अयोध्या में राम मंदिर: 75 साल बाद वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों से हटेगा बाबरी मस्जिद का नाम

कानून के जानकारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दस्तावेज से बाबरी मस्जिद का नाम हटाना एक प्रक्रिया है। इसे वक्फ बोर्ड को पूरा करना होगा। पुनर्विचार याचिका दाखिल किए जाने से इस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

राम जन्मभूमि मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अब सुन्नी वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों से बाबरी मस्जिद का नाम हटाने की कवायद शुरू हो गई है। यूपी सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड में 26-फैजाबाद’ नाम से दर्ज वक्फ सम्पत्ति ‘‘बाबरी मस्जिद’ को जल्द ही वक्फ बोर्ड के राजस्व अभिलेख से हटाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि वक्फ बोर्ड की 26 नवंबर की बैठक में इस पर फैसला लिया जाएगा। इसी बैठक में बोर्ड यह भी फैसला करेगा कि मस्जिद के लिए पॉंच एकड़ जमीन ली जाए या नहीं। 9 नवंबर को ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि से अलग मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए पॉंच एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश केंद्र सरकार को दिया था। इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करने की बात बोर्ड पहले ही कह चुका है।

जानकारी के मुताबिक बोर्ड के दस्तावेज में 1 लाख 23 हजार से ज्यादा संपत्तियाँ दर्ज हैं। बता दें कि 75 साल पहले 1944 में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद का नाम दर्ज कराया था। ये वक्फ नंबर 26 पर बाबरी मस्जिद अयोध्या जिला फैजाबाद नाम से दर्ज है। जिसे अब हमेशा के लिए हटाया जा सकता है।

मंगलवार (26 नवंबर, 2019) को लखनऊ में उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की अहम बैठक होगी। माल एवेन्यू स्थित बोर्ड के कार्यालय में 11 बजे से होने वाली बैठक में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले में यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड के बाबरी मस्जिद से जुड़े मुकदमे पर गौर किया जाएगा। बोर्ड की बैठक में कुल 8 सदस्य शामिल होंगे। इनमें चेयरमैन जुफर फारुकी के अलावा अदनान फरूखशर, अबरार अहमद, मोहम्मद जुनैद सिद्दीकी, सैय्यद अहमद अली, मोहम्मद जुनीद, इमरान माबूद खां और अब्दुल रज्जाक खां शामिल होंगे।

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बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारुकी ने हिन्दुस्तान से कहा कि बैठक में हम लोग इस बात पर फैसला लेंगे कि उच्च्तम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में बोर्ड को क्या करना है? अपनी बैठक में बोर्ड यह फैसला करेगा कि 5 एकड़ जमीन उसे कुबूल है अथवा नहीं। अगर कुबूल है तो उस जमीन पर मस्जिद के अलावा और क्या-क्या निर्माण होगा।

इस मामले में कानून के जानकारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दस्तावेज से बाबरी मस्जिद का नाम हटाना एक प्रक्रिया है, जिसे वक्फ बोर्ड को पूरा करना है। इस बीच कुछ मुस्लिम पक्षों के द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करने की बात भी सामने आई है। मगर कानून के जानकारों के मुताबिक यदि मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से पुनर्विचार याचिका दाखिल की भी जाती है तो सुन्नी वक्फ बोर्ड के दस्तावेज से बाबरी मस्जिद का नाम हटाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

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शरजील इमाम
शरजील इमाम वामपंथियों के प्रोपेगंडा पोर्टल 'द वायर' में कॉलम भी लिखता है। प्रोपेगंडा पोर्टल न्यूजलॉन्ड्री के शरजील उस्मानी ने इमाम का समर्थन किया है। जेएनयू छात्र संघ की काउंसलर आफरीन फातिमा ने भी इमाम का समर्थन करते हुए लिखा कि सरकार उससे डर गई है।

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