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कब करें किसकी खेती, कौन सी डालें मिट्टी-खाद… सब जानकारी देगा ‘भारत विस्तार’ : केंद्र ने किसानों के लिए लॉन्च किया डिजिटल प्लेटफॉर्म, जानें खासियत

किसानों को खेती से जुड़े हर समस्या के समाधान के लिए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 'भारत विस्तार' ऐप लॉन्च किया है। इसके द्वारा मौसम पूर्वानुमान, फसलों की क्वालिटी, कीटों से निजात, मिट्टी और खाद से जुड़े हर सवाल का जवाब किसानों को मिलेगा।

2026-2027 के बजट को पेश करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की थीं। इन्हीं घोषणाओं में एक एआई डिजिटल प्लैटफॉर्म को लॉन्च करने को लेकर थी। इसको साकार करते हुए ‘भारत‑VISTAAR’ नाम के डिजिटल प्लेटफॉर्म को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को समर्पित किया।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे लॉन्च करते हुए कहा कि इस ऐप के जरिए पूरी कृषि व्यवस्था को जोड़ेंगे। सरकारी योजनाओं की जानकारी, किसी के खिलाफ शिकायत से लेकर आपके खेत को क्या जरूरी है, उसमें क्या उपजाएँ, नमी, कीटों की समस्या और उससे निजात के उपाए समेत तमाम दिक्कतों का समाधान होगा।

इस ऐप का उद्देश्य कृषि से जुड़ी जानकारी, वैज्ञानिक सलाह और सरकारी संसाधनों को एक ही डिजिटल इंटरफेस पर एकीकृत करना है। यह प्लेटफ़ॉर्म भारत के AgriStack पोर्टल, जिसमें किसानों के डिजिटल रिकॉर्ड, फसल डेटा और कृषि सूचनाएँ हैं, को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिक कृषि अभ्यास और AI सिस्टम से जोड़ता है। इसका उद्देश्य खेती से जुड़े फैसलों को सरल, त्वरित और डेटा-आधारित बनाना है।

सरकार ने इस ऐप को लॉन्च करते समय जो विजन रखा है, अगर वो सफल होता है तो कृषि क्षेत्र में क्रांति आ जाएगी। इसके जरिए

  • स्थानीय भाषाओं में कृषि सलाह, मौसम सूचना, मिट्टी का विश्लेषण और फसल-विशिष्ट सुझाव देगा, जिससे भारत के छोटे और सीमांत किसानों तक उपयोगी जानकारी आसानी से पहुँचेगी।
  • उन्नत AI तकनीक के माध्यम से यह प्लेटफ़ॉर्म मौसम, मिट्टी, बाजार भाव, कीट और रोगों से निपटने के उपाय जैसे डेटा-आधारित सुझाव देगा।
  • किसान इस सिस्टम के जरिए सरकारी कृषि योजनाओं के बारे में जान सकते हैं, आवेदन कर सकते हैं और उनमें प्रगति को ट्रैक कर सकते हैं।

किसानों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा

इस ऐप की मदद से किसानों को मौसम पूर्वानुमान, मिट्टी की स्थिति, बीज और उर्वरक चयन जैसी सलाह मिल सकती है, जिससे खेती में निर्णय अधिक वैज्ञानिक और सटीक होंगे। इससे कृषि जोखिम, जैसे मौसम-आधारित नुकसान और फसल विफलता की संभावना कम हो सकती है।

AI-आधारित सलाह किसानों को सही समय पर संसाधनों का उपयोग (जैसे पानी, उर्वरक और कीटनाशक) करने में मदद करती है, जिससे खेती की लागत कम होने और फसल उत्पादन बढ़ने की संभावनाएँ मजबूत होती हैं। बहुत से छोटे किसानों के लिए भाषा एक बड़ी बाधा होती है। ‘भारत विस्तार’ में स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे किसान समझदारी से तकनीकी सलाह ले सकते हैं, जो पहले मुश्किल था।

AI टूल को शुरू में हिंदी और इंग्लिश में लॉन्च किया गया है। इसके बाद गुजराती, बांग्ला, पंजाबी, तेलुगू, तमिल, कन्नड़ समेत 11 क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध हो जाएँगे। इसके लिए कृषि मंत्रालय ने ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान राज्यों के साथ MoU साइन किए हैं। यहाँ ट्रायल शुरू हो गया है।

कृषि मंत्री ने भारत- अमेरिका ट्रेड डील को लेकर भी कहा कि दूध, घी, दही, पनीर कोई भी डेयरी और उत्पाद जो दूध से संबंधित हैं, भारत की धरती पर किसी भी कीमत पर नहीं आएगा, ताकि हमारे दूध उत्पादक किसानों को कोई नुकसान न हो। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियाँ आरोप लगा कर किसानों में डर पैदा करने की कोशिश कर रही हैं, जो पूरी तरह निराधार है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के शासन में 20 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद का आयात होता था और डेयरी उत्पाद भी आयात किए जाते थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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