबाव बढ़ेगा।

दिल्ली सरकार अक्सर दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बात करती है, लेकिन हकीकत कुछ और है। यही हालात धीरे-धीरे पंजाब में होती जा रही है। पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार ने अपने कर्मचारियों का वेतन देने में विलंब करने लगी है।

पंजाब सरकार ने बुधवार (7 सितंबर 2022) को अपने कर्मचारियों के अगस्त महीने का वेतन देने के लिए 3,400 करोड़ रुपए जारी किया। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सरकार ने 9,000 संविदा और तदर्थ कर्मचारियों को नियमित किया, इसलिए फंड जारी करने में देर हुई।

भाजपा नेता पूनावाला ने इसको लेकर ट्वीट किया, “आप सरकार के पास विज्ञापनों के लिए पैसा है, लेकिन पैसा नहीं है तो 1) पंजाब सरकार के पास कर्मचारियों का वेतन देने के लिए, 2) पंजाब में गरीबों का मुफ्त इलाज देने वाले अस्पतालों का पैसा रिमबर्स करने के लिए, 3) दिल्ली के डीडीयू कॉलेज के शिक्षकों के वेतन देने के लिए, 4) पदक जीतने वाले और भारत को गौरवान्वित करने वाले एथलीटों के लिए।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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