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DRDO तैयार, बस एक मंजूरी का इंतजार… अग्नि-6 मिसाइल का लॉन्च करीब, जानें- कैसे दुश्मन का काल बनेगी यह ICBM और क्या होंगी इसकी खासियत

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार अग्नि-6 की रेंज 10,000 से 12,000 किलोमीटर तक हो सकती है, जबकि हल्के पेलोड के साथ यह 14 से 16 हजार किलोमीटर तक भी पहुँच सकती है। इसका मतलब यह है कि भारत की सामरिक पहुँच एशिया से आगे यूरोप, अफ्रीका और कई अन्य हिस्सों तक आसानी से पहुँच जाएगी।

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध और तेजी से बदलती वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियों ने दुनिया को यह दिखा दिया है कि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ टैंक और लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं रह गया है। लंबी दूरी की मिसाइलें, हाइपरसोनिक हथियार और ड्रोन अब किसी भी देश की सैन्य ताकत का सबसे अहम हिस्सा बन चुके हैं।

इसी बदलते माहौल में भारत भी अपनी सामरिक क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। इसी कड़ी में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख डॉ समीर वी कामत ने बड़ा संकेत देते हुए कहा है कि भारत की अगली पीढ़ी की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (Intercontinental Ballistic Missile) अग्नि-6 के विकास के लिए संगठन पूरी तरह तैयार है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब केवल केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार है और अनुमति मिलते ही इस परियोजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा। डॉ कामत ने यह भी बताया कि भारत केवल अग्नि-6 ही नहीं बल्कि हाइपरसोनिक ग्लाइड और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों पर भी तेजी से काम कर रहा है।

उनके अनुसार, भारत की नई मिसाइल रणनीति में छोटी, मध्यम और लंबी दूरी की मिसाइलों का संतुलित मिश्रण होगा ताकि हर तरह की सामरिक जरूरत को पूरा किया जा सके।

अग्नि-6 आखिर क्यों है इतनी खास?

अग्नि-6 को भारत की अब तक की सबसे उन्नत और सबसे लंबी दूरी तक हमला करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल माना जा रहा है। फिलहाल भारत के पास अग्नि-5 मिसाइल है जिसकी मारक क्षमता 5000 किलोमीटर से अधिक है लेकिन अग्नि-6 उससे कहीं ज्यादा शक्तिशाली होगी।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इसकी रेंज 10,000 से 12,000 किलोमीटर तक हो सकती है जबकि हल्के पेलोड के साथ यह 14 से 16 हजार किलोमीटर तक भी पहुँच सकती है। इसका मतलब यह है कि भारत की सामरिक पहुँच एशिया से आगे यूरोप, अफ्रीका और कई अन्य हिस्सों तक आसानी से पहुँच जाएगी।

यह क्षमता भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला सकती है जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी ICBM क्षमता मौजूद है। अग्नि-6 केवल लंबी दूरी की मिसाइल नहीं होगी बल्कि इसमें आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा जिससे इसे रोकना बेहद मुश्किल हो सकता है।

माना जा रहा है कि इसमें MIRV यानी मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल तकनीक होगी। इसका मतलब यह है कि एक ही मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों पर एक साथ हमला कर सकेगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, ये मिसाइल एक साथ कई परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम हो सकती है। हर वारहेड अलग दिशा में जाकर अलग लक्ष्य को निशाना बना सकेगा।

अग्नि-5 से कितनी अलग होगी नई मिसाइल?

भारत ने हाल के वर्षों में अग्नि-5 का सफल MIRV परीक्षण किया है। इससे साफ है कि देश अब उन्नत परमाणु प्रतिरोध क्षमता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। लेकिन अग्नि-6 को अग्नि-5 से भी ज्यादा आधुनिक माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें नई पीढ़ी की गाइडेंस प्रणाली, बेहतर नेविगेशन तकनीक और लक्ष्य भेदने की अधिक सटीक क्षमता होगी।

इसके अलावा इसमें मैन्युवरेबल री-एंट्री व्हीकल यानी MaRV तकनीक का उपयोग भी किया जा सकता है। यह तकनीक मिसाइल को वातावरण में दोबारा प्रवेश करने के बाद दिशा बदलने की क्षमता देती है। इससे दुश्मन के रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोकना और भी कठिन हो जाता है।

बताया जा रहा है कि अग्नि-6 में रडार से बचने वाली विशेष कोटिंग और डिकॉय सिस्टम भी लगाए जा सकते हैं। डिकॉय यानी नकली लक्ष्य ऐसे उपकरण होते हैं जो दुश्मन के रडार को भ्रमित करते हैं। इससे वास्तविक वारहेड को रोकना मुश्किल हो जाता है। मिसाइल की गति भी बेहद खतरनाक मानी जा रही है।

अनुमान है कि यह लगभग 30 हजार किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार हासिल कर सकती है। इतनी तेज गति के कारण लक्ष्य को बचाव का बहुत कम समय मिलेगा।

भारत की हाइपरसोनिक मिसाइल योजना कितनी आगे पहुँची?

DRDO प्रमुख समीर कामत ने केवल अग्नि-6 की ही चर्चा नहीं की, बल्कि भारत की हाइपरसोनिक मिसाइल परियोजनाओं को लेकर भी अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत इस समय हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल दो प्रकार की हाइपरसोनिक प्रणालियों पर काम कर रहा है।

कामत के अनुसार, फिलहाल ग्लाइड मिसाइल कार्यक्रम ज्यादा उन्नत स्थिति में है और इसका परीक्षण जल्द हो सकता है। यह मिसाइल शुरुआत में एक बूस्टर की मदद से अत्यधिक गति प्राप्त करती है और फिर बिना इंजन के हवा में ग्लाइड करते हुए लक्ष्य तक पहुँचती है।

दूसरी तरफ हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल स्क्रैमजेट इंजन की मदद से पूरी उड़ान के दौरान शक्ति प्राप्त करती रहती है। दोनों प्रणालियाँ ध्वनि की गति से कई गुना तेज रफ्तार से उड़ान भर सकती हैं। भारत का LR-AShM यानी लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

यह मिसाइल विशेष रूप से नौसेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। इसकी संभावित गति मैक-10 तक हो सकती है, यानी ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज। इसकी रफ्तार लगभग 12 हजार किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुँच सकती है।

इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम ऊँचाई पर उड़ान भरते हुए रास्ते में दिशा बदल सकती है। इससे दुश्मन के रडार सिस्टम के लिए इसे पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है।

कैसी होगी भारत की नई मिसाइल फोर्स?

भारत अब केवल परमाणु प्रतिरोध तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि पारंपरिक मिसाइल ताकत को भी नई दिशा देने की तैयारी में है। DRDO प्रमुख ने संकेत दिया कि भविष्य में भारत की ‘कन्वेंशनल मिसाइल फोर्स’ में अलग-अलग दूरी और भूमिकाओं के लिए कई प्रकार की मिसाइलें शामिल होंगी।

इसमें कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें, मध्यम दूरी की मिसाइलें, लंबी दूरी की प्रणालियाँ, क्रूज मिसाइलें और हाइपरसोनिक हथियार शामिल किए जा सकते हैं। प्रलय जैसी शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें अब अंतिम परीक्षण चरण में हैं और जल्द सेना में शामिल हो सकती हैं।

इसके अलावा कुछ मौजूदा रणनीतिक मिसाइलों को सामरिक उपयोग के लिए भी बदला जा सकता है। भारत की यह रणनीति एक मल्टी-लेयर्ड यानी बहुस्तरीय मिसाइल नेटवर्क तैयार करने की है, जिसमें हर परिस्थिति के लिए अलग विकल्प मौजूद हों। इससे किसी भी संभावित संघर्ष की स्थिति में भारत की जवाबी क्षमता और अधिक मजबूत होगी।

भारत की सामरिक ताकत को मिलेगा नया आयाम

अग्नि-6 केवल एक नई मिसाइल परियोजना नहीं है, बल्कि यह भारत की बदलती सामरिक सोच का प्रतीक भी है। दुनिया तेजी से ऐसी सैन्य प्रतिस्पर्धा की ओर बढ़ रही है जहाँ लंबी दूरी तक तेज और सटीक हमला करने की क्षमता सबसे बड़ा हथियार बन चुकी है।

अगर केंद्र सरकार इस परियोजना को मंजूरी देती है तो भारत की सामरिक क्षमता में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अग्नि-6, हाइपरसोनिक हथियारों और नई मिसाइल फोर्स के साथ भारत उन देशों की कतार में और मजबूती से खड़ा होगा जिनकी सैन्य तकनीक वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालती है।

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सौम्या सिंह
सौम्या सिंह
ख़ुद को तराशने में मसरूफ़

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