Friday, April 19, 2024
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पूर्व सैनिक बलविंदर सिंह को अदालत ने भेजा 8 दिन की पुलिस हिरासत में, ममता की पुलिस ने खींची थी पगड़ी

बलविंदर सिंह एक ब्लैक कैट कमांडो हैं और उन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन विजय सहित कई सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया था।

पश्चिम बंगाल में पूर्व सैनिक बलविंदर सिंह की पगड़ी खोले जाने और पीटने के बाद कोलकाता की एक स्थानीय अदालत ने 8 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। हालाँकि पुलिस द्वारा सिख धर्म का अपमान करने के खिलाफ देशव्यापी आक्रोश देखा गया। ममता बनर्जी सरकार ने उन्हें अवैध रूप से बन्दूक ले जाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। बलविंदर सिंह एक ब्लैक कैट कमांडो हैं और उन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन विजय सहित कई सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया था।

अकाली दल के नेता और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि सुरक्षा अधिकारी को पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि अकाली दल स्थिति पर निगरानी रख रहा है।

बलविंदर सिंह को बृहस्पतिवार (अक्टूबर 08, 2020) को भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) और बीजेपी द्वारा ‘नवान्न चलो’ प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सिंह भाजपा नेता प्रियांशु पांडे के निजी सुरक्षा अधिकारी हैं, उन्हें भी पुलिस ने हिरासत में लिया था।

खबरों के मुताबिक, बलविंदर सिंह को हावड़ा मैदान से पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया था, क्योंकि ऑन-ड्यूटी सिख सुरक्षा अधिकारी के पास भरी हुई बंदूक थी। मीडिया से पुलिस वाहन के अंदर से बात करते हुए बीजेपी नेता प्रियांगु पांडेय ने कहा कि बलविंदर सिंह एक पूर्व-सेना अधिकारी हैं और उनके पास बंदूक रखने के लिए उचित लाइसेंस भी था।

वहीं इस मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस ने तर्क दिया कि सिंह का लाइसेंस केवल राजौरी, जम्मू और कश्मीर में वैध है, क्योंकि यह वहाँ जारी किया गया था। हालाँकि, भाजपा नेता ने इस बात पर जोर दिया कि बलविंदर सिंह के शस्त्र लाइसेंस पर अखिल भारतीय परमिट की मोहर है और इसका उपयोग देश भर में कहीं भी किया जा सकता है।

भाजपा नेता ने कहा कि असम और गुवाहाटी में काम करने के बाद बलविंदर सिंह ने कोलकाता में उन्हें ज्वाइन किया था। पांडेय ने कहा कि पूरे भारत का शस्त्र लाइसेंस होने के बावजूद पुलिस ने सिंह के हाथ से बंदूक छीन ली। एक पूर्व सेना अधिकारी के साथ इस तरह की मारपीट बेहद ही अपमानजनक था।

गौरतलब है कि बलविंदर सिंह ने मीडिया से बात करते हुए यह पुष्टि की कि हथियार का लाइसेंस राजौरी से जारी किया गया था, लेकिन उनके पास पूरे भारत का परमिट था। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ एक कोने में खड़े थे जब पुलिस अधिकारी ने अचानक उन पर हमला किया। उन्हें घसीटा गया और सबके सामने उनकी पगड़ी को खींचकर उतार दिया गया। बाद में पुलिस ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि उसे पकड़ने के दौरान उसकी पगड़ी अपने आप ही खुल गई और इसमें पुलिस का कोई दोष नहीं है।

बलविंदर सिंह एक ब्लैक कैट कमांडो और कारगिल युद्ध के पूर्व सेना अधिकारी हैं। भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय द्वारा ट्वीट किए गए बलविंदर सिंह के बायोडाटा के अनुसार, वह विशेष बलों (6 पैरा) के साथ थे और कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन विजय सहित कई सैन्य अभियानों में भाग लिया था।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष मनिंदर सिंह सिरसा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को एक प्रतिनिधित्व सौंपा। पश्चिम बंगाल पुलिस के कृत्य को पूरे सिख समुदाय का घोर अपमान बताते हुए प्रतिनिधिमंडल ने बलविंदर सिंह के लिए न्याय की माँग की।

उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य समाज में पुलिस की शक्ति का इतना ज़बरदस्त दुरुपयोग नहीं किया जा सकता है। इसकी निंदा की जानी चाहिए। यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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