Wednesday, April 24, 2024
Homeदेश-समाजपुलिस फोर्स की धर्मनिरपेक्ष छवि होनी चाहिए, अनुच्छेद 25 के तहत पुलिसकर्मियों को दाढ़ी...

पुलिस फोर्स की धर्मनिरपेक्ष छवि होनी चाहिए, अनुच्छेद 25 के तहत पुलिसकर्मियों को दाढ़ी रखने का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

कोर्ट ने कहा, "कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि उचित वेश-भूषा को बनाए रखना अनुशासित बल के सदस्यों की पहली और सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है।"

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक फैसला सुनाते हुए कहा कि पुलिस बल के जवान को दाढ़ी रखने के लिए अनुच्छेद 25 के तहत कोई मौलिक अधिकार नहीं है। एक पुलिस अधिकारी का दाढ़ी न कटाना, न केवल गलत व्यवहार है, बल्‍कि उस अधिकारी द्वारा किया गया दुराचार, कुकृत्य और अपराध है।

जस्टिस राजेश सिंह चौहान की बेंच ने कहा कि पुलिस बल को एक अनुशासित बल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून लागू करने वाली एजेंसी होने के नाते यह आवश्यक है कि ऐसे बल की एक धर्मनिरपेक्ष छवि हो, जो राष्ट्रीय एकता के भाव को मजबूत करे।

दरअसल कोर्ट उत्तर प्रदेश पुलिस के एक कॉन्स्टेबल की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। कॉन्स्टेबल ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के 2020 के परिपत्र के खिलाफ याचिका दा‌खिल किया था, जिसमें एक अनुशासित बल के सदस्य के लिए उचित वर्दी और उचित पहनावे के संबंध में कुछ दिशानिर्देश जारी किए गए थे। विभागीय जाँच में यह पाए जाने के बाद कि अनुशासित बल का सदस्य होने के बावजूद कॉन्स्टेबल मोहम्मद फरमान ने अपनी दाढ़ी नहीं कटाई है और दाढ़ी कटाने के लिए वरिष्ठ अधिकारी द्वारा विशेष तौर पर निर्देश जारी किए जाने के बावजूद उसने ऐसा नहीं किया है, उसे निलंबित कर दिया गया था।

फरमान ने पुलिस उप महानिरीक्षक/ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, अयोध्या (फैजाबाद) द्वारा जारी निलंबन और उस आदेश को भी चुनौती दी, जिसमें मुस्लिम धर्म के सिद्धांतों के अनुसार दाढ़ी बनाए रखने की अनुमति माँगने वाले उनके आवेदन को खारिज कर दिया गया था। आदेश कोर्ट ने कहा कि अनुशासित बल के सदस्यों के लिए उचित वेश-भूषा के संबंध में दिशा-निर्देश जारी करना सक्षम प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र में है। कोर्ट ने कहा, “कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि उचित वेश-भूषा को बनाए रखना अनुशासित बल के सदस्यों की पहली और सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है।”

इसके अलावा, कॉन्स्टेबल फरमान के खिलाफ जारी आरोप पत्र में कोई दोष या अवैधता नहीं पाते हुए कोर्ट ने कहा, “इसलिए, इस आशय से अवगत कराने के बावजूद कि पुलिसकर्मी दाढ़ी नहीं रख सकते क्योंकि यह उच्च अधिकारियों द्वारा जारी निर्देश/परिपत्र का उल्लंघन है।”

इस बात पर जोर देते हुए कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 25 इस संबंध में पूर्ण अधिकार प्रदान नहीं करता है, न्यायालय ने कहा कि अनुशासित बल के सदस्य के दाढ़ी रखने को भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षित नहीं किया जा सकता है। साथ ही कोर्ट ने मोहम्मद जुबैर कॉर्पोरल नंबर 781467-जी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य [(2017) 2 एससीसी 115] का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष वादी यह स्थापित नहीं कर सका था कि क्या इस्लाम में कोई विशिष्ट जनादेश है, जो बालों को काटने या चेहरे के बालों को साफ करने पर रोक लगाता है। 

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष कोई ठोस सामग्री नहीं रखी गई ताकि यह विश्वास दिलाया जा सके कि इस्लाम को मानने वाले पुलिसकर्मी उसकी दाढ़ी या बाल नहीं काट सकते। यह मानते हुए कि आरोप-पत्र में तय आरोप प्रथम दृष्टया, जाँच अधिकारी के विशिष्ट निष्कर्षों के आधार पर कदाचार है, न्यायालय ने रिट याचिका को खारिज कर दिया।

गौरतलब है कि पिछले दिनों एक ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से सामने आया था। जिले के रमाला थाने में बतौर सब इंस्पेक्टर (एसआई) तैनात इंतसार अली ने बिना अनुमति पिछले कुछ समय से लंबी दाढ़ी रखी हुई थी, नतीजतन उन्हें पुलिस अधीक्षक ने निलंबित कर दिया गया था।

हालाँकि, बाद में इंतसार अली ने अपनी दाढ़ी कटवा ली। दाढ़ी कटवाने के बाद शनिवार (अक्टूबर 24, 2020) को वह एसपी बागपत के समक्ष पेश हुए, जिसके बाद एसपी अभिषेक सिंह ने उनका निलंबन वापस लेते हुए उन्हें बहाल कर दिया। 

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘नरेंद्र मोदी ने गुजरात CM रहते मुस्लिमों को OBC सूची में जोड़ा’: आधा-अधूरा वीडियो शेयर कर झूठ फैला रहे कॉन्ग्रेसी हैंडल्स, सच सहन नहीं...

कॉन्ग्रेस के शासनकाल में ही कलाल मुस्लिमों को OBC का दर्जा दे दिया गया था, लेकिन इसी जाति के हिन्दुओं को इस सूची में स्थान पाने के लिए नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री बनने तक का इंतज़ार करना पड़ा।

‘खुद को भगवान राम से भी बड़ा समझती है कॉन्ग्रेस, उसके राज में बढ़ी माओवादी हिंसा’: छत्तीसगढ़ के महासमुंद और जांजगीर-चांपा में बोले PM...

PM नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस खुद को भगवान राम से भी बड़ा मानती है। उन्होंने कहा कि जब तक भाजपा सरकार है, तब तक आपके हक का पैसा सीधे आपके खाते में पहुँचता रहेगा।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
282,677FollowersFollow
417,000SubscribersSubscribe