पाकिस्तानी होने के कारण गॅंवाया मकान, हिन्दुस्तानी बन पाया घर: अदनान सामी

ट्रिब्यूनल के फैसले पर मशहूर गायक ने जताई खुशी। कहा- 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाए जाने का गम नहीं। बतौर विदेशी नागरिक संपत्ति खरीदने से पहले आरबीआई की इजाजत नहीं लेने के कारण लगा जुर्माना।

पाकिस्तानी से हिंदुस्तानी बने मशहूर गायक अदनान सामी से 2010 में ज़ब्त हुए 8 फ़्लैट और 5 पार्किंग स्पेस उन्हें लौटा दिए गए हैं। ED द्वारा ज़ब्त की गई इन सम्पत्तियों की खरीद में ED को विदेशी मुद्रा विनिमय प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघन का शक था, जिसे नई दिल्ली की एक अपीली ट्रिब्यूनल ने ख़ारिज कर दिया है।

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार ED ने 2003 में खरीदी गई इन सम्पत्तियों को ज़ब्त इसलिए कर लिया था, क्योंकि उसे शक था कि इसके लिए विदेशी मुद्रा का उपयोग बिना RBI की पूर्वानुमति लिए किया गया है। किसी विदेशी द्वारा अचल सम्पत्ति खरीदे जाने के मामले में यह इजाजत ज़रूरी है। जनवरी 2016 में हिंदुस्तानी बन जाने वाले अदनान सामी उस समय पाकिस्तान के ही नागरिक थे। इसके अलावा अदनान पर प्रवर्तन निदेशालय ने ₹20 लाख का जुर्माना भी लगाया था। इसमें से ₹10 लाख सामी ने सरकार को दे दिए हैं।

ED द्वारा सम्पत्ति अटैच किए जाने के महज़ कुछ दिनों पहले RBI से संपर्क कर सामी ने बैकडेट में उन्हें खरीद की अनुमति देने की गुज़ारिश की थी। अपीली ट्रिब्यूनल के चेयरमैन जस्टिस मनमोहन सिंह ने उनकी सम्पत्ति तो लौटा दी, लेकिन RBI से ज़रूरी अनुमति न लेने के लिए उन पर लगे जुर्माने को ₹50 लाख कर दिया।

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इसमें से बकाया ₹40 लाख उन्हें तीन महीने के भीतर जमा करने हैं। ट्रिब्यूनल ने इसके अलावा बैंक अधिकारियों और रियल एस्टेट कम्पनी के प्रतिनिधियों द्वारा 2010 में दिए गए बयान के आधार पर ED की जाँच की आलोचना की है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि 2010 में उन्हें सामी के पाकिस्तानी होने के बारे में पता नहीं था। बैंक अधिकारियों ने क़र्ज़ पाने में सामी की सहायता की थी।

हिंदुस्तान टाइम्स ने अदनान सामी के भावुक हो जाने का दावा करते हुए कहा कि यह जीत उनकी पत्नी रोया फरयाबी के जन्मदिन के दिन मिली है। इससे यह और भी ‘स्पेशल’ हो जाती है। “यह नौ सालों का संघर्ष था। हिंदुस्तानी होने के नाते ख़ुशी है क़ि न्याय की जीत हुई है। खून-पसीने-आँसुओं से जो भी कमाया था, वापिस मिल गया है।”

इसके अलावा उन्होंने ट्विटर पर भी चुटकी लेते हुए कहा कि पाकिस्तानी नागरिक के तौर पर जो गलती हुई, उसका हर्जाना भरने का उन्हें अफ़सोस नहीं है। महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तानी के तौर पर जो मकान मैंने खोया था, वह एक हिंदुस्तानी होने पर मुझे ‘घर’ के रूप में मिल गया। यानी एक पाकिस्तानी का मकान गया, और एक हिंदुस्तानी को उसका ‘घर’ मिला”।

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