अहमदाबाद स्थित गुजरात यूनिवर्सिटी में हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान हंगामा हो गया। यह प्रदर्शन कार्यक्रम एक RSS से जुड़े एक थिंक टैंक और गुजरात यूनिवर्सिटी के द्वारा आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान कॉन्ग्रेस की छात्र इकाई NSUI के करीब 10-15 कार्यकर्ता वहाँ पहुँचे और हंगामा शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शनी में लगे पोस्टर फाड़ दिए और महापुरुषों का अपमान किया। इतना ही नहीं, NSUI गुजरात ने इस घटना के वीडियो और तस्वीरें अपने सोशल मीडिया पेज पर भी साझा किए। इस मामले में खुद गुजरात यूनिवर्सिटी ने शिकायतकर्ता के रूप में FIR दर्ज कराई है।
यह मामला सोमवार (23 फरवरी 2026) का है। गुजरात यूनिवर्सिटी में RSS से जुड़े एक थिंक टैंक और विश्वविद्यालय ने मिलकर ‘राष्ट्रीय संगोष्ठी- भारत की ग्लोबल भूमिका’ शीर्षक से एक प्रदर्शनी का आयोजन किया था। इस प्रदर्शनी में RSS से जुड़ी कई बातों को शोध और साक्ष्यों के आधार पर प्रस्तुत किया गया था। प्रदर्शनी में पोस्टरों के माध्यम से संघ और बाबासाहेब अंबेडकर के संबंध, सरदार पटेल के साथ संबंध और महात्मा गाँधी के संघ को लेकर विचारों को दर्शाया गया था।
वहाँ पोस्टर, स्लाइड्स और प्रमाणों के जरिए पूरी जानकारी प्रदर्शित की गई थी। इस प्रदर्शनी को देखने के लिए करीब 400 से 500 लोग पहुँचे थे। इसी दौरान करीब दोपहर 12:15 बजे NSUI के कार्यकर्ता अचानक वहाँ पहुँचे और नारेबाजी करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्होंने पोस्टर फाड़ दिए और प्रदर्शनी को रुकवा दिया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस मौके पर पहुँची और सभी को हिरासत में ले लिया। मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।
‘भारत माता और महापुरुषों का भी अपमान किया गया’: ABVP
ऑपइंडिया से बातचीत में ABVP के कर्णावती महानगर के मंत्री ध्रुमिल अखानी ने कहा कि प्रदर्शनी में लगाए गए सभी पोस्टर रिसर्च पर आधारित थे और सबूत भी लगाए गए थे। यानी जो भी सबूत और डॉक्यूमेंट्स मिले, उनका इस्तेमाल करके एक एग्जिबिशन लगाई गई थी। जैसे जब बाबासाहेब अंबेडकर ने चुनाव लड़ा तो संघ का क्या सहयोग था, संघ के लिए उनके क्या विचार थे, गाँधी के संघ के लिए क्या विचार थे और सरदार पटेल के क्या विचार थे, इन सभी बातों की स्लाइड्स बनाई गई थीं।
सरदार पटेल और पूर्व सरसंघचालक गुरु गोलवलकर के बीच हुए पत्राचार को भी दिखाया गया था। यह पूरा प्रोग्राम भारत की ग्लोबल भूमिका पर विचार-विमर्श के लिए था लेकिन फिर भी NSUI के कार्यकर्ता वहाँ आए और हंगामा किया और सभी पोस्टर फाड़ दिए।
ABVP के मंत्री ने कहा कि उनके नेता हाथों में संविधान की कॉपी लेकर चलते हैं लेकिन वे संविधान बनाने वाले का अपमान करते हैं। प्रदर्शन में NSUI कार्यकर्ताओं ने बाबा साहेब पर ब्लेड फेंके थे, इसी तरह गाँधी और सरदार पटेल पर भी ब्लेड फेंके गए। परिषद ने कहा कि आरोपितों ने इंडिया लिखा हुआ एक होर्डिंग भी फाड़ दिया। उन्होंने इस पूरी घटना को भारत की एकता और अखंडता को तोड़ने की साजिश बताया है।
आरोपितों ने वहाँ वीर सावरकर का अपमान भी किया। उन्हें ‘माफी माँगने वाला’ कहा गया और बार-बार विवादित नारे लगाए गए। इसके अलावा उन्होंने संघ पर भी हमला किया और दावा किया कि देश के विकास और आजादी में संघ का कोई रोल नहीं है।
गौरतलब है कि NSUI ने संघ पर समाज में गलत जानकारी फैलाने और यूनिवर्सिटी में अपनी सोच का प्रचार करने का आरोप लगाया था। यह भी आरोप लगाया गया था कि अंबेडकर और सरदार पटेल के बारे में सिर्फ कुछ खास जानकारी ही दिखाई गई। ABVP ने इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने के आरोपों को खारिज कर कहा कि यह प्रदर्शनी रिसर्च और सबूतों पर आधारित थी। NSUI कार्यकर्ताओं के हंगामे के विरोध में ABVP ने भी विरोध प्रदर्शन किया था और सख्त कार्रवाई की माँग की।
अब पता चला है कि गुजरात यूनिवर्सिटी ने खुद कई NSUI कार्यकर्ताओं, जिनमें नमजोग और दूसरे लोग शामिल हैं, के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है और इस घटना में शामिल सभी छात्रों पर बैन भी लगा दिया गया है और उनके एडमिशन भी कैंसिल कर दिए गए हैं। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

गुजरात यूनिवर्सिटी का कहना है कि यह घटना भारत माता, बाबासाहेब अंबेडकर, वीर सावरकर और अन्य महापुरुषों का अपमान है। विश्वविद्यालय ने यह भी तर्क दिया कि इस घटना से करोड़ों हिंदुओं की भावनाएँ आहत हुई हैं। फिलहाल आरोपितों की स्थिति को लेकर जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन FIR दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जिन आरोपितों की पहचान हुई है, उनमें आरोपितों की पहचान चिराज दर्जी, नारायण भरवाड़, यशराज सिंह खेर, शिवराज सिंह बराड़, संजय सोलंकी, मीत पनारा, कशिश डामोर, हर्ष चौहान और पृथ्वी देसाई सहित अन्य लोग शामिल हैं।
इस घटना को लेकर ABVP ने भी कड़ी आलोचना की है। परिषद का आरोप है कि NSUI बार-बार इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रही है, जिससे देश को नुकसान पहुँचता है। परिषद ने हाल ही में दिल्ली में AI समिट के दौरान यूथ कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए ‘नग्न प्रदर्शन’ का भी जिक्र किया और कहा कि इस प्रकार की घटनाएँ एक जिम्मेदार लोकतंत्र पर धब्बा हैं।
(यह खबर मूल रूप से गुजराती में लिखी गई है जिसे इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं)


