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लोकल के लिए वोकल: रंगीन ब्लॉक प्रिंट, कांथा सिलाई और मधुबनी प्रिंट वाले आगरा के खादी के जूते देश-दुनिया में छा जाने को तैयार

रंगीन ब्लॉक प्रिंट, कांथा सिलाई और मधुबनी प्रिंट ऐसे कई सैंपल उदाहरण के तौर पर खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) को भेजे गए हैं। जो उत्पादन शरू करने के लिए अंतिम डिजाइनों को मंजूरी देंगे। खादी के 26 जोड़ी जूतों को डिजाइन करने वाली श्रुति कौल ने बताया कि उनके द्वारा देश भर से उदाहरणों को शामिल करने की कोशिश की जा रही है।

कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लोकल के लिए वोकल’ बनने के कथन की रूपरेखा जल्द ही आगरा में मूर्तरूप लेने जा रही है। दरअसल, ताजनगरी में अब जल्द ही स्वदेशी खादी के जूते तैयार किए जाएँगे। इसके लिए हाल ही में खादी ग्रामोद्योग ने खादी के जूते बनाने के लिए शहर की डाबर फुटवियर इंडस्ट्रीज और त्रिशुलि कलेक्शन से संपर्क भी किया था। जूते तैयार होने के बाद उनके सैंपल को खादी मंत्रालय भेज दिया गया है।

रंगीन ब्लॉक प्रिंट, कांथा सिलाई और मधुबनी प्रिंट ऐसे कई सैंपल उदाहरण के तौर पर खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) को भेजे गए हैं। जो उत्पादन शरू करने के लिए अंतिम डिजाइनों को मंजूरी देंगे। खादी के 26 जोड़ी जूतों को डिजाइन करने वाली श्रुति कौल ने बताया कि उनके द्वारा देश भर से उदाहरणों को शामिल करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि ये जूते हाथ से भी धोए जा सकेंगे।

गौरतलब है कि खादी ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन विनय सक्सेना ने स्वदेशी खादी को बढ़ावा देने के लिए आगरा के फुटवियर कारोबारी पूरन डावर से कुछ दिनों पहले संपर्क किया था। उन्होंने आगरा में खादी के जूते तैयार करने के लिए कहा था जिससे खादी को बढ़ावा मिले और खादी से जुड़े लोगों को रोजगार भी दिया जा सके।

आगरा फुटवियर मैन्यूफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर के अध्यक्ष पूरन डावर ने इस संबंध में बताया कि वो लोग खादी के जूते बनाने के लिए तैयार हैं। डावर शूज के साथ त्रिशुलि कलेक्शन की श्रुति कौल ने सैंपलिंग कराकर दिल्ली मंत्रालय को भेज दी है। पूरन डावर ने कहा कि खादी ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन ने खादी के जूते तैयार करने में काफी दिलचस्पी दिखाई।

खादी के जूते की लागत चमड़े के जूते से सस्ती और यह टिकाऊ भी रहेगा। कई लोग चमड़े के जूते पहनने से परहेज करते हैं, उनको भी यह जूते रास आएँगे। उन्होंने कहा कि आगरा में जूता उद्योग घरेलू बाजार का 65% हिस्सा है। हम उत्पादन शुरू कर देंगे। खादी के जूते तैयार करने की अनुमति मिलने के बाद यह एक नया प्रयोग होगा।

वहीं श्री क्षेत्रीय गाँधी आश्रम मंत्री शंभू नाथ चौबे ने बताया कि खादी ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन विनय सक्सेना ने खादी के जूते बनाने के लिए शहर के दो कारोबारी से संपर्क किया था। डाबर शूज के सात सैंपल, त्रिशुलि कलेक्शन से 15 सैंपल तैयार कर दिल्ली भेजे गए हैं। मंत्रालय में इसकी सैंपलिंग भी दिखा दी गई है। जल्द ही पूरे भारत के लोग आगरा में तैयार खादी का जूता पहनेंगे।

उल्लेखनीय है कि ताजनगरी में खादी का कारोबार करीब पाँच से छह करोड़ तक पहुँचता है लेकिन खादी के जूते बनने के बाद आगरा के फुटवियर इंडस्ट्रीज को न सिर्फ बड़ा ऑर्डर मिलेगा, बल्कि खादी का कारोबार भी देशभर में बढ़ेगा। बताया जा रहा है कि पहले खादी के लेडीज जूते तैयार होंगे। देश भर के खादी स्टोरों में इसकी सप्लाई आगरा से की जाएगी। लेडीज जूते की बिक्री की संभावना अधिक जताई जा रही है। क्योंकि इस पर रंगीन ब्लॉक प्रिंट, कांथा सिलाई और मधुबनी प्रिंट जैसी कारीगरी की गई होगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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