Tuesday, October 4, 2022
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‘छुआछूत के कारण ही हिंदू धर्म का अस्तित्व है’: जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल की प्रोफेसर श्रुति पांडेय ने इस्लाम की तारीफ की

श्रुति पांडेय ने इस्लाम की तारीफ करते हुए उसके विधवा पुनर्विवाह नियमों को हिन्दू धर्म के मुकाबले सरल और सराहनीय बताया। इसी के साथ श्रुति पांडेय ने इस्लाम को गलत बताने वालों पर भी अफ़सोस जाहिर किया।

मानवाधिकार एडवोकेट और जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल में सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स की निदेशक श्रुति पांडे द्वारा शनिवार (9 अक्टूबर 2021) को किए गए दावे ने विवाद खड़ा कर दिया है। श्रुति पांडेय ने कहा था कि सभी हिन्दू अस्पृश्यता (छुआछूत) का पालन करते हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में श्रुति पांडे ने कहा, “लॉ स्कूल में पढ़ाने वाले मेरे प्रोफेसर उपेंद्र बख्शी कहते थे कि हर हिंदू छुआछूत का पालन करता है … जब उन्होंने शुरू में ऐसा कहा तो मैंने सोचा कि ऐसा नहीं है .. लेकिन दोस्तों यह सच है। अपने आप को ही देखिए, आप कैसे शांत और अदृश्य तरीकों से अस्पृश्यता का पालन करते हैं, जिसे हम समझ भी नहीं पाते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “यह लिंग (जेंडर) की तरह आंतरिक है। इसलिए मेरे अनुसार हर हिंदू अस्पृश्यता का पालन करता है”। अपने प्रोफेसर का हवाला देते हुए श्रुति पांडे ने कहा कि अस्पृश्यता के कारण ही हिंदू धर्म अस्तित्व में है। जाति और हिंदुत्व के मुद्दे पर उन्होंने किसी और दिन चर्चा करने को कहा।

अपने इसी बयान में श्रुति पांडेय ने इस्लाम की तारीफ करते हुए उसके विधवा पुनर्विवाह नियमों को हिन्दू धर्म के मुकाबले सरल और सराहनीय बताया। इसी के साथ श्रुति पांडेय ने इस्लाम को गलत बताने वालों पर भी अफ़सोस जाहिर किया और कहा कि उन लोगों को इस्लाम की अच्छाइयों के बारे में जानकारी ही नहीं है।

निष्कर्ष के रूप में उन्होंने ये भी कहा कि इस्लाम में विधवाओं का पुनर्विवाह सामान्य सामाजिक संरचना का एक अंग है और इस्लाम ये नहीं मानता कि विधवा महिलाओं को दोबारा शादी करने का अधिकार नहीं है।

श्रुति पांडेय का वायरल होता ये वीडियो कब का है ये फिलहाल निश्चित नहीं हो पाया है। इस वीडियो को LLB के छात्र मयूरनाथ ने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद यूनिवर्सिटी के कुलपति नवीन जिंदल से लेखिका शेफाली वैद्य ने सवाल किया है कि क्या वो भी छुआछूत का पालन करते हैं और श्रुति पांडेय के विचारों से सहमत हैं ?

ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर श्रुति पांडेय के बायो में लिखा गया है कि “प्रो. श्रुति पांडे जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल में लीगल प्रैक्टिस की एसोसिएट प्रोफेसर और सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स की निदेशक हैं। वह एक इंसान रही हैं…” ..। हालाँकि, अब वह वेबपेज हटा दिया गया है।

प्रोफेसर श्रुति पांडेय की लिंक्डइन (LinkedIn) प्रोफ़ाइल के अनुसार, उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ में ग्रेजुएशन करने के बाद लंदन विश्वविद्यालय से LLM की पढ़ाई की। लंदन विश्वविद्यालय से ही उन्होंने मानवाधिकार कानूनों में डिप्लोमा हासिल किया। इस से पहले वह फोर्ड फाउंडेशन में प्रोग्राम ऑफिसर रह चुकी हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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